दमन का द्रोह करती द्रौपदी

महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने श्रीकृष्ण से पूछा कि यह युद्ध हमने किसके बल से जीता

महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने श्रीकृष्ण से पूछा कि यह युद्ध हमने किसके बल से जीता? वासुदेव ने द्रौपदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह द्रौपदी की ही शक्ति है जिससे भीष्म, द्रोण, कर्ण, दुर्योधन और दु:शासन जैसे वीर महाभट मारे गए।

महाभारत के द्यूतपर्व में अपने सतीत्व को बचाती द्रौपदी की करूण कथा में दु:शासन के बार-बार खींचने पर द्रौपदी पृथ्वी पर गिर पड़ी। सभा में बैठे क्षत्रियों से वह बोली कि मेरी इससे बढ़कर दयनीय दशा और क्या हो सकती है कि मुझे विवश करके बालों से खींचते हुए यहां लाया गया है। दुष्ट कौरवों, क्या तुम्हें यह पता नहीं कि मैं पांडु की पुत्रवधू, युधिष्ठिर की पत्नी, वीर धृष्टद्युम की बहन सुशीला और इन सबसे बढ़कर श्रीकृष्ण की प्रिय बहन कृष्णा हूं। जब भीम की गदा उठेगी तो तुम कहां जाकर अपने प्राण बचाओगे? अर्जुन के अमोघ तीखे बाण चलेंगे तो तुहारी रक्षा कौन करेगा?

इन सबसे बढ़कर कृष्ण ने यदि सुदर्शन चक्र उठा लिया तो यह कुरूसभा श्मशान में नहीं बदल जाएगी? श्रीकृष्ण ने उस महासती द्रौपदी की वस्त्र बढ़ाकर लाज रखी। वस्तुत: यह द्रौपदी की ही साहसिक चेतावनी धर्म रक्षा के लिए पांडवों को प्रेरित करती थी। कुरूक्षेत्र में जब कभी पांडव युद्ध से पीछे हटने लगे तो द्रौपदी ही पांडवों के शौर्य की आग को भभकाती थी।
सुनील शर्मा
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