योग: विष्कुंभ नामक नैसर्गिक अशुभ योग सायं 5.01 तक, तदन्तर प्रीति नामक नैसर्गिक शुभ योग है। करण: वणिज नामकरण पूर्वाह्न 11.05 तक, इसके बाद रात्रि 9.32 तक भद्रा संज्ञक विष्टि नामकरण है। तदन्तर बवादि करण प्रारम्भ हो जाएंगे। भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं।

 

 

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