बाहर नहीं, अपने अंदर ढूंढें प्रेम, तभी मिलेगी प्रसन्नता

Sunil Sharma

Publish: Mar, 14 2018 01:54:11 PM (IST)

धर्म और आध्यात्मिकता
बाहर नहीं, अपने अंदर ढूंढें प्रेम, तभी मिलेगी प्रसन्नता

अगर आप किसी दूसरे से प्रेम और सुख पाना चाहते हैं तो यह आपके और उसके लिए बड़ी समस्या बन सकती है। यह आपको तय करना चाहिए।

प्रेम कोई ऐसी चीज नहीं है जो आप करते हैं। प्रेम ऐसी चीज है, जिसमें केवल आप होते हैं। अपने अंदर प्रेम जगाने के लिए दूसरे व्यक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन बिना किसी की मदद के भी आप इसे अपने अंदर जगा सकते हैं। तब यह ज्यादा टिकाऊ होगा क्योंकि इस धरती पर कोई भी सौ प्रतिशत भरोसेमंद नहीं होता है। अगर आप किसी दूसरे से प्रेम और सुख पाना चाहते हैं तो यह आपके और उसके लिए बड़ी समस्या बन सकती है। यह आपको तय करना चाहिए। अगर आप लोगों के साथ प्रेम बांटने को तैयार हैं तो यह बिलकुल अलग बात होगी।

भावनाएं बनाता सुखद
प्रेम कोई मंजिल नहीं है, बस मंजिल की ओर एक कदम है। प्रेम को इतना ज्यादा महत्त्व सिर्फ इसलिए दिया जाता है क्योंकि लंबे समय से लोगों में उनका सबसे मजबूत पहलू, उनकी भावनाएं रही हैं। बेशक आज-कल लोग खुद को बुद्धिजीवी समझने लगे हैं, फिर भी नब्बे प्रतिशत से ज्यादा लोगों में बुद्धि, शरीर और ऊर्जा नहीं, बल्कि भावना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। इसलिए भावनाओं को सुखद बनाना बहुत जरूरी है। वरना यह कटुता की तरह बाहर आएगी। प्रेम इसलिए नहीं होता क्योंकि हम दोस्त बनाने या संबंध बनाने की कोशिश करते हैं। अगर हम अपने भीतरी आयामों में विकसित होते हैं तो प्रेम ही हमारे होने का एकमात्र तरीका है।

प्रेम से दुनिया होती खूबसूरत
प्रेम और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर सिक्का एक तरफ गिरता है तो यह प्रेम है। अगर यह दूसरे रुख की ओर गिरता है तो यह नफरत बन जाता है। अगर आप प्रेममय बन जाते हैं तो यह आपके लिए शानदार बात है। यह आपके आसपास के लोगों के लिए सुन्दर होगा क्योंकि आपके साथ रहना उनके लिए भी एक खूबसूरत अनुभव होगा। अगर आप प्रेममय हो जाते हैं तो आप जो भी करते हैं, उसे आपके आसपास के लोग अच्छे भाव से लेते हैं। उन्हें कही न कहीं लगता है कि यह आपके भीतर से सही कांटेक्स्ट या सन्दर्भ सेे आ रहा है। अन्यथा आप कितनी भी अच्छी चीजें कर लीजिए, वे सब आपके लिए बुराई का सबब बन जाएंगी।

प्रेम आपको अंदर से फूल की तरह खिला देता है।
प्रेम का संबंध किसी दूसरे इंसान से नहीं है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लेते हैं अभी आप एक कमरे में बैठे हैं। उसी कमरे में एक और इंसान है जिससे आप बहुत प्रेम करते हैं। अगर वह इंसान उस कमरे से बाहर खड़ा हो जाए तो क्या तब भी आपको उससे प्रेम रहता है? आपके मन में अभी भी प्रेम हो सकता है। अगर वह इंसान दस मील दूर चला जाए, क्या तब भी आपके मन में प्रेम हो सकता है? अगर वह सौ मील दूर चला जाए तो? अगर वह इंसान दुनिया में नहीं है तब भी आपके मन में प्रेम हो सकता है। तो यह प्रेम क्या उस इंसान के बारे में है या खुद आपके बारे में? यह दूसरे का नहीं, आपका गुण है।

चाहे कोई आपसे प्रेम करे या नहीं, फर्क नहीं पड़ता। अगर आप दिल में प्रेम महसूस कर रहे हैं तो यह आपको खूबसूरत इंसान बना देता है क्योंकि आप अंदर से अच्छा महसूस कर रहे हैं। अगर आप भीतर से आनंद में हैं तो आप अपने आसपास के लोगों को और भी ज्यादा सुखद लगेंगे। जब कभी आपको अपने भीतर बहुत सुखद एहसास हो रहा होता है तो आप एक बहुत अच्छे इंसान बन जाते हैं। अगर आप बुरा महसूस कर रहे हैं, तो आप एक खराब इंसान बन जाते हैं।

जिम्मेदारियों के आधार पर भी टिका है प्रेम
प्रेम वो नहीं है जो आप करते हैं। प्रेम वो है जिस तरह से आप हैं। इसका मतलब है कि आपकी भावनाओं में मधुरता भर गई है। अगर आप कोई बर्तन भी उठाते हैं तो उसे पूरे प्यार से उठाएंगे। अगर आप किसी दूसरे व्यक्ति का स्पर्श भी करेंगे तो बेहद प्यार से करेंगे। अगर आपके आासपास कोई नहीं भी होगा और आप बैठेंगे तो बड़े प्रेम से बैठेंगे। आपको अपने प्रेम का कॉन्सेप्ट या विचार बदलने की जरूरत है।

प्रेम किसी और के बारे में नहीं है, यह आपके बारे में है। आपके भीतर मौजूद भावों की मधुरता के चलते आपका जीवन सुंदर हो जाता है। फिर चाहे आपके जीवन में सफलता आए या असफलता, आपका जीवन मधुर ही होगा। प्रेम में जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए, अन्यथा यह टिकेगा नहीं। प्रेम एक फूल की तरह है। अगर आपके हाथ में कोई फूल है तो आपको सावधानी से चलना चाहिए। प्रेम को जिंदा रखने के लिए बहुत सारी शर्तों या स्थितियों को पूरा करना होता है।

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