scriptfarmers problem in rewa, shortage of manure | कागज में खाद की कमी नहीं, गांवों से जिला मुख्यालय तक भटक रहे किसान | Patrika News

कागज में खाद की कमी नहीं, गांवों से जिला मुख्यालय तक भटक रहे किसान

- प्रशासन का दावा 1785 टन डीएपी खाद की है उपलब्धता

रीवा

Published: October 29, 2021 10:21:32 am


रीवा। जिले में इनदिनों डीएपी एवं अन्य खादों को लेकर संकट मचा है। किसान हर दिन अपने घरों से खाद के लिए निकलते हैं और देर रात खाली हाथ ही लौटते हैं। गांवों की सहकारी समितियों से लेकर जिला मुख्यालय तक खाद वितरण केन्द्रों से लौटाया जा रहा है। वहीं प्रशासन का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में खाद का स्टाक जिले में है। उप संचालक कृषि का दावा है कि रीवा जिले में सहकारी समिति, विपणन संघ तथा निजी विक्रेताओं के पास 27 अक्टूबर की स्थिति में 6769 मीट्रिक टन यूरिया तथा 1745 टन डीएपी खाद उपलब्ध है। इसके अलावा 583.4 टन एनपीके एवं 4458 टन सिंगल सुपर फास्फेट भी उपलब्ध है। इस संबंध में उप संचालक कृषि यूपी बागरी ने बताया कि जिले के किसान खाद की आपूर्ति के लिए चिंतित न हो। खाद की नियमित आपूर्ति जारी है। किसानों को अगले एक सप्ताह जितनी खाद की जरूरत उसी की खरीद करें। उप संचालक ने बताया कि आगामी फसल के लिए अब तक विपणन संघ, सहकारी समिति तथा निजी विक्रेताओं को 11150 टन यूरिया 5695.5 टन डीएपी, 702.4 टन एनपीके एवं 5309.4 टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद प्राप्त हुई है।
इसमें से अब तक किसानों को 4381.8 टन यूरिया, 3949.9 टन डीएपी, 118.9 टन एनपीके एवं 851.4 टन सिंगल सुपर फास्फेट का वितरण किया जा चुका है।
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समितियां के गोदाम खाली तो शहर पहुंच रहे लोग
प्रशासन चाहे भले ही दस्तावेजी तौर पर दावा कर रहा है कि रीवा जिले में फिलहाल पर्याप्त खाद है। लेकिन वास्तविकता यह है कि जिले भर के गोदाम खाली हैं। रीवा के लिए जो रैक आनी थी उसे सतना में ही उतार दिया गया, जिसके चलते जिले में खाद का संकट बढ़ गया है। डबल लॉक गोदामों में चाकघाट और जवा में ही खाद बची है। रीवा के करहिया मंडी हर दिन सैकड़ों किसान पहुंच रहे हैं और खाली हाथ लौट रहे हैं। गांवों में खाद नहीं मिलती तो लोग रीवा आते हैं, यहां से भी खाली हाथ लौटना पड़ता है। इस साल समितियों में नकदी में खाद की व्यवस्था नहीं की गई है। साथ ही दूसरे बैंकों के कर्जदारों को भी नहीं दिया जा रहा है।
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व्यापारी महंगे दाम पर बेच रहे
जिले में कुछ जगह व्यापारियों के पास खाद बताई जा रही है, जो निर्धारित दर से अधिक राशि वसूल रहे हैं। किसानों को बोनी का कार्य करना है, वह अधिक दिन इंतजार नहीं कर सकते, इसलिए अधिक कीमत देकर व्यापारियों से मजबूरी में खरीद रहे हैं। किसान नेता शिव सिंह, कुंवर सिंह आदि ने मांग उठाई है कि व्यापारियों के गोदाम चेक किए जाने चाहिए। प्रशासन की गोदामों से किसानों को लौटाया जाता है और व्यापारियों को बेचा जा रहा है।
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