कोटा. कहीं गणपति के जयकारे, कहीं जय जय जय गिरिजा के लाला...सरीखी चौपाइयां तो कहीं आरती के सुरों में जयगणेश देवा और कहीं परम्पराओं को साकार करते चंचडि़यां खड़काते बाल गोपाल। स्वर्ण रजत शृंगार और मोदक की महक, कहीं ढोल की थाप पर गणपति की अगुवानी, फिर शुभ मुहूर्त में गणपति की स्थापना, चहुंओर सिर्फ गणपति का बोलबाला...। गणेश चतुर्थी पर इसी तरह का शहर में उल्लास छाया। घर-मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर पांडालों में प्रथम पूज्य विराजमान हुए। 

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