विचार मंथन : अनीति एवं अविवेक-युक्त मान्यता, परम्परा को कभी स्वीकार मत करों- स्वामी विवेकानंद

विचार मंथन : अनीति एवं अविवेक-युक्त मान्यता, परम्परा को कभी स्वीकार मत करों- स्वामी विवेकानंद

swami vivekananda कहते हैं कोई मूढ़ता तुम्हें झुकने के लिए विवश नहीं कर सकती

अनीति एवं अविवेक-युक्त मान्यता को स्वीकार मत करों

मेरे बच्चों! आज मैं तुम्हें एक बहुत बड़ा सन्देश देने खड़ा हुआ हूं और वह यह है कि तुम कभी किसी अनीति एवं अविवेक-युक्त मान्यता या परम्परा को अपनाने की बौद्धिक पराधीनता को स्वीकार न करना। सम्भव है इस संघर्ष में तुम अकेले पड़ जाओ, तुम्हें साथ देने वाले लोग अपने हाथ सिकोड़ लें, पर तो भी तुम साहस न हारना।

 

bhagwat geeta : गीता के ये नौ सूत्र बदल देंगे जीवन, कभी नहीं मिलेगी असफलता

 

कोई मूढ़ता तुम्हें झुकने के लिए विवश नहीं कर सकती

तुम्हारे दो हाथ सौ हाथ के बराबर हैं, इन्हें तान कर खड़े हो जाओगे तो बहुमत द्वारा समर्थित होते हुए भी कोई मूढ़ता तुम्हें झुकने के लिए विवश न कर सकेगी। जब तक तुम्हारी देह में प्राण शेष रहे, सत्य के समर्थन और विवेक के अनुमोदन का तुम्हारा स्वाभिमान न गले, यही अन्त में तुम्हारे गौरव का आधार बनेगा।

 

प्रसन्न रहना सीखें, मुस्कान वह दवा है जो गंभीर रोगों को भी जड़ से उखाड़ फेकती है-आचार्य श्रीराम शर्मा

 

तुम्हें कोई भी दबा नहीं सकता

बच्चों, जब तक तुम्हारे हृदय में उत्साह एवं गुरू तथा ईश्वर में विश्वास- ये तीनों वस्तुएं रहेंगी- तब तक तुम्हें कोई भी दबा नहीं सकता। मैं दिनोदिन अपने हृदय में शक्ति के विकास का अनुभव कर रहा हूं। हे साहसी बालकों, कार्य करते रहो।

 

महाकाल की तरह विष को अमृत बनाकर पीने की आदत डालों, फायदे में रहोगे- डॉ. प्रणव पंड्या

 

आध्यात्मिक ज्ञान के विस्तार के लिए आगे बढ़ों

इस दानशील देश में हमें पहले प्रकार के दान के लिए अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान के विस्तार के लिए साहसपूर्वक अग्रसर होना होगा! और यह ज्ञान-विस्तार भारत की सीमा में ही आबद्ध नहीं रहेगा, इसका विस्तार तो सारे संसार में करना होगा! और अभी तक यही होता भी रहा है!

 

विचार मंथन: भारत को स्वतन्त्रता दिलाने में सुक्ष्म जगत में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले महान तपस्वी- "महर्षि रमण"

 

धर्म-प्रचार

जो लोग कहते हैं कि भारत के विचार कभी भारत से बाहर नहीं गये, जो सोचते हैं कि मैं ही पहला सन्यासी हूं जो भारत के बाहर धर्म-प्रचार करने गया, वे अपने देश के इतिहास को नहीं जानते! यह कई बार घटित हो चुका है! जब कभी भी संसार को इसकी आवश्यकता हुई, उसी समय इस निरन्तर बहने वाले आध्यात्मिक ज्ञानश्रोत ने संसार को प्लावित कर दिया!
************

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned