APSU कार्यपरिषद की बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े ज्यादातर मामले लटके

ज्यादातर एजेंडों को नहीं मिली मंजूरी, शुल्क वृद्धि सहित अन्य मुद्दों पर रार, डॉ.राय का मामला भी

By: Balmukund Dwivedi

Published: 30 Dec 2018, 06:34 PM IST

रीवा. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की शनिवार को हुई बैठक में ज्यादातर एजेंडों पर सहमति नहीं बन पाई है। निर्माण के कुछ मामलों को छोड़ दिया जाए तो शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े ज्यादातर मामले लटक गए हैं। बैठक में प्रमुख रूप से शुल्क वृद्धि, अतिथि विद्वानों के मानदेय, निर्माण कार्य एवं डॉ. पीके राय की पदोन्नति का मामला उठा। शुल्क वृद्धि का मामला अगले शैक्षणिक सत्र तक के लिए टल गया है। अतिथि विद्वानों के मानदेय बढ़ाने का भी कार्यपरिषद सदस्यों ने विरोध किया। डॉ. पीके राय की पदोन्नति मामले को लेकर राजभवन से 12 अक्टूबर को आए पत्र को कार्यपरिषद में रखा गया। पदोन्नति पर कार्यपरिषद सदस्यों की सहमति नहीं बन पाई। मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है। राजभवन से आए पत्र पर सदस्यों ने मामला कोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देकर किसी भी प्रकार का निर्णय नहीं लिया। बैठक दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई जो शाम करीब चार बजे तक चली। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केदारनाथ सिंह यादव ने की।

शुल्क वृद्धि का विरोध
विश्वविद्यालय प्रबंधन शुल्क में व़ृद्धि करना चाहता है। इसी को लेकर अध्यक्ष की अनुमति से बैठक में प्रस्ताव रखा गया। नामांकन, पूर्नगणना, परीक्षा, डिग्री सहित अन्य शुल्क में वृद्धि करने की तैयारी में हैं। कार्यपरिषद सदस्यों ने शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव का विरोध किया और अंत तक सहमति नहीं बन पाई। सदस्यों ने अपने तर्क रखे। कहा कि, २०१६ में विश्वविद्यालय ने शुल्क बढ़ाया था। उस समय बहुत ज्यादा शुल्क बढ़ाई गई थी। अब महज दो वर्ष बाद फिर से शुल्क बढ़ाकर छात्र - छात्राओं पर भार डालना उचित नहीं हैं। ज्यादातर सदस्यों ने शुल्क न बढ़ाने पर सहमति जताई।

अतिथि विद्वानों का नहीं बढ़ेगा मानदेय
कुछ कार्यपरिषद सदस्यों ने विश्वविद्यालय में काम कर रहे अतिथि विद्वानों के मानदेय का मुद्दा भी रखा। लेकिन, इस पर भी सहमति नहीं बन पाई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुलपति ने भी अतिथि विद्वानों के मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। इसके पीछे तर्क दिया गया है। विश्वविद्यालय के पास आर्थिक आधार नहीं है। जिससे मानदेय बढ़ाया जाए। यदि मानदेय बढ़ाना जाता है कि स्ववित्तीय कोर्स बंद करने की हालत हो जाएगी।

डॉ. पीके राय का मामला कोर्ट में
डॉ. पीके राय को शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में शामिल करने एवं पदोन्नत करने को लेकर राजभवन से १२ अक्टूबर को आए पत्र को बैठक में रखा गया। राज्यपाल के पत्र का जवाब भेजा जाना है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का प्रयास था कि राज्यपाल को ऐसा जवाब भेजा जाए जिससे वे पदोन्नति को लेकर संतुष्ट हो सकें। पदोन्नति को सही ठहराने का प्रयास किया जा रहा था। लेकिन आखिरकार ऐसा नहीं हो पाया। कार्यपरिषद सदस्यों ने पदोन्नति पर उठाए गए सवाल को गंभीरता से लिया। मामला न्यायालय में भी है। ऐसे में न्यायालय में सुनवाई तक इंतजार करने पर सहमति बनी।

ईपीएफ राशि को ममला भी उलझा
सात लाख अट्ठाईस हजार एक सौ इक्कीस रुपए ईपीएफ राशि की पेनाल्टी को लेकर भी कार्यपरिषद में निर्णय नहीं हो पाया। कार्यपरिषद सदस्यों ने शैक्षणिक संस्थान का मामला होने का हवाला देकर पेनाल्टी राशि में कटौती की मांग की। कहा कि, इसके लिए जो भी जिम्मेदार हो उस पर कार्यवाही के लिए लिखा जाए। विश्वविद्यालय से एक प्रतिनिधि की नियुक्ति की जाए।

कई निर्माण कार्याे को स्वीकृति
बैठक में निर्माण कार्य को लेकर रखे गए ज्यादातर प्रस्तावों को कार्यपरिषद की मंजूरी मिली गई है। जिसमें बाइक, कार के लिए सेड निर्माण, कुलपति आवास के सामने सीसी रोड, फीस काउंटर हाल के आस -पास निर्माण का है।

ये बैठक रहे मौजूद
बैठक में कुलपति प्रो. केदारनाथ सिंह यादव, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ.सतेन्द्र शर्मा, क्षितिज पुरोहित, डॉ.महेश श्रीवास्तव, प्रवीण ङ्क्षसह, एसएस तिवारी, रविंद्र चौहान, अर्चना गुप्ता, एपीएसयू कुलसचिव डॉ.बृजेश सिंह मौजूद रहे।

Balmukund Dwivedi Desk
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