लाइफ लाइन मार्ग में जाम में फंसी सायरन बजाती रही एंबुलेंस

लाइफ लाइन मार्ग में जाम में फंसी सायरन बजाती रही एंबुलेंस
Ambulance playing siren stuck in a jam on the Life Line route

Shiv Shankar Pandey | Publish: Sep, 12 2019 03:03:03 AM (IST) Rewa, Rewa, Madhya Pradesh, India

अस्पताल चौराहे से गेट तक पहुंचने में छूट जाते है पसीने, प्रतिदिन हलाकान होते हैं शहरी

रीवा। जिला ही नहीं बल्कि पूरे संभाग से मरीजों को लेकर संजय गांधी अस्पताल आने वाली एम्बुलेंस को शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था का प्रतिदिन सामना करना पड़ता है। एम्बुलेंस चाहे जिस मार्ग से आए उनका जाम में फंसना लगभग तय रहता है। हालत यह है कि शहर में घुसने के बाद मरीज को अस्पताल के अंदर तक पहुंचाने में एम्बुलेंस को बीस से तीस मिनट का समय लग जाता है। ऐसा नजारा दिन भर देखने को मिलता है, जब एम्बुलेंस जाम में फंसी सायरन बजाती रहती है लेकिन उसको राह नहीं मिलती है।

आधे घंटे तक फंसी रही एम्बुलेंस
बुधवार को भी एक एम्बुलेंस शहर के लाइफ लाइन कहे जाने वाले अमहिया मार्ग में अस्पताल चौराहे के समीप जाम में फंसी रही। करीब आधे घंटे तक ड्राइवर सायरन बजाता रहा लेकिन एम्बुलेंस को राह नहीं मिली। गंभीर बात तो यह रही कि यातायात का जिम्मा संभाल रहे पुलिसकर्मी भी नजर नहीं आए। इस दौरान गाड़ी के अंदर बैठे मरीज और उसके परिजन बदहाल व्यवस्था को कोसते नजर आए।

सभी मार्गों में लगता है जाम
सिरमौर चौराहा, शिल्पी प्लाजा तरफ से मरीजों को लाने वाली एम्बुलेंस अस्पताल चौराहा से लेकर धोबिया टंकी के गेट तक जाम के चलते कछुआ गति से चलती है। वहीं समान तिराहा व गोविन्दगढ मार्ग से मरीजों को लाने वाली एम्बुलेंस गुढ़ चौराहा से लेकर अस्पताल के गेट तक जाम में फंसती है। हालत यह है कि मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। मऊगंज से गाड़ी एक घंटे में मरीज को लेकर रीवा आ जाती है लेकिन समान तिराहा से लेकर अस्पताल तक पहुंचने में उसको आधे घंटे से अधिक का समय लग जाता है। स्थिति उस समय खराब हो जाती है जब एम्बुलेंस में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीज को अस्पताल लेकर आती है। यह समस्या कोई एक दिन की नहीं है बल्कि आए दिन एम्बुलेंस जाम का शिकार होती है। जिस तरह से अधिकारी समस्या को नजरअंदाज कर रहे है उससे शीघ्र व्यवस्था सुधरने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

आखिर अस्पताल चौराहे के जाम से कब मिलेगी मुक्ति
अस्पताल चौराहे में शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब जाम न लगता हो। दिन में एक दो बार नहीं बल्कि दर्जनों बार जाम लगता है। इसके बाद भी अधिकारी व्यवस्था सुधारने को लेकर गंभीर नहीं है। सवाल यह उठता है कि आखिर अस्पताल चौराहे की बदहाल व्यवस्था में कब सुधार होगा। बुधवार को भी ११ बजे से लेकर १२.३० बजे तक चौराहे पर भीषण जाम लगा रहा। जिससे सैकड़ों वाहन जाम में फंसे रहे। इस बीच यहां पर घंटों शहरी हलाकान होते रहे।

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