हाइवे पर दम तोड़ रहे मवेशी, टोल कंपनियों का केवल वसूली पर ध्यान

रीवा-बनारस और प्रयागराज नेशनल हाइवे पर हर दिन दुर्घटना की वजह बन रहे आवारा मवेशी, गौवंश को मरने के लिए सडक़ पर छोडऩे वालों पर कार्रवाईनहीं कर पा रहा प्रशासन

रीवा. जिले में आवारा मवेशियों की समस्या से किसान जूझ रहे हैं। खेतों से इन्हें खदेडक़र सडक़ों की ओर भेजा जा रहा है। नेशनल हाइवे सहित अन्य सडक़ों पर बड़ी संख्या में इन मवेशियों का डेरा है। सडक़ों से गुजरने वाले वाहनों का सामना इन मवेशियों से होता है, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। इन दुर्घटनाओं से वाहनों के साथ उसमें सवार तो चोटिल होते ही हैं, साथ ही सडक़ पर बैठे जानवरों को भी चोट पहुंचती है। जिले से दो बड़े नेशनल हाइवे गुजरते हैं, जिसमें एक रीवा को बनारस तो दूसरा प्रयागराज से जोड़ता है। इन दोनों हाइवे में हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। इन वाहनों से गुजरने के बदले तीन स्थानों पर टोल बैरियर लगाए गए हैं। जहां से निकलने वाले हर वाहन से रुपए लिया जा रहा है लेकिन इसके बदले जो सेवाएं इन टोल कंपनियों को देना चाहिए वह नहीं दे पा रही हैं। जोगिनहाई, मसुरिहा एवं सोहागी में टोल प्लाजा लगाए गए हैं, जहां पर आए दिन इनके कर्मचारियों द्वारा लोगों से जबरिया रुपए वसूले जाते हैं। इसी की वजह से विवाद भी यहां होता है। टोल कंपनियों का जो दायित्व है, उसकी ओर ध्यान नहीं दे रही हैं। सडक़ों पर बड़ी मात्रा में आवारा मवेशियों की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं। इनके लिए किसी टोल कंपनियां ध्यान नहीं दे रही हैं।

सडक़ों पर पेट्रोलिंग नहीं कराती कंपनियां
नेशनल हाइवे से गुजरने वाले वाहनों से टैक्स वसूली करने के लिए टोल कंपनियों को नियमित सडक़ों पर पेट्रोलिंग करानी है लेकिन ऐसा नहीं होता। मानकों का पालन होता है यह बताने के लिए हाइवे पेट्रोलिंग के नाम से एक वाहन भी टोल कंपनी ने खड़ा कर रखा है लेकिन यह सडक़ परभ्रमण करता नजर नहीं आता। इस अमले की जिम्मेदारी है कि सडक़ों पर जो भी मवेशी बैठे हैं उन्हें हटाएं ताकि दुर्घटनाएं नहीं हों, लेकिन पूरी तरह से मनमानी चल रही है।

जिम्मेदार विभाग भी नहीं दे रहे ध्यान
सडक़ों पर बैठे आवारा मवेशियों की वजह से होने वाली दुर्घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं लेकिन जिन पर सडक़ों की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी है वह उदासीन बने हुए हैं। इन सडक़ों पर बिना किसी बाधा के आवागम हो इसकी पहली जिम्मेदारी टोल कंपनी की होती है। इसके बाद मध्यप्रदेश सडक़ विकास प्राधिकरण को भी सुपरवीजन करना होता है। साथ ही जिस क्षेत्र से यह सडक़ गुजरती है, वहां दंडाधिकारी भी संज्ञान लेकर व्यवस्था बनाने का निर्देश दे सकते हैं। दुर्घटनाएं रोकने के लिए स्थानीय निकायों का भी दायित्व है कि वह भी निगरानी रखें। इसमें जिले के कईनगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायतों का क्षेत्र आता है।

महीने भर में 15 दुर्घटनाएं
जिन सडक़ों पर आवारा मवेशी बैठते हैं, वहां पर महीने भर के भीतर करीब 15 से अधिक दुर्घटनाएं हुईहैं। सडक़ दुर्घटना के टोल फ्री नंबर 1099 में किए गए फोन काल के मुताबिक रीवा से हनुमना के बीच 9 दुर्घटनाएं दिसंबर महीने में हुई जिनकी सूचना दी गई। इसी तरह मनगवां से चाकघाट के बीच सात घटनाओं की सूचना टोल फ्री नंबर पर दी गई। बताया गया है कि जनवरी महीने में अब तक कोई फोन नहीं गया है। जबकि द़र्घटनाएं हुई हैं, लोगों को उक्त टोलफ्री नंबर की जानकारी नहीं होने की वजह से हर कोईफोन नहीं कर पाता। लोग सीधे 108 एम्बुलेंस बुलाकर अस्पताल पहुंचते हैं।

Balmukund Dwivedi Desk
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