कोरोना घोटाला : जनता ने जिन्हें भगवान का दर्जा दिया वह भ्रष्टाचारी निकले, eow के छापे में खुलासा


- कोरोना राहत राशि में अफसरों ने की बंदरबाट, इओडब्ल्यू का सीएमएचओ आफिस में छापा
- ढाई करोड़ रुपए के बजट में 14.50 लाख रुपए का घपला, नजदीकी लोगों के फर्मों को किया भुगतान
- इओडब्ल्यू ने पूरे दिन दस्तावेज खंगाले, करीब दर्जनभर अधिकारी, कर्मचारी संदेह के दायरे में

By: Mrigendra Singh

Published: 23 Aug 2020, 11:49 AM IST


रीवा। कोरोना के दौर में स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारी-कर्मचारियों को जनता ने भगवान का दर्जा दिया वह भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं। कोरोना राहत के लिए आए बजट में अफसरों ने मिलकर बंदरबाट किया है। इस पर इओडब्ल्यू ने शिकायत पंजीबद्ध करते हुए जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए करीब दर्जन भर से अधिक की संख्या में इओडब्ल्यू के अधिकारी, कर्मचारियों की टीम सुबह सीएमएचओ कार्यालय पहुंची, जहां पर कोरोना के लिए आए बजट और उस पर खर्च की गई राशि से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की है।

सुबह से लेकर देर शाम तक दस्तावेज खंगाले गए। बताया गया है कि कोविड-19 के बचाव अभियान के लिए बीते अप्रेल महीने में दो किस्तों में बजट स्वास्थ्य विभाग को मिला था। जिसमें 1.96 करोड़ रुपए और 49 लाख रुपए दो हिस्सो में मिला था। इस राशि के भुगतान में अनियमितता का मामला सामने आया है।

इओडब्ल्यू के पास भी शिकायतें आई थी, साथ ही कलेक्टर के संज्ञान में भी मामला आया तो उन्होंने भी इओडब्ल्यू से जांच के लिए कहा था। कुछ दिन पहले ही एक प्राथमिक सूचना इओडब्ल्यू भोपाल के मुख्यालय को भेजी गई थी। जहां पर शिकायत पंजीबद्ध कर जांच करने का निर्देश दिया गया है। इसी के तहत सीएमएचओ कार्यालय बिछिया में दस्तावेज जब्त करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

बीते चार महीने के दौरान कोराना राहत के आय-व्यय से जुड़े दस्तावेज को जब्त किया गया है। प्रथम दृष्टया पड़ताल में फर्जी रूप से भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। जिस तरह से कोरोना महामारी के लिए आई राशि में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, उससे स्वास्थ्य विभाग पर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

फर्मों को फर्जी तौर पर कर दिया भुगतान
इओडब्ल्यू अधिकारियों को मिले दस्तावेज में पता चला है कि बिना किसी सामग्री सप्लाई के ही फर्जी बिल तैयार कर फर्मों को भुगतान किया गया है। इसमें तीन भुगतान सीधे तौर पर फर्जी पाए गए हैं। जिसमें पहला छह लाख रुपए, दूसरा सात लाख रुपए और तीसरा 1.50 लाख रुपए का है। इस तरह से 14.50 लाख रुपए का भुगतान फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए करना पाया गया है।


दर्जन भर अधिकारी-कर्मचारी संदेह के दायरे में
पंजीबद्ध की गई शिकायत में करीब दर्जन भर से अधिक संख्या में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका संदेह के दायरे में हैं। जिसमें सीएमएचओ, नोडल अधिकारी, लेखापाल सहित अन्य वह सभी अधिकारी, कर्मचारी जो इस भुगतान की प्रक्रिया से सीधे जुड़े रहे हैं। एक दिन पहले ही शासन ने मामला पंजीबद्ध होने के बाद सीएमएचओ आरएस पाण्डेय का प्रभार छीनकर जिला अस्पताल में पदस्थ कर दिया है। अभी तक आइकान इंटरप्राइजेज और अनमोल ट्रेडर्स के दस्तावेजों की पड़ताल हुई है, जिसमें बिल-वाउचर फर्जी बताए जा रहे हैं। वहीं दो और फर्मों को भुगतान किया गया है जिनके नामों का खुलासा अभी नहीं किया गया है। ये फर्में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ अधिकारी, कर्मचारियों के करीबियों की बताई जा रही हैं।

वेंटीलेटर की राशि से मास्क-सेनेटाइजर खरीदने का दावा
कोरोना के लिए बजट इसलिए दिया गया था कि तात्कालिक तौर पर कोई भी सामग्री खरीदने में आर्थिक समस्या नहीं आए। इस बजट से पीपीइ किट, वेंटीलेटर, मास्क, सेनेटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग मशीनें खरीदने के साथ ही भोजन व्यवस्था एवं अन्य कार्य किए जाने थे। जांच में पता चला है कि वेंटीलेटर के लिए मिली राशि से भी मास्क और सेनेटाइजर खरीदने का उल्लेख है।

एडवांस सैलरी का भी नहीं किया भुगतान
करीब ढाई करोड़ रुपए के बजट में यह भी प्रावधान था कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जिन चिकित्सक एवं मेडिकल स्टाफ की नियुक्तियां की जा रही हैं इन्हें एडवांस सैलरी दी जाएगी। इसका भुगतान कर्मचारियों को नहीं दिया गया। बताया जा रहा है कि करीब चार महीने तक काम करने के बाद अब तक एक महीने का ही भुगतान किया गया है। इसको लेकर भी शिकायत की गई थी।

राष्ट्रीय हेल्थ मिशन की होगी जांच
इओडब्ल्यू अधिकारियों ने कहा है कि राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के नाम पर भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टचार किया गया है। इसके कई दस्तावेज हाथ लगे हंै। अब इस पूरे मामले की भी पड़ताल की जाएगी। मिशन के लिए आई राशि का कहां उपयोग किया जाना था और कहां खर्च की गई है। साथ ही राशि खर्च करने की प्रक्रिया क्या रही है, इसकी भी जांच शुरू की गई है।

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कोविड-19 राहत को लेकर आए बजट में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने फर्जी तौर पर भुगतान किया है। इस पर शिकायत पंजीबद्ध की गई है और दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं। प्रथम दृष्टया तीन भुगतान संदेहास्पद हैं इनका परीक्षण किया जा रहा है। सीएमएचओ सहित दर्जन भर से अधिक लोगों से पूछताछ करेंगे।

वीरेन्द्र जैन, एसपी इओडब्ल्यू रीवा

Mrigendra Singh Reporting
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