आज सोमवती अमावस्या पर बने बहुत ही अशुभ योग, भूल से भी कोई शुभ कार्य

यदि तिथ्यादि शुभ हो और समय शुद्ध हो तो अश्विनी नक्षत्र में औषध, यात्रा, अलंकार, विद्या, चित्रकारी आदि कार्य शुभ होते हैं। पर आज तो तिथि ही शुभ नहीं है

By: सुनील शर्मा

Published: 16 Apr 2018, 11:21 AM IST

अमावस्या तिथि मात्र प्रात: ७.२७ तक, इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अंतरात्रि सूर्योदय पूर्व प्रात: ५.४७ तक है। तदन्तर द्वितीया तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। इस प्रकार आज शुक्ल प्रतिपदा का क्षय हुआ है। अमावस्या व शुक्ल प्रतिपदा दोनों ही तिथियों में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित कहे गए हैं। नक्षत्र: अश्विनी ‘क्षिप्र व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र अंतरात्रि ३.१२ तक है। इसके बाद भरणी ‘उग्र व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। यदि तिथ्यादि शुभ हो और समय शुद्ध हो तो अश्विनी नक्षत्र में औषध, यात्रा, अलंकार, विद्या, चित्रकारी आदि कार्य शुभ होते हैं। पर आज तो तिथि ही शुभ नहीं है।

योग: विष्कुंभ नामक नैसर्गिक अशुभ योग रात्रि १०.४८ तक, इसके बाद प्रीति नामक नैसर्गिक शुभ योग रहेगा। विष्कुंभ नामक योग की आगे की तीन घड़ी शुभ कार्यों में त्याज्य है। विशिष्ट योग: कुमार योग नामक शुभ योग प्रात: ७.२७ से अंतरात्रि ३.१२ तक है। कुमार योग में शिक्षा-दीक्षा लेना-देना, मैत्री करना और व्रतादि शुभ होता है। करण: नाग नामकरण प्रात: ७.२७ तक, इसके बाद किंस्तुघ्न नामक स्थिर संज्ञक करण हैं। स्थिर संज्ञक करणों में पितृकार्यादि करने चाहिए।

शुभ मुहूर्त: उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज किसी शुभ व मांगलिक कार्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: ७.४१ तक अमृत, प्रात: ९.१६ से पूर्वाह्न १०.५२ तक शुभ तथा दोपहर बाद २.०२ से सूर्यास्त तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.०१ से १२.५२ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज देवकार्य, सोमवती अमावस्या, श्रीशुकदेव जयंती, मेला पुरपिंजौर (हरियाणा), गुरु अंगददेव पुण्य दिवस (नवीन मत से) तथा गंडमूल अंतरात्रि ३.१२ तक। अश्विनी में जन्मे जातकों की गंडमूल शांत करा लेना हितकर है। चन्द्रमा: चन्द्रमा संपूर्ण दिवारात्रि मेष राशि में है।

दिशाशूल: सोमवार को वैसे पूर्व दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। पर आज मेष राशि के चन्द्रमा का वास पूर्व दिशा की यात्रा में सम्मुख रहेगा। यात्रा में सम्मुख चन्द्रमा धनलाभ कराने वाला माना गया है। राहुकाल: प्रात: ७.३० से ९.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (चे, चो, ला, लि, लू) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। इनकी जन्म राशि मेष है तथा स्वर्णपाद से जन्म हुआ है। सामान्यत: ये जातक स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ कमजोर, बहुसंतति वाले, परिवार के लिए कष्टप्रद, पर बुद्धिमान, आभूषण आदि पहनने के शौकीन, परोपकारी, जनप्रिय और यशस्वी होते हैं। इनका भाग्योदय २० वर्ष की आयु के बाद होना प्रारम्भ हो जाता है। मेष राशि वाले जातकों की आज कहीं लाभप्रद यात्रा हो सकती है।

सुनील शर्मा
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