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'निराशा' के सामने हर चुनौती पड़ी छोटी, 'दबंगों' से भी नहीं मानी हार

दबंगों ने खेत में ट्रेक्टर ले जाने नहीं दिया तो गैती-फावड़ा से एक एकड़ खेत में खुदाई कर लहलहा दी फसल...

रीवा

Published: December 23, 2021 08:58:22 pm

महेश सिंह

रीवा. यह आश्चर्य जरूर लगेगा लेकिन यह सच्चाई है। जमींदारों ने खेत में ट्रैक्टर जाने से रोक दिया तो आदिवासी महिला निराशा कोल ने कतई हार नहीं मानी। उसने अपने खेत को स्वयं खोदकर बुवाई करने की ठानी और गैंती व फावड़ा उठा लिया। एक अदद महिला की हिम्मत तो देखिए महीनेभर में एक एकड़ खेत खोदकर उसमें बुवाई भी कर डाली। अब उसके खेत में फसलें लहलहा रही हैं। उसने यह साबित कर दिया कि महिलाएं किसी से कमजोर नहीं हैं।

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'निराशा' ने नहीं मानी हार
रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम गुढ़ के 30 आदिवासियों को सरकार द्वारा 2001 में खेती के लिए जमीन का बंटन मिला था। लेकिन पटवारी की लापरवही से जमीन के खसरे में वन दर्ज हो गया, जिससे इनका पट्टा निरस्त हो गया। आदिवासियों ने आपत्ति की तो उनको 2008 में पुनः वन भूमि का पट्टा मिल गया, जिसमें वे जुताई-बुवाई कर रहे हैं। इन्हीं में से एक निराशा कोल भी शामिल हैं, जिन्हें पट्टा मिला था और बाद में निरस्त हो गया। लेकिन इस बीच निराशा ने एक एकड़ पथरीली जमीन को लेबल करा लिया था और उसमें खेती करतीं आ रही थी।

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'दबंगों' ने खेत में नहीं जाने दिया ट्रेक्टर
जुलाई 2021 में गांव के प्रभावशाली लोगों ने उसकी भूमि को अपना बताकर जुताई करने पर रोक लगा दिया व ट्रैक्टर भी खेत से हटवा दिया। इसकी शिकायत पीड़ित महिला ने पनवार थाने एवं कलेक्टर से की। जिसके बाद जमींदारों ने उस जमीन पर अपना दावा तो छोड़ दिया लेकिन निराशा के खेत में ट्रैक्टर नहीं जाने दिया। हल व बैल नहीं होने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और अक्टूबर महीने में गैंती व फावड़ा से खेत को खोदना शुरू कर दिया। निराशा बताती हैं कि वो प्रतिदिन खेत खोदती थीं और बुवाई भी करतीं जातीं थीं। एक माह के अंदर ही उन्होंने हाथ से खोदकर एक एकड़ के खेत में फसल की बुवाई कर दी।

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खेत में लहलहा रही चना, सरसों व मटर
निराशा के अनुसार पहले उन्होंने अपने खेतों को पास की नहर के पानी से सिंचाई की। इसके बाद हर दिन सुबह ही खेत में पहुंच जातीं थी और देरशाम तक खुदाई करने के साथ बुवाई भी करतीं जाती थीं। जिससे उनकी महीनेभर की मेहनत रंग लाई और अब उनके खेतों में चना, सरसो, मटर, आलू, धनिया, मिर्ची की फसल लहलहा रही है। उनके खेत की फसल देखकर अब विरोधी भी उनकी वाहवाही करते हैं।

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तीन पीढ़ी से खेती
निराशा की मानें तो उनकी तीन पीढ़ी उक्‍त जमीन पर खेती कर रही है, लेकिन पट्टा नहीं मिला। पति अच्छेलाल पहाड़ी तीर के स्कूल में शिक्षाकर्मी हैं, जिससे ननकू और रामधनी कोल के बाद तीसरी पीढ़ी में खेती का जिम्मा निराशा के सिर पर ही है। 2005 से वे लगातार खेती कर रहीं हैं, लेकिन मुसीबत इस साल आई जब उनके खेत में ट्रेक्टर जाने से रोक दिया गया।
देखें वीडियो- कड़कड़ाती ठंड में खेत में छोड़ा नवजात

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