पद स्वीकृति के बिना विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों का खामियाजा भुगत रहे कर्मचारी


- सेवानिवृत्त होने वालों की पेंशन रुकी तो अनुकंपा नियुक्तियों पर भी फंसा पेंच

By: Mrigendra Singh

Published: 17 Sep 2021, 10:21 PM IST


रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में शासन से स्वीकृति लिए बिना ही कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला अब उनके लिए भी परेशानी का सबब बन रहा है जिनकी नियुक्तियां हुई थी। अब कर्मचारी सेवानिवृत्त होने लगे हैं, शासन से पद स्वीकृत नहीं होने की वजह से इन कर्मचारियों को पेंशन एवं अन्य स्वत्व नहीं मिल रहा है। साथ ही कुछ कर्मचारियों की मौतें भी हुई थी, उनके आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति पर भी पेंच फंसा हुआ है। विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों के बारे में बताया गया है कि वर्ष 1988 से पहले अलग-अलग समय पर विश्वविद्यालय ने 104 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। इसमें 20 पद शासन से स्वीकृत हुए तो उन्हें समायोजित कर दिया गया। इसके बाद 27 मई 1995 को 84 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया, जबकि इनके लिए शासन से पद ही स्वीकृत नहीं था। विश्वविद्यालय ने उस दौरान इन कर्मचारियों के वेतन की मांग शासन से की लेकिन वहां से इंकार कर दिया गया तो विश्वविद्यालय खुद के बजट से इनको भुगतान कर रहा है। इससे विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। वहीं वर्षों सेवा देने के बाद भी कर्मचारी स्वत्वों के लिए परेशान हो रहे हैं।
-
प्रबंधन अब तक नहीं तय कर पाया जवाबदेही
शासन के नियमों के विपरीत विश्वविद्यालय में उस दौरान किन अधिकारियों ने इन नियुक्तियों को हरी झंडी दी। इसमें किनकी भूमिका क्या है, इस पर जवाबदेही तय करने के लिए बीते साल ही पत्र शासन की ओर से आया था। शासन ने इसके पहले भी कई बार इस मामले में जानकारी विश्वविद्यालय से मांगी लेकिन हर बार यह कहा जाता रहा है कि जानकारी जुटाई जा रही है। पूर्व में आए पत्र का जवाब अब तक नहीं भेजा गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन इसके लिए कोरोना काल का हवाला दिया है। इसके पहले भी कई बार इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी की शिकायतें राजभवन एवं मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचती रही हैं। जिसमें जांच के लिए निर्देश भी मिलते रहे हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी मर्जी के अनुसार जवाब भी देता रहा है।

- पेंशन के लिए परेशान हो रहे कर्मचारी
जिन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को शासन से पद स्वीकृति के बिना विश्वविद्यालय ने नियमित कर दिया था, वह अब रिटायर्ड भी होते जा रहे हैं। स्वीकृति के पेंच में फंसे होने की वजह से शासन द्वारा पेंशन का लाभ इन्हें नहीं मिल पा रहा है। जिसकी शिकायत लेकर ये रिटायर्ड कर्मचारी भटक रहे हैं। इसके साथ ही पांच कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, उनके आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति के मामले इसलिए लंबित हैं कि कर्मचारियों की नियुक्ति ही पद स्वीकृति के बिना हुई थी। आडिट में भी लगातार आपत्तियां आ रही हैं।

- पूर्व कुलसचिव की जांच भी अधूरी
विश्वविद्यालय द्वारा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को 1995 से नियमित वेतनमान दिया जा रहा था। 14 मई 2010 से इन्हें स्थाई घोषित कर दिया गया है। इस पूरे मामले में तत्कालीन कुलसचिव के विरुद्ध जांच चल रही है। उन पर आरोप है कि पद सृजन के लिए शासन से बिना स्वीकृति लिए ही इन्होंने कर्मचारियों को स्थाई घोषित कर वेतनमान भी स्वीकृत कर दिया।
- ----
नियुक्तियों में दागियों की भरमार
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और पदोन्नतियों को लेकर मनमानी निर्णय लिए जाते रहे हैं। यही वजह है कि कई प्रोफेसर के प्रमोशन सवालों के घेरे में हैं। पूर्व में जारी किए गए आदेशों के तहत कइयों की पदोन्नतियां निरस्त की जा चुकी हैं। हाल ही में सिस्टम इंचार्ज पीके राय को प्रोफेसर के रूप में पदोन्नति करने के मामले को राजभवन ने निरस्त कर दिया है। अब पीके राय से नियम विरुद्ध की गई पदोन्नति के समय में लिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी। इनके जैसे विश्वविद्यालय में अन्य कई कर्मचारी हैं, जिनकी नियुक्तियां या फिर पदोन्नतियां सवालों के घेरे में हैं।

---

Mrigendra Singh Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned