human angle : फर्श पर घिसटती कलेक्टर से मिलने पहुंची दिव्यांग बहनें, दर्द देख हर किसी का पसीझ गया दिल

मुख्य गेट के सामने दर्द से कराह रहीं दिव्यांग बेटियों को महिला होमगार्ड ने सहारा देकर कलेक्टर से मिलवाया, कलेक्टर ने रेडक्रॉस से राहत दिलाने सात हजार स्वीकृत की राशि

By: Rajesh Patel

Published: 29 Oct 2020, 08:32 AM IST

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रीवा. कलेक्ट्रेट में दोपहर करीब डेढ़ बजे दिव्यांग दो सगी बहनें माता-पिता के सहारे कलेक्टर से मिलने के लिए पहुंची। दोनों चलने-फिरने में असमर्थ गेट पर घिसट रहीं थीं। दिव्यांग बेटियों का दर्द देख गेट पर ड्यूटी में तैनात महिला गार्ड का दिल पसीझ गया और दोनों को कलेक्टर वेटिंग हाल तक पहुंचाने में सहयोग किया। माता-पिता के हाथ में इलाज का कागज व दोनों के दर्द को देख हर किसी का दिल पसीझ गया। कलेक्टर इलैयाराजा टी ने दिव्यांग बहनों के इलाज की जानकारी ली और भरण-पोषण के फौरीतौर पर रेडक्रॉस से सात हजार रुपए की आर्थिक सहयोग करने का आश्वासन दिया है।

8वीं-10वीं की छात्राएं अचानक हो गई थीं अनकांसेंस
शहर के वार्ड नंबर 14 निवासी दिव्यांग बहनों के पिता देवेन्द्र कुमार पटेल ने कलेक्टर को आवेदन देकर कहा कि साहब कोई रोजगार दे दीजिए, जिससे दोनों बेटियों की अंतिम सांस तक सेवा कर सकूं। पीडि़त माता निर्मला देवी व पिता देवेन्द्र ने भरण-पोषण की भी गुहार लगाई है। पिता के मुताबिक बड़ी बेटी पल्लवी 10वीं में पढ़ रही थी। अनकांसेंस हो गई। इलाज के बाद भी शारीरिक क्षमता कमजोर होती गई। परिवार सात साल से बेटी के इलाज को लेकर दर-दर भटक रहा है। बेटी अब चलने फिरने में असमर्थ हो गईं। इसी तरह दूसरी बेटी मेधावनी मानव कक्षा 8वीं में पढ़ रही थी। दो साल पहले बड़ी बेटी की तरह छोटी बेटी भी चलने फिरने में असमर्थ हो गई। दोनों बेटियों का दर्द माता-पिता के लिए मुसीबत बना है।

हर किसी का पसीझ गया दिल
कलेक्टर कार्यालय में फर्स पर घिसट रही बेटियों को देख हर किसी का दिल पसीझ गया। कलेक्टर के पूछने पर पिता ने बताया कि दोनों का इलाज लखनऊ से चल रहा है। मुख्यमंत्री राहत कोष आदि योजनाओं का लाभ दिव्यांग बेटियों को नहीं मिला है। इलाज के लिए माता-पिता ने नियम-कायदे के पेंच के चलते आवेदन नहीं कर सका है। कलेक्टर ने फौरीतौर पर आवेदन पर ही सहयोग के लिए रेडक्रॉस से सात हजार रुपए की स्वीकृति दी है। उन्होंने स्थाई रोजगार के लिए माता-पिता को आश्वासन दिया है।
गरीबी रेखा का कार्ड नगर निगम में लंबित
शहर के वार्ड-14 में रहने वाले दिव्यांग बेटियों के इलाज में परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पिता फोटोग्राफी कर जैसे-तैसे परिवार का पेट पाल रहा था। बेटियों के इलाज को लेकर भागदौड़ के चलते फोटोग्राफी का कारोबार भी बंद हो गया। लंबे समय से बेटियों की बीमारी के चलते परिवार एक-एक दाने को मोहताज है। बावजूद इसके नगर निगम कार्यालय में करीब आठ माह से पात्रता पर्ची तक जारी नहीं हो सकी है। पिता के मुताबिक तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने गरीबी रेखा के आवेदन को स्वीकृत करने की अनुमति दी थी। लेकिन, आज तक पात्रता पर्ची जारी नहीं हो सकी है। जिससे राशन के लिए भी दि क्कत हो रही है।

क्षेत्रीय विधायक से भी नहीं मिली मदद
राज्य सभा सांसद सदस्य ने आठ हजार का सहयोग किया है। मूलरूम से देवतालाब विधानसभा क्षेत्र के पड़रिया गांव निवासी दिव्यांग के परिवार क्षेत्रीय विधयक से मिले। लेकिन, विधायक के घर पर निधि नहीं होने की बात कह टाल दिया गया। रीवा विधायक से भी अभी तक किसी तरह का सयोग नहीं मिला है। पिता के मुताबिक इससे पहले वह जिले के कई प्रतिनिधियों से सहयोग का गुहार लगा चुका है। लेकिन, किसी ने दरियादिली नहीं दिखाई।

Rajesh Patel Reporting
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