जीवन में चाहते हैं शांति और सफलता, तो भगवान बुद्ध के इन 10 विचारों का करें फॉलो

जीवन में चाहते हैं शांति और सफलता, तो भगवान बुद्ध के इन 10 विचारों का करें फॉलो

Pawan Tiwari | Publish: May, 18 2019 02:50:16 PM (IST) | Updated: May, 18 2019 02:50:17 PM (IST) धर्म और आध्यात्मिकता

जीवन में चाहते हैं शांति और सफलता, तो भगवान बुद्ध के इन 10 विचारों का करें फॉलो

आज बुद्ध पूर्णिमा है। आज ही के दिन महात्मा बुद्ध का जन्म दिवस मनाया जा रहा है। आज ही के दिन वैशाख उत्सव भी मनाया जा रहा है। आज बौद्ध धर्म के साथ-साथ हिन्दुओं के लिए भी ये बहुत ही खास दिन है। मान्यता है कि आज ही के दिन भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। आज का दिन निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

गौरतलब है कि आज ही के दिन राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ज्ञान की खोज में सुख-सुविधा छोड़कर जंगल की ओर निकल पड़े थे। बताया जाता है कि महात्मा बुद्ध को बिहार के गया स्थित महाबोधि मंदिर के महाबोधि वृक्ष/पीपल वृक्ष के नीचे कठीन तपस्या करने के बाद ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बाद में अनुयायियों ने पूरी दुनिया में उनकी शिक्षा और ज्ञान को पूरी दुनिया में फैलाया।

अगर आप चाहते हैं कि आपको जीवन में शांति और सफलता मिले तो आपको भगवान बुद्ध के 10 विचार का जरूर फॉलो करना चाहिए। अगर उनके विचारों का फॉलों करते हैं तो आपको शांति और सफलता दोनों मिलेगी। अइये जानते हैं भगवान बुद्ध के 10 विचार...

  1. जंगली जानवर की अपेक्षा कपटी और दुष्ट मित्र से डरना चाहिए। क्योंकि जंगली जानवर आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को नुकसान पहुंचा सकता है।
  2. भगवान बुद्ध के अनुसार, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफादारी सबसे बड़ा संबंध है जबकि स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है।
  3. भगवान बुद्ध की माने तो घृणा, घृणा करने से कम नहीं होती बल्कि प्रेम करने से घटती है।
  4. अपने क्रोध के लिए कोई दंड नहीं पाता, जबकि क्रोध द्वारा दंड मिलता है।
  5. हजारों बेकार शब्दों से अच्छा है कि एक शब्द बोला जाए जिससे शांति आए।
  6. सभी गलत कार्य मन से ही आते हैं। अगर मन में परिवर्तन आ जाए तो गलत कार्य नहीं आ सकता।
  7. भूत पर ध्यान नहीं देना चाहिए, ना ही भविष्य का सपना देखना चाहिए। सिर्फ वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए।
  8. जो व्यक्ति 50 लोगों से प्यार करता है, वह 50 दुखों से घिरा रहता है। जो किसी से प्यार नहीं करता उसे कोई समस्या नहीं है।
  9. क्रोध खुद को जलाती है न कि दूसरे को। जैसे किसी और पर फेंकने के इरादे से एक गर्म कोयला अपने हाथ में रखने की तरह है।
  10. शरीर को स्वस्थ्य रखना भी एक कर्तव्य है। अगर शरीर स्वस्थ्य नहीं रहेगा तो मन और सोच को अच्छा और साफ नहीं रह सकता।
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