इ-टेंडरिंग घोटाला : मेंटेना कंपनी को मर्जी के मुताबिक टेंडर मिले और उसी मनमानी के अनुसार काम किया


- मेंटेना कंपनी के प्रमोटर की गिरफ्तारी के बाद रीवा जिले में नियम विरुद्ध दिए गए प्रोजेक्ट पर जांच की उठी मांग

By: Mrigendra Singh

Published: 24 Jan 2021, 10:13 AM IST



रीवा। प्रदेश के चर्चित इ-टेंडरिंग घोटाले का रीवा से भी सीधा जुड़ाव रहा है। यहां पर नहर परियोजनाओं के कई कार्यों के लिए हुए टेंडर में फिक्सिंग के आरोप शुरू से लगते रहे हैं लेकिन जांच को दबाया जाता रहा है। अब मेंटेना ग्रुप के प्रमोटर की गिरफ्तारी के बाद यहां भी चल रहे प्रोजेक्ट में जांच की मांग उठाई गई है। करीब दर्जनभर की संख्या में बड़े कार्य इस ग्रुप की कंपनी ने कराए हैं। कुछ प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं तो कुछ अब भी चल रहे हैं। वर्ष 2010 के बाद सरकार ने टेंडर प्रक्रिया के नियमों में बदलाव किया, तब से लगातार मेंटेना ग्रुप को ठेके मिलते रहे हैं।

कुछ कार्य तो ऐसे भी रहे हैं जिनका टेंडर होने से पहले ही कंपनी ने काम शुरू कर दिया था और बाद में उसे ही टेंडर भी मिला। इन कार्यों को अपनी मर्जी के अनुसार कंपनी ने कराए और गुणवत्ता पर सवाल उठे तो जांच नहीं हुई। यहां तक की बीच-बीच में भोपाल से टीमें भेजी जाती थी जो ठेकेदार को ही क्लीनचिट देकर चली जाती थी।

तत्कालीन एसीएसएस और प्रमुख सचिव रहे राधेश्याम जुलानिया भी शिकायतों की तस्दीक करने स्वयं आए और ठेकेदार के सामने ही शिकायतकर्ताओं को जलील करते हुए कार्यों की गुणवत्ता को हरीझंडी देकर चले गए। इस कारण उक्त ठेका कंपनी के विरुद्ध लोगों ने शिकायतें ही करना बंद कर दिया था, अब मेंटेना के प्रमोटर श्रीनिवास राजू की गिरफ्तारी के बाद रीवा, सतना एवं सीधी में मेंटेना और उसकी करीबी ठेका कंपनियों को मिले ठेके की जांच करने की मांग उठाई जा रही है।


- सर्वर बंद होने के बाद दो दिन बढ़ाई निविदा अवधि


इ-टेंडरिंग घोटाले में सरकार और ठेका कंपनियों की मिलीभगत पर कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए विस्तार से जांच की मांग की है। जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष राकेश तिवारी ने कहा है कि मेंटेना ग्रुप को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में छूट दी जाती रही है। रीवा जिले के कई ऐसे ठेके हैं जिसमें ठेका कंपनी को पहले से पता था कि उसे ही काम मिलेगा। सतना जिले में स्थित मझगवां डिस्ट्रीब्यूटरी के लिए इ-टेंडर का समय आखिरी दिन सायं 5:20 बजे तक निर्धारित था। उस समय पर वेबसाइट का सर्वर बंद कर दिया गया। इसके बाद बिना किसी सूचना के दो दिन निविदा की अवधि और बढ़ा दी गई, जिसका फायदा सीधे मेंटेना को ही मिला। तिवारी ने आरोप लगाया है कि मेंटना ग्रुप के लोगों ने दूसरे नाम की फर्मों से ठेका लेकर रीवा में काम कराया है। बहुती-फ्लो परियोजना में सद्भाव ग्रुप को ठेका मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि राधेश्याम जुलानिया के संरक्षण की वजह से पूर्व में दी गई शिकायतों पर कोई जांच नहीं की गई।
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कई नहरों का अधूरा काम छोड़ा फिर भी कार्रवाई नहीं


मेंटेना और उसकी सहयोगी फर्मों को रीवा जिले में कई प्रमुख कार्य इ-टेंडरिंग के जरिए दिए गए। जिस पर कंपनी की ओर से कई परियोजनाओं का अधूरा कार्य छोड़ दिया गया है। जिसकी वजह से नहरों का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कई ऐसे कार्य हैं जिनमें 80 से 90 प्रतिशत कार्य पूरा करने का दावा किया गया है और भुगतान भी हो चुका है लेकिन इस पर जो कार्य अधूरा छोड़ा गया है वह किसी बीच के हिस्से में है। जिसकी वजह से नहरों का पानी आगे की ओर नहीं जा रहा है। राकेश तिवारी बताते हैं कि रतहरा डिस्टीब्यूटरी का कार्य करीब तीन किलोमीटर किया गया और उसके बाद कई किलोमीटर तक छोड़ दिया गया। बाद में फिर कुछ जगह पर कार्य हुआ है। कंपनी की मनमानी पर नियंत्रण नहीं होने की वजह से रीवा जिले के लोगों को इन कार्यों का लाभ नहीं मिल पाया है। रीवा के मामलों को लेकर अलग से जांच करने की मांग उठाई है। आरोप है कि करीब दो हजार करोड़ के ठेके में घपला किया गया है।
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मेंटेना ग्रुप के यह कार्य निर्माणाधीन-


बहुती टनल- 184 करोड़
महान मेन कैनाल- 90 करोड़
महान मेन कैनाल सीसी लाइनिंग- 11.48 करोड़
खड्डी लिफ्ट कैनाल- 30.07 करोड़
त्योंथर लिफ्ट कैनाल- 94.80 करोड़
मझगवां ब्रांच कैनाल- 133.50 करोड़
टमस मेन कैनाल- 225.79 करोड़
महान कंक्रीट लाइनिंग- 31.40 करोड़
बहुती नहर(सद्भाव)- 428 करोड़
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Mrigendra Singh Reporting
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