सूर्य ने आर्द्रा नक्षत्र में किया प्रवेश, अब बदलेगा बारिश का प्रभाव वातावरण में आएगी नमी

सूर्य ने आर्द्रा नक्षत्र में किया प्रवेश, अब बदलेगा बारिश का प्रभाव वातावरण में आएगी नमी

Tanvi Sharma | Publish: Jun, 23 2018 07:07:45 PM (IST) धर्म

सूर्य ने आर्द्रा नक्षत्र में किया प्रवेश, अब बदलेगा बारिश का प्रभाव वातावरण में आएगी नमी

सूर्यदेव का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश हो चुका है। 22 जून, शुक्रवार को सूर्यदेवता सुबह आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और 6 जुलाई तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश हमारे वातावरण व मौसम में भी कई तरह के बदलाव लाएगा। इस प्रवेश से विभिन्न नक्षत्र और नामाक्षर वाले लोगों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। कई लोगों के लिए शुभ फल और कई लोगों के लिए अशुभ फल की प्राप्ति होंगी।

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हिंदू धर्म के अनुसार इस नक्षत्र को बरसात का प्रारंभ माना जाता है। कृषि कार्यों के लिए खास 10 नक्षत्रों में आर्द्रा को सबसे महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है। सूर्य का इन नक्षत्रों पर संचरण ही वर्षाकाल का प्रतीक होता है। ज्योतिषियों के आकलन के अनुसार इस बार आर्द्रा में सामान्य बारिश के ही आसार हैं। अत: इस साल सामान्य बारिश का अनुमान लगाया जा रहा है। कहा जाता है की सूर्य के आर्द्रा में होने से वातावरण में बारिश और नमी आती है। ज्योतिषाचार्य गुलशन अग्रवाल के अनुसार सूर्य के आकाश मंडल के 27 नक्षत्रों में छठे नक्षत्र आर्द्रा में प्रवेश होने से प्रकृति में नमी का कारक है।

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इस नक्षत्र में इन देवताओं की करें पूजा

शिवपुराण और वृहत संहिता के अनुसार पीपल और पाकड़ के पौधे लगाने और पूजन से राहू, शनि और कालसर्प की शांति होती है। इस नक्षत्र में जन्में जातकों के ग्रह की शांति की पूजा पीपल और पाकड़ के पेड़ की छाया में करने से दोष खत्म होता है। वहीं इस नक्षत्र में जन्में जातक गुस्सैल होते हैं। निर्णय लेते समय मन की स्थिति दुविधापूर्ण हो जाती है, इन लोगों का स्वभाव संशयी होता है। इस नक्षत्र में मकान बनवाना और राज्याभिषेक शुभ होता है। नए वस्त्र धारण से स्वास्थ्य कमजोर संभावना होती है। इस नक्षत्र में आप तिल, गुड का दान कर सकते हैं।

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मत्स्य पुराण और मनुस्मृति के अनुसार-दही, खटाई और मांसाहार आर्द्रा में वर्जित होते हैं और मक्खन और आम का सेवन लाभकारी होता है। आर्द्रा नक्षत्र में भगवान शिव और विष्णु के विशेष तिथि को पूजा करना अच्छा माना जाता है, और पूजा में भगवान को केले के पत्ते पर गुड़ की खीर, आम व लीची, खोवा की मिठाई का भोग लगाया जाता है।

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