Corona alert ; बाघ पर कोरोना के लक्षण के बाद चिडिय़ाघर एवं ह्वाइट टाइगर सफारी में अलर्ट, जानवरों के लिए भी बढ़ी चिंता

- अमेरिका में लक्षण पाए जाने के बाद सेंट्रल जू अथारिटी ऑफ इंडिया ने अलर्ट जारी किया

By: Mrigendra Singh

Updated: 07 Apr 2020, 11:56 AM IST


रीवा। कोरोना संक्रमण अब जानवरों में भी पाया गया है, जिसके चलते दुनिया के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। अभी तक कोविड-19 नाम के इस वायरस के संक्रमण की चपेट में मानव जाति थी लेकिन अमेरिका के चिडिय़ाघर में बाघ में संक्रमण पाया गया है। सेंट्रल जू अथारिटी ऑफ इंडिया की ओर से सभी चिडिय़ाघर एवं नेशनल पार्कों के लिए गाइडलाइन जारी की गई है।

यह पत्र महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव चिडिय़ाघर मुकुंदपुर भी पहुंचा है, जिसके बाद से प्रबंधन ने भी जानवरों की देखरेख में जुटे कर्मचारियों को अलर्ट जारी कर दिया है। भोजन एवं सफाई के कार्य में लगे कर्मचारियों को परिसर से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है, बाहर से जो भी कर्मचारी परिसर में आएंगे उनका पहले स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। जिन बाघों की हालत सामान्य नहीं होगी उनका परीक्षण किया जाएगा। बाघों के साथ ही अन्य जानवरों में खांसी, चींकने और कमजोरी के लक्षण पाए जाएंगे उनका परीक्षण होगा।
बताया गया है कि न्यूयार्क के चिडिय़ाघर में 27 मार्च से एक बाघ की तबियत खराबी थी, उसका केयर टेकर किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया था। कई दिनों तक भोजन नहीं करने खांसने के लक्षण पाए जाने पर जांच की गई तो कोविड-१९ का संक्रमण पाया गया है। यह वही वायरस है जो मनुष्य पर पाया जाता है। इसकी पुष्टि होने के बाद से दुनिया भर में नई चुनौती सामने आ गई है। यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर की एडवाइजरी के बाद अब हर जगह बाघों एवं अन्य जानवरों की सुरक्षा बढ़ाई गई है।
- देश में केवल तीन स्थानों पर होगी जांच
सेंट्रल जू अथारिटी ऑफ इंडिया की ओर से जारी की गई गाइडलाइन में देश के तीन स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां पर जानवरों के सेंपल भेजकर कोरोना संक्रमण की जांच कराई जानी है। इसमें प्रमुख रूप से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनीमल डिसीज भोपाल, एनआरसीई हिसार हरियाणा एवं सीएडीआरएडी और आइवीआरआई बरेली उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
- चिडिय़ाघर में ये चौकसी बढ़ाई
मुकुंदपुर चिडिय़ाघर में अलर्ट जारी होने के बाद बाघों को दिया जाने वाला मांस गर्म पानी में उबाला जा रहा है। कर्मचारियों को सेनेटाइज होने और मास्क की अनिवार्यता है। वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को परिसर में ही रहना होगा। खासी या अन्य किसी भी तरह से अस्वस्थ कर्मचारी को जानवरों के बाड़े तक जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बाघों की 24 घंटे सीसीटीवी के जरिए निगरानी की जाएगी। सेंट्रल जू अथारिटी की गाइडलाइन है कि केयर टेकरों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट की भी व्यवस्था की जानी है।

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Patrika Rewa IMAGE CREDIT: Patrika

- लॉकडाउन के बाद खोलने की होगी समीक्षा
चिडिय़ाघर को पहले 31 मार्च तक के लिए बंद किया गया था, अब लॉकडाउन की वजह से इसे १४ अप्रेल तक कर दिया है। जानवरों में संक्रमण आने के कारण अब सेंट्रल जू अथारिटी इसकी समीक्षा करेगा तभी आम पर्यटकों के लिए खोलने पर विचार होगा। यदि अमेरिका के अलावा अन्य दूसरी जगह बाघों में संक्रमण पाए जाएंगे तो आने वाले कुछ समय तक चिडिय़ाघर को बंद रखने की भी सिफारिश की जा सकती है।
- इन जानवरों पर भी आशंका
जानवरों पर पहली बार कोविड-19 के लक्षण पाए गए हैं, इसलिए अभी इस पर अधिक शोध नहीं हुए हैं। सेंट्रल जू अथारिटी ने बिल्ली प्रजाति के जानवरों, फेर्रेट प्रजाति में नेवला, कबर बिज्जू, लोमड़ी के साथ बंदरों पर भी आशंका जाहिर की है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो अब तक जिन परिवारों में कोरोना के लक्षण रहे हैं उसमें दूसरे व्यक्ति तक तो फैला है लेकिन उनके पालतू जानवरों के बारे में शिकायतें नहीं आई हैं। इसलिए अभी शोध का इंतजार किया है। इसके पहले कोरोना का सीओवी-१ वायरस चीन में ही पाया गया था, जिससे सार्स नाम की बीमारी हुई थी।
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सेंट्रल जू अथारिटी की गाइडलाइन आई है, अमेरिका में बाघों में भी कोरोना के संक्रमण पाए गए हैं। जिससे हमने भी चौकसी बढ़ा दी है। निगरानी रहेगी जिनमें भी लक्षण होंगे, उनका सेंपल भोपाल भेजा जाएगा। आहार उबाल कर देना शुरू कर दिया है। केयर टेकरों को भी संक्रमण से दूर रहने के बचाव करने के लिए कहा गया है।
डॉ. राजेश सिंह तोमर, चिकित्सक चिडिय़ाघर मुकुंदपुर

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