रीवा में शिक्षा माफिया की जड़ें मजबूत, कार्रवाई को आगे नहीं आ रहा प्रशासन

रीवा में शिक्षा माफिया की जड़ें मजबूत, कार्रवाई को आगे नहीं आ रहा प्रशासन

By: Bajrangi rathore

Published: 06 Jan 2020, 10:29 PM IST

रीवा। मप्र के रीवा जिले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर इनदिनों प्रशासन माफिया की तलाश कर रहा है। यह किसी एक क्षेत्र का नहीं बल्कि हर क्षेत्र में ऐसे लोगों को चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है जो नियमों को दरकिनार कर खुद के लाभ के लिए काम कर रहे हैं।

जिला प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से कार्रवाई की शुरुआत की है, जिसमें अतिक्रमण सरकारी भूमियों का हटाया जा रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में माफिया की मजबूत जड़ें रीवा में हैं। इन पर कार्रवाई करने की अब तक प्रशासन ने कोई योजना नहीं बनाई है। हर साल हजारों की संख्या में छात्र और अभिभावक शिक्षा माफिया के चंगुल में फंसकर मोटी रकम दे रहे हैं।

शिक्षा माफिया अलग-अलग तरह से चूना लगाने का काम कर रहा है। पहले तो नियम विरुद्ध तरीके से शिक्षण संस्थान खोले जाते हैं, उसमें प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से उन मापदंडों को पूरा किए बिना ही अनुमति ले लेते हैं जो किसी भी शैक्षणिक संस्था के लिए आवश्यक होते हैं।

इनका टारगेट सरकारी भूमि भी होती है, पहले छोटा संस्थान खोलेंगे बाद में कब्जा बढ़ाते हुए उसे व्यापक करेंगे। इसके बाद छात्रों के प्रवेश के नाम पर लंबी रकम ऐंठने का कार्य करते हैं।

मानकों की अनदेखी के बाद भी अनुमति

शिक्षा माफिया केवल स्कूल शिक्षा तक सीमित नहीं है। यह उच्च शिक्षा में भी अपनी जड़ें मजबूत करता जा रहा है। सामान्य पाठ्यक्रम के साथ ही तकनीकी पाठ्यक्रम चलाने के नाम पर भी संस्थान खोले जा रहे हैं। कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने अलग-अलग नामों से तीन या चार संस्थान खोल रखे हैं।

पूर्व में कई शिकायतें भी आईं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कई ऐसे प्राइवेट कॉलेज हैं जहां की पंजीकृत छात्र संख्या के लिए बैठने तक की जगह नहीं है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों से मिलकर अपनी मर्जी के अनुसार परीक्षा केन्द्र बना रहे हैं और मनमानी रूप से नकल भी करा रहे हैं।

रीवा जिले में वर्तमान में 59 कॉलेजों को अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय ने अकेले मान्यता दे रखी है, जबकि दूसरे विश्वविद्यालय से संबद्धता लेकर कई संस्थान चल रहे हैं। इनदिनों बीएड कॉलेजों के नाम पर बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। स्कूल शिक्षा में संस्कृत बोर्ड के नाम पर भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

मंत्री से भी की गई शिकायत

बीते सप्ताह रीवा प्रवास पर आए उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी से कई लोगों ने इस संबंध में चर्चा कर ज्ञापन भी सौंपा है। जिसमें कहा गया है कि माफिया की तलाश केवल सरकारी भूमि कब्जा करने वालों तक सीमित नहीं की जाए, बल्कि शिक्षा माफिया पर नकेल कसना जरूरी है।

मंत्री ने आश्वासन दिया है कि उच्च शिक्षा के साथ ही स्कूल शिक्षा के माफिया पर शिकंजा कसने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इस संबंध में उच्च शिक्षा के अतिरिक्त संचालक पंकज श्रीवास्तव ने कहा है कि मंत्री ने अभी सीधे किसी तरह से जांच का निर्देश नहीं दिया है। वह किसी तरह की जांच या कार्रवाई का निर्देश देंगे तो उच्च शिक्षा के आयुक्त कार्यालय की ओर से निर्देश मिलेगा।

छात्रवृत्ति के नाम पर भी बड़ा घपला आ चुका है सामने

छात्रवृत्ति के नाम पर भी रीवा में बड़ा घपला सामने आ चुका है। जिसमें प्राइवेट कॉलेज संचालित करने वाले कई लोगों का नाम सामने आया है। वर्ष 2012-13 में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के नाम पर करीब एक करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता सामने आ चुकी है।

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों को दी गई छात्रवृत्ति में कूटरचित दस्तावेज का उपयोग कर प्राइवेट कॉलेजों ने राशि आहरित कर ली। इसमें छात्रवृत्ति भुगतान के लिए नोडल बनाए गए सरकारी कॉलेजों के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है। जिसके चलते उन पर भी एफआइआर दर्ज किया गया है।

इओडब्ल्यू इसकी जांच कर रहा है। मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, टीआरएस कॉलेज आदि से उन प्राइवेट कॉलेजों को दी गई छात्रवृत्ति की फाइलें जब्त की है, जो छात्रवृत्ति के घोटाले में शामिल रही हैं। माफिया की मजबूती इतनी है कि जांच अभियान ही धीमा कर दिया गया है।

Bajrangi rathore Desk
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