Myth : इस धार्मिक मेले के बाद बदल जाता है CM!

मुख्यमंत्रियों के लिए शुभ नहीं है यह धार्मिक मेला... आयोजन कराने वाले सीएम की नहीं होती सत्ता में वापसी... अब तक पांच मुख्यमंत्रियों की चली गई है कुर्सी

By: Devendra Kashyap

Published: 01 Jul 2019, 03:02 PM IST

मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सिंहस्थ ( simhastha ) चर्चा में है। चर्चा की वजह सियासी है। दरअसल, यहां के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा ( BJP ) नेता शिवराज सिंह चौहान ( Shivraj Singh Chouhan ) ने कहा है कि सिंहस्थ के बाद सत्ता बदल जाती है। दरअसल, शिवराज सिंह चौहान 2018 विधानसभा चुनाव में मिली हार पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा कि यहां ( madhya pradesh ) सिंहस्थ के बाद सीएम बदल जाते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बात सच है कि मध्यप्रदेश में सिंहस्थ के बाद सरकार बदल जाती है और मैं इसका गवाह हूं।

कब होता है सिंहस्थ मेले का आयोजन

सिंहस्थ हर 12 साल बाद पड़ता है। मान्यता है कि जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करता है तब सिंहस्थ पर्व का आयोजन होता है। इस दौरान लोग शिप्रा नदी में स्नान करते हैं। सिंहस्थ पर्व का आयोजन महाकाल की नगरी उज्जैन ( simhastha in Ujjain ) में किया जाता है। उज्जैन का सिंहस्थ मानक स्नान पर्व के रूप में मनाया जाता है।

मेले के बाद कब-कब बदली सत्ता

सिंहस्थ का इतिहास बहुत लंबा है। मध्यप्रदेश के गठन के बाद 1956 में पहला सिंहस्थ पड़ा। तत्कालीन मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ला ने सिंहस्थ का आयोजन करवाया था लेकिन उनकी सीएम पद की कुर्सी 31 दिसंबर को चली गई।

1968 में सिंहस्थ कुंभ के दौरान गोविंद नारायण सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे। लेकिन सिंहस्थ कुंभ के आयोजन के बाद गोविंद नारायण सिंह को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और उनके हाथों से प्रदेश की सत्ता चली गई।

मार्च-अप्रैल 1980 में सिंहस्थ का आयोजन हुआ। इस दौरान राज्य में जनता पार्टी की सरकार थी और सुंदरलाल पटवा मुख्यमंत्री थे। लेकिन कुंभ मेले के बाद वो एक महीने भी मुख्यमंत्री नहीं रह पाए और उनकी सरकार चली गई।

1992 सिंहस्थ के दौरान भी सुंदरलाल पटवा सीएम थे। बाबरी मस्जिद ढहने के कारण बीजेपी शासित प्रदेशों में 16 दिसंबर 1992 को रातों-रात सरकार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। प्रदेश में 6 दिसंबर 1993 तक राष्ट्रपति शासन रहा। इसके बाद 7 दिसंबर 1993 को कांग्रेस के दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री बने।

अप्रैल-मई 2004 में सिंहस्थ : 2004 में सिंहस्थ की तैयारी 2003 में मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शुरू की, लेकिन 2003 में हुए कुंभ में उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव हार गई और भाजपा की सरकार बनी। बतौर मुख्यमंत्री उमा भारती ने 2004 में सिंहस्थ का आयोजन किया लेकिन उसके बाद वो ज्यादा दिनों तक मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री नहीं रह सकीं और 1994 में हुए हुबली दंगा मामले में कर्नाटक की कोर्ट से अरेस्ट वारंट जारी होने के कारण उन्हें 23 अगस्त 2004 को इस्तीफा देना पड़ा।

2016 सिंहस्थ ( Simhastha 2016 ) : 2016 सिंहस्थ का आयोजन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने करवाया था। इस दौरान शिवराज सरकार ने 5 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की थी। इस कुंभ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हुए थे। सिंहस्थ के दो साल बाद शिवराज सिंह चौहान की कुर्सी चली गई। क्योंकि प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में शिवराज की पार्टी भाजपा को बहुमत नहीं मिल सका, जिस कारण उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

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