खाटूश्यामजी के फाल्गुनी लक्खी मेले में एकादशी पर रंगों से रंगे व भावों से भरे भक्त बाबा श्याम में एकीभाव हो गए। सलोने श्याम मानो साकार और भक्त उनमें एकाकार हो गए। उत्साह व उमंग में डूबा प्रेम पग-पग और रोम-रोम में उमग रहा था। नाचते-गाते भक्तों का आस्था से भरा आनंद व उल्लास भी ह्रदय में ना समाकर इत्र-फूलों की सौंधी सुगंध संग हर ओर उमड़-बिखर रहा था।

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