कोरोना काल का अतिथि विद्वानों को 25 हजार रुपए की दर से मिलेगा मानदेय

- विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की आपात बैठक में लिया गया निर्णय, चार बिन्दुओं के एजेंडे को दी गई स्वीकृति

By: Mrigendra Singh

Published: 25 Oct 2020, 11:24 AM IST

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद की आपात बैठक आयोजित की गई। जिसमें चार बिन्दुओं पर चर्चा हुई और सभी को अनुमोदित भी कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के बीआरबी माथुर सभाकक्ष में हुई इस बैठक में मुख्य रूप से अतिथि विद्वानों के मानदेय से जुड़े मामले पर चर्चा की गई। कोरोना काल में विश्वविद्यालय की कक्षाएं संचालित नहीं की गई लेकिन शासन ने राहत देते हुए मानदेय भुगतान किए जाने की अनुमति दी है। जिसके चलते विश्वविद्यालय ने नियमित एवं स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों के अतिथि विद्वानों को अप्रेल से लेकर अक्टूबर तक २५ हजार रुपए की औसत दर से हर महीने के भुगतान की सहमति दी गई है। विश्वविद्यालय में दो तरह के अतिथि विद्वाना नियुक्त किए गए हैं, जिसमें नियमित पाठ्यक्रमों वालों को शासन के नियमों के अनुसार ही लेक्चर के हिसाब से मानदेय भुगतान किया जाता है। वहीं स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में वर्ष 2016 में ही विश्वविद्यालय ने एक पैनल बनाया था जिसमें हर विभाग में कुछ अतिथि विद्वान तय किए गए हैं और विभागाध्यक्ष आवश्यकता के अनुसार उनसे कक्षाएं संचालित करवाते हैं। कार्यपरिषद ने फिलहाल लॉकडाउन एवं कोरोना काल में करीब छह महीने का मानदेय २५ हजार रुपए प्रतिमाह की दर से भुगतान करने का अनुमोदन किया है लेकिन आगामी नवंबर महीने से पूर्व की शर्तों के अनुसार ही वेतन दिया जाएगा। इसमें उनके लेक्चर का सत्यापन कराया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान(रूसा) के तहत विश्वविद्यालय के विकास के लिए 20 करोड़ रुपए की स्वीकृति का अनुमोदन किया गया। इस योजना में विश्वविद्यालय के रेनोवेशन और अपग्रेडेशन के लिए छह करोड़ रुपए और उपकरण खरीदी के लिए चार करोड़ रुपए पहली किश्त के रूप में विश्वविद्यालय को मिल भी चुकी है, अब तक कार्यपरिषद की अनुशंसा नहीं मिल पाने की वजह से कार्य रुका हुआ था। कार्यपरिषद सदस्यों ने कहा है कि इसमें शासन के भंडार एवं क्रय नियमों के अनुसार ही सारी प्रक्रिया पूरी कराई जानी है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को उपादान ग्रेच्युटी का भुगतान दस लाख रुपए से बढ़ाकर २० लाख रुपए करने का भी अनुमोदन दिया गया है। विश्वविद्यालय के भृत्य रहे स्व. मोलई यादव के रोके गए वेतन के भुगतान पर भी चर्चा हुई। जिसमें तय किया गया है कि महीने भर के भीतर उसका भुगतान किया जाएगा। इस बैठक में प्रमुख रूप से कुलपति प्रो. एनपी पाठक, कुलसचिव बृजेश सिंह, अतिरिक्त संचालक प्रो. पंकज श्रीवास्तव, राजभवन के प्रतिनिधि डॉ. केके त्रिपाठी, डॉ. अजय सिंह, रवीन्द्र चौहान, अंजू सिंह बघेल एवं अन्य मौजूद रहे।

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