देहदान : मेडिकल कालेज में एनाटॉमी के किताब बने तीरथ, शारीरिक संरचना पढ़ सकेंगे चिकित्सा छात्र

श्याम शाह महाविद्यालय को 2004 से लेकर अब 11 दधीच मिल, एनाटामी विभाग में रखा गया पार्थिव शरीर

By: Rajesh Patel

Published: 03 Jan 2020, 12:36 PM IST

रीवा. श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय को गुरुवार एक और दधीच मिला गया। दोपहर बाद तीन बजे मेडिकल कालेज की एनाटामी विभाग में बोदाबाग निवासी तीरथ नामदेव (92) का पार्थिव शरीर रखा गया। परिवारजनों की सूचना पर मेडिकल कालेज के चिकित्सकों की टीम ने देहदान की औपचारिकता पूरी की। मेडिकल कालेज के रेकॉर्ड में तीरथ नामदेव का नाम ११वें देहदानी के रूप में दर्ज किया गया है।
परणोपरांत देहदान का लिया था संकल्प
ठंड बढऩे के कारण बोदाबाग निवासी तीरथ नामदेव का बुधवार की शाम अचानक अटैक के कारण निधन हो गया। तीरथ नामदेव सिलाई का काम करते थे। निधन से पहले उन्होंने परिवार के लोगों से देहदान की इच्छा जताई थी। बच्चें की सहमति से उन्होंने मेडिकल कालेज में संकल्प पत्र भी भरा था।

बेटों ने पूरी की पिता के परणोपरांत इच्छा
तीरथ नामदेव का बड़ा बेटा ओमप्रकाश नामदेव सीधी स्थित जीडीसी कालेज में प्रोफेसर हैं। दूसरा बेटा राकेश नामदेव माइनिंग विभाग में नौकरी करते हैं। बेटों ने बताया कि पिता ने मरणोपरांत शरीर को मेडिकल कालेज के भावी डॉक्टरों को पढऩे के लिए देहदान का निर्णय लिया था। मेडिकल कालेज के डॉक्टरों की सूचना दी गई और डॉक्टरों की टीम देहदान की औपचारिकता पूरी की है। गुरुवार को मेडिकल कालेज के एनाटामी विभाग में पार्थिव शरीर रखा गया। अब तीरथ नामदेव की शरीर चिकित्सा छात्रों के पढऩे के काम में आएगा।

मेडिकाल कलेज में अब तक 11वां देहदान
मेडिकल कालेज के एनाटामी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पीजी खानवेल्कर ने बताया कि मेडिकल कालेज में २००४ से लेकर अब तक १० देहदान पहले हो चुके हैं। 11वें देहदान के रूप में तीरथ नामदेव का पार्थिव शरीर रखा गया है। शरीर छात्रों के शैक्षणिक कार्य में उपयोग किया जाएगा। एबीबीएस के छात्र शरीरिक संरचना के बारे में पढ़ सकेंगे। देहदान की औपचारिकता के दौरान डॉ. अर्जुन ङ्क्षसह, डॉ. रेडी अन्य स्टाफ के साथ परिजन मौजूद रहे।

140 से अधिक देहदान के लिए भरे गए संकल्प पत्र
मेडिकल कालेज को दधीच नहीं मिल रहे हैं। कालेज के रेकॉर्ड के अनुसार अब तक 11 देहदान हुए हैं। जबकि 150 से अधिक लोगों ने मपरोणोपरांत देहदान का संकल्प पत्र भरा है। लेकिन, ज्यादातर लोगों के परिवार के सदस्य बाद में देहदान के लिए तैयार नहीं होते हैं। जिससे भावी चिकित्सकों को शारीरिक संरचना पढऩे के लिए पार्थिव शरीर नहीं मिल पा रहे हैं।

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