FCI : UP-Bihar का मोटिया चावल जमा कर FCI का मानक पूरा कर रहे मिलर , रीवा के अच्छे चावल को बाजार में बेच रहे

जिले की धान की मीलिंग कर बाजार में बेच रहे अच्छा चावल, मोटिया टूटे चावल छन्ना लगाकर अमानक स्तर का चावल जमा कर रहे जिम्मेदार

By: Rajesh Patel

Published: 05 Apr 2021, 09:59 AM IST

रीवा. नागरिक आपूर्ति निगम (नान) और वेयर हाउस कारर्पोरेशन (एसडब्ल्यूसी) के अधिकारियों की साठगांठ से चावल मिलिंग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जिम्मेदारों की अनदेखी इस कदर है कि मिल संचालक यूपी-बिहार से चावल लाकर जमा कर रहे हैं। जिले की अच्छी धान का चावल बाजार में बेच रहे हैं। यूपी व बिहार से औने-पौने दाम पर मोटिया चावल ला रहे हैं। मोटिया चावल में टूटे चावल की मात्रा कम करने छन्ना लगाने के बाद एफसीआई का मानक पूरा कर रहे हैं। हैरानी की बात तो यह कि नान कार्यालय में जांच करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रकों की टीम नहीं है।

1.20 लाख क्विंटल के बजाए जमा कर दिया डेढ़ लाख क्विंटल चावल
जिले में वेयर हाउस के रेकार्ड में अभी तक दो लाख क्विंटल धान का उठाव हुआ है। जिसका 60 प्रतिशत चावल वापस गोदाम में जमा करना पड़ता है। नान के रेकार्ड में डेढ़ लाख क्विंटल से अधिक चावल गोदाम में जमा हो गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि दो लाख क्विंटल धान का चावल महज 1.20 लाख क्विंटल होता है। बताया गया कि धान के उठाव से अधिक चावल गोदाम में जमा कर दिया गया है। वेयर हाउस सूत्रों के अनुसार मिल संचालक यूपी व बिहार से मोटिया चावल की खेप लाकर गोदाम में जमा कर रहे हैं। नान रेकार्ड के अनुसार अब तक सबसे अधिक चावल जमा करने वालों में शुक्ला एग्रोटेक, सोहगौरा राइस मिल, श्रीकृष्णा इंडस्ट्री समेत अन्य मिलरो ने चावल जमा कर दिया है।

ऐसे कर रहे खेल
यूपी-बिहार से आने वाले चावल की 2100 रुपए प्रति क्विंटल कीमत होती है। रीवा के धान से निकलने वाले चावल की कीमत बाजार में 2500 से 3000 होती है। जिससे बाहर से मोटिया चावल लाकर उसमें से चावल के छोटे टुकड़े को छन्ना लगाकर सफाई कर कर चावल गोदाम में जमा कर देते हैं। रीवा के महंगे व अच्छे चावल को बाजार में बेचा जा रहा है। जबकि बाहर से घटिया चावल को लाकर एफसीआई के मानक को पूरा कर रहे हैं।

मैपिंग को लेकर मिल संचालकों मे असंतोष
नान कार्यालय में वेयर हाउस में चावल जमा करने और धान उठाव के मैपिंग को लेकर मिल संचालकों में असंतोष है। नान कार्यालय में लेखापाल और कंप्यूटर आपरेटर की मनमानी के चलते गलत मैपिंग कर दी गई है। कुछ मिलरो को चावल जमा करने के लिए जगह नहीं मिल रही है। कुछ मिल संचालकों का रसूख इस कदर है कि उन्हें चावल जमा करने के लिए भेडऱहा, हनुमना, मनगवां सहित अन्य जगहों पर खाली गोदाम दे दिया गया है। जिसे लेकर असंतोष है।

वर्जन...
अभी हम नए आए हैं। चावल की गुणवत्ता परखने के लिए स्टाफ की कमी है। चावल बाहर से आ रहा है। इसकी जांच करना मुश्किल होगा। धान का उठाव होने के बाद जांच के लिए मिल पर जाना पड़ता है। स्टाफ की कमी है। अकेले कहां, कहां जांच करेंगे। धान उठाव के बाद तीन दिन के भीतर चावल जमा करना होता है। अब तक करीब डेढ़ लाख क्विंटल चावल जमा हुआ है।
वाईपी त्रिपाठी, जिला प्रबंधक, नान

Rajesh Patel Reporting
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