42 डिग्री तापमान में प्रतिदिन ड्यूटी कर रहा 40 पुलिसकर्मियों का बल

धूप में ड्यूटी पुलिसकर्मियों के लिए बन रही जानलेवा, अधिकारी ड्यूटी लगाकर हो जाते हैं निश्चिंत, सुरक्षा के इंतजाम नहीं

By: Mahesh Singh

Published: 14 Apr 2019, 03:01 AM IST


रीवा. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप, जब इंसान के साथ जानवर तक छांव की तलाश में रहते है। ऐसी हालात में एक व्यक्ति ऐसा है जो धूप में खड़े होकर अपनी ड्यूटी करता है। यह शहर की पुलिस है जिसके लिए भीषण गर्मी कोई मायने नहीं रखती है। 42 डिगी तापमान में 40 पुलिसकर्मियों का बल प्रतिदिन ड्यूटी दे रहा है। यह धूप अब पुलिस के लिए जानलेवा साबित हो रही है। लेकिन फिलहाल अधिकारियों के तरफ से पुलिसकर्मियों को कोई रियायत य सुरक्षा के इंतजाम नहीं किये जा रहे हैं।

शहर की यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए प्रतिदिन यातायात थाने से करीब 40 पुलिसकर्मियों का बल लगता है। लगभग सभी चौराहों में बल आवश्यकतानुसार तैनात होता है जिसको सुबह से रात नौ बजे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इनमें सबसे ज्यादा सिरमौर चौराहे में आधा दर्जन पुलिसकर्मी तैनात होते हैं जिनको दोपहर 42 डिग्री तापमान में भी खड़े होकर ड्यूटी करनी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो फ्लाईओवर दोनों ओर ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को होती है जहां पर छांव की कोई व्यवस्था नहीं है।

लू के थपेड़ों से जृझते हैं...
रीवा शहर के बस स्टैण्ड, समान तिराहा, अस्पताल चौराहा, धोबिया टंकी, स्टेच्यू चौराहा, जयस्तंभ सहित अन्य स्थानों में भी पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करनी पड़ती है। पुलिसकर्मियों को कड़ी धूप और लू के गर्म थपेड़ों से जूझना ही पड़ता है। इससे बचाव के लिए उनको न तो ड्यूटी में रियायत रहती है और न ही उनको किसी तरह के संसाधन उपलब्ध करवाये जाते हंै। यही कारण है कि भीषण गर्मी में ड्यूटी पुलिसकर्मियों को बीमार बना रही है। अप्रैल माह में ही भीषण गर्मी अपना रौद्र रूप दिखा रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में पुलिसकर्मियों को इससे भी तेज धूप में ड्यूटी करनी पड़ सकती है।

एक तरफ जान की चिंता व दूसरी ओर अधिकारियों का डर
फील्ड में तैनात यातायात पुलिसकर्मियों के सामने गंभीर समस्या रहती है। एक तरफ तो सड़कों पर लगने वाले जाम की चिंता रहती है तो दूसरी ओर अधिकारियों का डर उनको सताता रहता है। यदि किसी पुलिसकर्मी को अधिकारी ने छांव मेें खड़े देखा लिया तो वहां पर रहम की कोई गुंजाईश नहीं होती है। पुलिस अधिकारियों को मानवता के दृष्टि से भी इनके लिए सोचना पड़ेगा।

प्रधान आरक्षक के पैरों की फट गई थी नस
बीते शुक्रवार को शिल्पी प्लाज चौकी में पदस्थ प्रधान आरक्षक नरेन्द्र पाण्डेय के पैरों की नस फट गई थी। उनकी ड्यूटी डीआईजी ने शिल्पी प्लाज बी ब्लाक के पीछे नो-पार्किंग में खड़े वाहनों को हटवाने के लिए लगाई थी। दिनभर उन्होंने धूप में खड़े होकर ड्यूटी की। पैरों में अत्यधिक दबाव पडऩे की वजह से उनकी नस फट गई और उनके पैरों से खून निकलने लगा। बाद में उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

अधिकारी नहीं समझ पाते मैदानी कर्मचारियों का दर्द
फील्ड में काम करने वाले पुलिसकर्मियों का दर्द एसी में घूमने वाले अधिकारी नहीं समझ पाते है। उनको 42 डिग्री तापमान में खड़े होकर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के दर्द का एससास नीं है। यही कारण है कि ड्यूटी का हुक्म तो दे दिया लेकिन गर्मी से उनको बचाने के लिए अभी तक कोई व्यवस्था अधिकारियों के द्वारा नहीं की गई है।

विशेषज्ञ की राय....
इस संबंध में संजय गांधी अस्पताल के उपअधीक्षक डा. अतुल सिंह ने बताया कि लगातार खड़े रहने से पैरों पर दबाव पड़ता है और इससे नशे टेढी हो जाती है। ऐसे में उनके फटने की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादातर पुलिसकर्मियों को यह समस्या होती है क्योंकि उनको काफी समय खड़े रहना पड़ता है। इससे बचने के लिए पुलिसकर्मी लगातार खड़े रहने से बचे और बीच-बीच में बैठकर थोड़ी-थोड़ी देर में आराम जरूर करें। अपने पैरों को हल्के हाथ से सहला दे जिससे खून का बहाव निरंतर बना रहे।

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पुलिस की ड्यूटी ही हर मौसम में काम करने की होती है। स्टॉफ को धूप से बचाने के लिए बीच-बीच में ड्यूटी बदल दी जाती है। यदि धूप की वजह से किसी स्टॉफ की तबियत खराब होती है तो उनकी ड्यूटी अन्यत्र लगाई जायेगी। लू से बचने की हिदायत भी स्टॉफ को दी जा रही है। ड्यूटी में भोजन करके निकले और पानी अनिवार्य रूप से पीते रहे।
-आबिद खान, एसपी रीवा

 

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