त्योंथर को परीक्षा केन्द्र बनाए जाने पर फिर आपत्ति

- कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप

By: Mrigendra Singh

Published: 03 Apr 2021, 09:46 PM IST

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा त्योंथर के शासकीय कालेज को परीक्षा केन्द्र बनाए जाने के निर्णय पर आपत्ति उठाई गई है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने कहा है कि पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देशों की वजह से त्योंथर सहित अन्य कई कालेजों का परीक्षा केन्द्र तोड़ा गया था। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि भविष्य में कभी भी इन केन्द्रों में परीक्षा आयोजित कराने की रूपरेखा बनाई जाती है तो विश्वविद्यालय पहले कोर्ट को सूचित करेगा। माला ने कहा कि इस तरह के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी विश्वविद्यालय कार्यपरिषद ने गलत रूप से निर्णय ले लिया। उन्होंने कहा कि गत दिवस कार्यपरिषद ने यह निर्णय पारित किया था कि अब त्योथर को भी परीक्षा केन्द्र बनाया जाएगा। बताया गया है कि बीके माला ने ही हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन कालेजों को परीक्षा केन्द्र नहीं बनाने की मांग उठाई थी जहां पर खुले तौर पर नकल के प्रकरण सामने आ रहे थे। यहां के प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। अब विश्वविद्यालय कार्यपरिषद ने इस पर यह कहते हुए परीक्षा केन्द्र बनाने की सिफारिश की है कि त्योंथर के छात्रों को रीवा एवं अन्य स्थानों में परीक्षा के लिए जाना पड़ता है। जिससे परेशानी होती है। साथ ही उन दिनों नियमित स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई थी, अब कालेज में नियमित स्टाफ भी पदस्थ है इसलिए कोई समस्या नहीं आएगी।
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विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव को सतना भेजा गया

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव बृजेश सिंह की प्रतिनियुक्ति अवधि नहीं बढऩे की वजह से पद से हटाया गया था। साथ ही उन्हें माडल साइंस कालेज रीवा में अटैच किया गया था। इस दौरान सिंह को उम्मीद थी कि दोबारा उनकी प्रतिनियुक्ति शासन लेगा और विश्वविद्यालय के कुलसचिव फिर से बनाए जाएंगे। अब उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश में उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। जारी किए गए आदेश में उन्हें शासकीय पद्मधर सिंह कालेज सतना में पदस्थ किया गया है। वह मूल रूप से भौतिकी के प्राध्यापक हैं। अपनी सेवा अवधि का लंबा समय उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर दूसरे संस्थानों में ही बिताया है। पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से निलंबित भी हुए थे। अब फिर से उन पर कई आरोप लगाए गए हैं। जिसकी शिकायत शासन के पास पहुंची तो अतिरिक्त संचालक से जांच कराने के लिए कहा गया है। अभी भी जांच अधूरी है जिसकी वजह से प्रतिनियुक्ति बढ़ाने का मामला अटक गया।

Mrigendra Singh Reporting
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