इन नौ कन्याओं को माना जाता है नवदुर्गा का साक्षात रुप, जरुर करें पूजन

इन नौ कन्याओं को माना जाता है नवदुर्गा का साक्षात रुप, जरुर करें पूजन

Tanvi Sharma | Updated: 30 Sep 2019, 03:59:50 PM (IST) धर्म

इन नौ कन्याओं को माना जाता है नवदुर्गा का साक्षात रुप, जरुर करें पूजन

शारदीय नवरात्रि में व्रत रखने की विधान है, कई लोग इस दिन व्रत, उपवास रखते हैं। कुछ लोग इन दिनों निर्जला व्रत रखते हैं, कुछ फलाहारी और कुछ नंगे पैर व्रत रखते हैं। लेकिन नवरात्रि में शक्ति उपासना और व्रत रखने की परंपरा आज से नहीं बल्कि त्रेतायुग से चली आ रही है। भगवान श्री राम द्वारा शक्ति की विशेष पूजा व व्रत का देवी भागवत में वर्णन मिलता है।

 

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देवी भागवत के अनुसार भगवान राम ने जब देवी दुर्गा की आराधना की थी उस समय वहां पूजा संपन्न होते ही वहां मां जगदम्बा प्रकट हो गई थीं। शारदीय नवरात्र के समाप्त होने पर व्रत का पारण करके दशमी के दिन श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई की थी। उसके बाद उन्होंने कालांतर में रावण का वध करके कार्तिक पक्ष की कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन सीता को लेकर अयोध्या वापस लौट आए थे।

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मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नवरात्रि का महत्व

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नवरात्रि का महत्व बहुत विस्तार से बताया गया है। वहीं देवी भागवत के अनुसार नवकन्याओं को नवदुर्गा का प्रत्यक्ष रुप बताया है। कन्याओं की पूजा करने से मां दुर्गा की पूजा का फल प्राप्त होता है। क्योंकि कहा जाता है की धरती पर कन्याएं मां का प्रत्यक्ष रुप हैं।

कन्या पूजन के लिये 2 से 10 सालों तक की कन्याओं का चुनाव करना चाहिए। क्योंकि इससे ज्यादा उम्र की कन्याएं कुमारिका नहीं कहलाती हैं।

- 2 या 3 साल की कन्याएं ‘त्रिमूर्ति’ कहलाती हैं। इनका पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

- 4 साल की कन्याएं ‘कल्याणी’ कहलाती हैं। इनका पूजन करने से विवाह आदि के मंगल कार्य संपन्न हो जाते हैं।

- 5 साल तक की कन्याएं ’रोहिणी’ कही जाती हैं। इनकी पूजा करने से स्वास्थ्य में लाभ होता है।

- 6 साल तक की कन्या को ‘कालिका’ का रुप माना जाता है। इनके पूजन से शत्रुओं का नाश होता है।

- 8 साल तक की कन्या ‘शांभवी’ का रुप होती है। इनका पूजन करने से व्यक्ति के दुःख-दरिद्रता का नाश होता है।

- 9 साल की कन्या ‘दुर्गा’ पूजन से असाध्य रोगों का शमन और कठिन कार्य सिद्ध होते हैं।

- 10 साल की कन्या को ‘सुभद्रा’ कहा जाता है। इनका पूजन करने से मोक्ष प्राप्त होता है।

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