बंगाल में होती है दो तरह की दुर्गा पूजा, दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग

बंगाल में होती है दो तरह की दुर्गा पूजा, दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग

Tanvi Sharma | Updated: 02 Oct 2019, 12:56:47 PM (IST) धर्म

विश्वभर में प्रसिद्ध है कोलकाता की दुर्गा पूजा, परंपरागत किये जाते हैं सभी कार्य

दुर्गा पूजा का बंगाल में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। नवरात्रि में पंश्चिम बांगाल के कोलकाता में दुर्गा पूजा प्रमुख त्योहार के रुप में मनाया जाता है। यहां की दुर्गा पूजा देखने के लिये लोग दूर-दूर से आते हैं। खुशी का शहर कहलाने वाला कोलकाता अपनी अनोखी व प्रमुख परंपरा के लिये काफी प्रसिद्ध है।

 

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यहां पूजा के चार दिन इतने खास और मनमोहक होते हैं की हर व्यक्ति को अपने अंदर समेट लेते हैं। क्योंकि यहां जाति, धर्म, वर्ग का कोई भेद नहीं होता। सभी आपस में मिलजुलकर एक दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं।

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कोलकाता की दुर्गा पूजा विश्वभर में प्रसिद्ध है। क्योंकि यहां की परंपरागत सभी कार्य किये जाते हैं। पूजा जैसी भी दिखे, लेकिन कोलकाता में दुर्गा पूजा की अपनी अपनी विशेषताएं हैं। यही विशेषताएं कोलकाता की दुर्गा पूजा को सबसे ज्यादा और अलग बनाती हैं। एक विशेषता और खास बात आपको बताते हैं, जो सिर्फ यहां होती है और वो है यहां दो तरह से की जाने वाली दुर्गा पूजा। जी हां, आपको बता दें की कोलकाता में दुर्गा पूजा दो तरह से मनाई जाती है। पारा और दूसरी बारिर। तो आइए जानते हैं कैसे होती है दोनों पूजा

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1. पारा दुर्गा पूजा
कोलकाता में दो तरह की दुर्गा पूजा मनाई जाती है। जिसमें रस्मों के अलावा सबकुछ अलग होता है। दोनों की अलग-अलग तरीकों से मनती हैं। परंपरा के अनुसार एक होती है पारा दुर्गा पूजा यानि स्थानिय दुर्गा पूजा जो सामान्यतः पंडालों और कम्यूनिची हॉल में होती है। इसका मतलब रोशनी, डिजाईन्स, थीम बेस्ड और भीड़ का एक भव्य आयोजन होता है।

2. बारिर दुर्गा पूजा
वहीं उत्तरी कोलकाता आर दक्षिण कोलकाता में बारिर परंपरा के अनुसार दुर्गा पूजा की जाती है। बारिर का मतलब घर में पूजा। इस पूजा का एक घरेलू प्रभाव होता है और ये घर वापसी की भावना के साथ लोगों को अपनी जड़ों के करीब लाती है। यह पूजा सामान्यतः धनी घरों में ही की जाती है।

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