सीएम कमलनाथ की टीम ने रीवा नगर निगम का पकड़ा बड़ा भ्रष्टाचार, मेयर साहित कई अफसर संदेह के दायरे में

अग्रिम टैक्स जमा करने में छूट देना था, अफसरों ने बकाया पर दे दिया
- शासन की टीम द्वारा की गई जांच में हुआ खुलासा, करोड़ों रुपए का हुआ नुकसान
- निगम आयुक्तों को पहले ही जारी हो चुकी है नोटिस, अब तक नहीं दिया जवाब

By: Mrigendra Singh

Updated: 03 Mar 2019, 05:41 PM IST

 

रीवा। नगर निगम में अधिकारियों की मनमानी के चलते बड़े राजस्व का नुकसान हुआ है। शासन द्वारा भेजी गई जांच टीम ने कई ऐसी कमियों को पकड़ा है, जिसमें अधिकारियों ने अपनी मनमानी के अनुसार कार्य किया है। नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मेयर इन काउंसिल को संपत्तिकर की राशि अग्रिम जमा करने वाले लोगों को छूट देने का अधिकार है। रीवा में नियमों को दरकिनार करते हुए लंबे समय से बकाया राशि वसूलने के लिए छूट दे दी गई। इससे निगम को राजस्व का बड़ा नुकसान पहुंचा है। कुछ दिन पहले ही निगम के तीन तत्कालीन आयुक्तों शैलेन्द्र शुक्ला, कर्मवीर शर्मा एवं आरपी सिंह को नोटिस भी जारी हो चुकी है। जिसमें कहा गया है कि नगर निगम के स्वामित्व की दुकानों पर बकाया प्रीमियम एवं किराए की राशि पर नीलामी की शर्तों के अनुसार 18 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज है। एमआइसी ने उक्त राशि वसूल करने के बजाय इसे नौ प्रतिशत कर दिया। जिससे प्रभारी आयुक्त शैलेन्द्र शुक्ला के कार्यकाल में 53.30 लाख रुपए का नुकसान निगम को हुआ है। इसी तरह दो अन्य आयुक्तों के कार्यकाल का मामला है।

लेखा समिति का गठन नहीं किया
जांच टीम ने रिपोर्ट में कहा गया है कि निगम के आयुक्तों ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए लेखा समिति का गठन नहीं किया। जबकि अधिनियम के अनुसार यह अनिवार्य है। निगम के भुगतान पर यह समिति समीक्षा कर अपनी टीप देती है। अधिकारियों ने लगातार उठी मांगों को दरकिनार कर इस समिति का गठन ही नहीं किया। वर्तमान आयुक्त ने अब प्रयास शुरू किया है।

पार्किंग का आफलाइन ठेका दिया
वित्तीय वर्ष 2015-16 में अंबेडकर बाजार के पीछे एवं शिल्पी प्लाजा के पीछे वाहन पार्किंग शुल्क वसूली के लिए आफलाइन निविदा आमंत्रित की। अधिकतम राशि 11.65 लाख रुपए के प्रस्ताव को एमआइसी ने निरस्त कर दिया और 11.57 लाख रुपए की बोली को घटाकर 50 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से निर्धारित कर दी। इसके बाद फिर आफलाइन निविदा बुलाई गई जिसमें 3.57 लाख की निविदा को स्वीकृत किया गया। इसमें आठ लाख रुपए के राजस्व का नुकसान निगम को पहुंचा है।

संचित निधि में नहीं जमा की राशि
नगर निगम निधि निगम की आय के रूप में प्राप्त होने वाली राशि से प्रतिदिन पांच प्रतिशत संचित निधि के खाते में जमा करने का प्रावधान है। जांच में पाया गया है कि अधिकारियों ने इस राशि को जमा ही नहीं किया है।

 

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Mrigendra Singh Reporting
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