विचार मंथन : जब तक भारत दुनिया के सामने खड़ा नहीं होता, कोई हमारी इज्जत नहीं करेगा - ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

विचार मंथन : जब तक भारत दुनिया के सामने खड़ा नहीं होता, कोई हमारी इज्जत नहीं करेगा - ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

By: Shyam

Published: 29 Mar 2019, 03:48 PM IST

असली शिक्षा एक इंसान की गरिमा को बढ़ाती है और उसके स्वाभिमान में वृद्धि करती है । यदि हर इंसान द्वारा शिक्षा के वास्तविक अर्थ को समझ लिया जाता और उसे मानव गतिविधि के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ाया जाता, तो ये दुनिया रहने के लिए कहीं अच्छी जगह होती । जब बच्चे 15, 16 या 17 साल के होते हैं तब वे तय करते हैं कि उन्हें डॉक्टर, इंजिनियर या राजनीतिज्ञ बनना है या मंगल ग्रह या चंद्रमा पे जाना है, और ये वो समय होता है जब आप उन पर काम कर सकते हैं । आप उन्हें अपने सपनों को आकार देने में मदद कर सकते हैं ।

 

जब हम बाधाओं का सामना करते हैं, हम अपने साहस और फिर से खड़े होने की ताकत के छिपे हुए भण्डार को खोज पाते हैं, जिनका हमें पता नहीं होता कि वो हैं । और केवल तब जब हम असफल होते हैं हैं एहसास होता है कि संसाधन हमेशा से हमारे पास थे। हमें केवल उन्हें खोजने और अपनी जीवन में आगे बढ़ने की ज़रूरत होती है । जब तक भारत दुनिया के सामने खड़ा नहीं होता, कोई हमारी इज्जत नहीं करेगा । इस दुनिया में, डर की कोई जगह नहीं है । केवल ताकत ताकत का सम्मान करती है ।

 

युवाओं के लिए ये मेरा सन्देश है । जहाँ हृदय में सच्चाई होती है वहां घर में सामंजस्य होता है; जब घर में सामंजस्य होता है, तब देश में एक व्यवस्था होती है; जब देश में व्यवस्था होती है तब दुनिया में शांति होती है । मेरे लिए, दो तरह के लोग हैं: युवा और अनुभवी । मेरा संदेश, विशेष रूप से युवाओं के लिए, है कि वे अलग सोचने का साहस रखें, आविष्कार करने का साहस रखें, अनदेखे रास्तों पर चलने का साहस रखें, असंभव को खोजने और समस्याओं पर जीत हासिल करके सफल होने का साहस रखें । ये महान गुण हैं जिनके लिए उन्हें ज़रूर काम करना चाहिए ।

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