scriptAshtami measures which will gives result of worship of entire Navratri | पूरी नवरात्रि ज्यादा कुछ नहीं कर सकें हैं, तो अष्टमी के दिन अवश्य करें ये उपाय | Patrika News

पूरी नवरात्रि ज्यादा कुछ नहीं कर सकें हैं, तो अष्टमी के दिन अवश्य करें ये उपाय

कुछ निश्चित तरीकों से देवी मां का पूरा आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

भोपाल

Published: April 07, 2022 01:11:17 pm

नवरात्र पर्व को हिंदू धर्म में शक्ति की पूजा का विशेष पर्व माना जाता है। ऐसे में जहां कई भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी मां को प्रसन्न करने करने का प्रयत्न करते हैं, तो वहीं कई भक्त पूरे नौ दिनों तक देवी मां की भक्ति में कुछ न कुछ विशेष करते रहते हैं।

Navratri Aastmi special remedies
Navratri Aastmi special remedies

लेकिन कई बार समय की कमी या अन्य कुछ कारणों के चलते हम नवरात्रि के दौरान अपना पूरा समय देवी मां की भक्ति में नहीं लगा पाते या ज्यादा कुछ नहीं कर पाते हैं। यदि आपके साथ भी यह स्थिति इस चैत्र नवरात्र 2022 में बनी है तो आप केवल एक विशेष दिन का समय निकालकर कुछ निश्चित तरीकों से देवी मां का पूरा आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

जानकारों व पंडितों के अनुसार लेकिन यह ध्यान रखें कि केवल इसी दिन यह उपाय करने से तभी फल प्राप्त होता है जब आप सचमुच किसी समस्या के चलते ही देवी मां के नवरात्रों में आप देवी मां की पूर्ण भक्ति न कर सके हों।

Navratri Aastmi special remedies

यदि आपके साथ भी यह स्थिति रही है तो इस चैत्र नवरात्र की अष्टमी को दो उपाय आपको देवी मां का पूर्ण आशीर्वाद प्रदान कर सकते हैं। इसके तहत अष्टमी तिथि के दिन आपको सच्चे मन,पूर्ण विश्वास और श्रद्धा से रामरक्षास्त्रोत का कम से कम 7 बार व दुर्गा सप्तशती ( हिंदी / संस्कृत ) का कम से कम 2 बार पूर्ण पाठ करना होगा।

वहीं ये भी मान्यता है कि जो व्यक्ति नवरात्रि से रामरक्षास्त्रोत के पाठ का शुभारंभ करके हर दिन कम से कम एक बार इस पाठ को करता है उसे यह पाठ सुरक्षित रखने के साथ ही एकाग्र बुद्धि रखने के अलावा हर मुश्किल में सफलता दिलाने में मदद करता है।

वहीं दूसरी ओर अष्टमी को मां गौरी का दिन माना जाता है और मां गौरी को भगवान शिव की अर्धांगनी और गणेश जी की माता के रूप में जाना जाता है। मान्यता के अनुसार जब कोई भक्त महागौरी की सच्चे दिल से उपासना करता है तो उसके सभी बुरे कर्म धुल जाते हैं और इसके साथ ही उसके पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

ऐसे समझें रामरक्षास्त्रोत का महत्व...
नवरात्रि में रामरक्षास्त्रोत के महत्व के संबंध में पंडित एके शुक्ला बताते हैं कि यदि हम रामायण पढ़ें तो पता चलता है कि स्वयं श्रीराम ने भी रावण युद्ध से पहले मां दुर्गा को प्रसन्न कर उनसे शक्ति मांगी थी। और जैसे की रामरक्षास्त्रोत स्वयं एक रक्षा कवच है अत: नवरात्रि में इसका महत्व अत्यंत विशेष हो जाता है। ऐसे में राम रक्षास्त्रोत के पाठ की नवरात्रि में शुरूआत अत्यधिक लाभ देने के साथ ही तुरंत फल भी प्रदान करती है। एक खास बात ये भी है कि इस पाठ को हर दिन करना होता है।

श्रीरामरक्षास्तोत्र का पाठ:
मान्यता है कि राम रक्षास्त्रोत का पाठ करने वालों का स्वयं श्रीराम द्वारा रक्षण होता है। मान्यता है कि भगवान शंकर ने बुधकौशिक ऋषि को स्वप्न में दर्शन देकर, उन्हें रामरक्षा सुनाई और प्रात:काल उठने पर उन्होंने वह लिख ली। यह स्तोत्र संस्कृत भाषा में है। नवरात्रि पर रामरक्षास्त्रोत शुरू करने का अपना ही महत्व है, माना जाता है कि नवरात्रि से शुरु कर इस स्त्रोत का हर रोज लगातार पाठ करने से सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं।

नित्य इस स्तोत्र के पाठ से घर की सर्व पीडा सहित भूतबाधा भी दूर होती है। इसके अलावा ये भी मान्यता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने वाला दीर्घायु, सुखी, संततिवान, विजयी और विनय संपन्न होगा’, यह फलश्रुति इस स्तोत्र में बताई गई है ।

रामरक्षास्त्रोत करते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान...
वहीं रामरक्षास्त्रोत के दौरान कुछ खास बातें भी ध्यान में रखना ज्यादा श्रेयकर माना गया है। पंडितों व जानकारों के अनुसार रामरक्षास्त्रोत का पाठ करते समय भक्त को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह जिस श्लोक का पाठ कर रहा है, उसके मन में श्रीराम की वहीं स्थिति होने चाहिए।

जैसे...
श्लोक: श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणम् प्रपद्ये ।।२९।।

यानि इसी रूप में मतलब राम के चरणों का ध्यान इस दौरान मन वचन से रहे व स्वयं को उनके आगे नतमस्तक महसूस करते हुए उनकी शरण की अनुभूति करें।

श्लोक : दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य, वामे तु जनकात्मजा । पुरतो मारुतिर्यस्य, तं वन्दे रघुनन्दनम् ।।३१।।

यानि इस मंत्र का पूजन करते समय श्रीराम के दक्षिण भाग में लक्ष्मण व वाम ओर माता सीता आदि का श्लोक के अनुसार मन में ध्यान लाएं।

ऐसे समझें दुर्गा सप्तशती का महत्व
दुर्गा सप्तशती पाठ विशेष रूप से नवरात्रों में किया जाता है और अचूक फल देने वाला होता है। दूर्गा सप्तशती पाठ में 13 अध्याय है। पाठ करने वाला , पाठ सुनने वाला सभी देवी कृपा के पात्र बनते है। नवरात्रि में नव दुर्गा की पूजा के लिए यह सर्वोपरि किताब है। इसमें मां दुर्गा के द्वारा लिए गये अवतारों की भी जानकारी प्राप्त होती है।

नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करना विशेष और जल्दी फलदायक माना गया है। नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करने से अन्‍न, धन, यश, कीर्ति की प्राप्ति होती है।

दुर्गा सप्तशती में रखें इनका विशेष ध्यान...
दुर्गा सप्‍तशती का पाठ वैसे तो कई घरों में रोजाना किया जाता है। मगर नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करना विशेष और जल्दी फलदायक माना गया है। नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करने से अन्‍न, धन, यश, कीर्ति की प्राप्ति होती है। लेकिन पाठ की सफलता और पूर्ण लाभ के लिए पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए…

1. स्पष्‍ट उच्‍चारण-
दुर्गा सप्तशती के पाठ में सस्वर और एक लय से पाठ करने का महत्व है। सप्तशती में बताया गया है कि पाठ इस तरह से करना चाहिए कि एक-एक शब्द का उच्चारण साफ हो और आप उसे सुन सकें। बहुत जोर से या धीमे से पाठ ना करें।

2. शुद्धता-
पाठ करते समय हाथों से पैर का स्पर्श नहीं करना चाहिए, अगर पैर को स्पर्श करते हैं तो हाथों को जल से धो लें।

3. आसन-
पाठ करने के लिए कुश का आसन प्रयोग करना चाहिए। अगर यह उपलब्ध नहीं हो तब ऊनी चादर या ऊनी कंबल का प्रयोग कर सकते हैं।

4. वस्‍त्र-
पाठ करते समय बिना सिले हुए वस्त्रों को धारण करना चाहिए, पुरुष इसके लिए धोती और महिलाएं साड़ी पहन सकती हैं।

5. एकाग्रचित मन-
दुर्गा पाठ करते समय जम्हाई नहीं लेनी चाहिए। पाठ करते समय आलस भी नहीं करना चाहिए। मन को पूरी तरह देवी में केन्द्रित करने का प्रयास करना चाहिए।

6. पाठ विधि-
दुर्गा सप्तशती में तीन चरित्र यानी तीन खंड हैं प्रथम चरित्र, मध्य चरित्र, उत्तम चरित्र। प्रथम चरित्र में पहला अध्याय आता है। मध्यम चरित्र में दूसरे से चौथा अध्याय और उत्तम चरित्र में 5 से लेकर 13 अध्याय आता है। पाठ करने वाले को पाठ करते समय कम से कम किसी एक चरित्र का पूरा पाठ करना चाहिए। एक बार में तीनों चरित्र का पाठ उत्तम माना गया है।

7. पूर्ण फल प्राप्ति-
सप्तशती के तीनों चरित्र का पाठ करने से पहले कवच, कीलक और अर्गलास्तोत्र, नवार्ण मंत्र, और देवी सूक्त का पाठ करना करना चाहिए। इससे पाठ का पूर्ण फल मिलता है।

8. कुंजिकास्तोत्र-
सामान्यत: अगर संपूर्ण पाठ करने के लिए किसी दिन समय नहीं तो कुंजिकास्तोत्र का पाठ करके देवी से प्रार्थना करें कि वह आपकी पूजा स्वीकार करें।

9. क्षमा प्रार्थना-
सप्तशती पाठ समाप्त करने के बाद अंत में क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए और देवी से पाठ के दौरान कोई कोई भूल हुई हो तो उसके लिए क्षमा मांगनी चाहिए।

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