प्रदेश के बाहर फंसे श्रमिकों के खाते में सरकार भेज रही आंतरिक सहायता राशि

सरकार मोबाइल नंबर के जरिए बाहर रहने की लोकेशन कर रही ट्रेस, पुष्टि के बाद मुंबई, सूरत, गुजरात में फंसे लोगों के खाते में भेजी जा रही एक-एक हजार रुपए

By: Rajesh Patel

Published: 23 Apr 2020, 09:25 AM IST

रीवा. प्रदेश के बाद बाहर मुंबई, सूरत, गुजरात में हजारो की संख्या में श्रमिक लॉकडाउन में फंसे हैं। सरकार ऐसे लोगों की अंतरिम सहायता राशि दो रही है। सहायता राशि भेजने से पहले श्रमिक बाहर हैं इस बात का पता लगाने के लिए मोबाइल कॉल के जरिए लोकेशन ट्रेस किया जा रहा है। इस काम के लिए भोपाल में आइटी सेल की टीम सक्रिय। जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेजी गई लिस्ट के तहत श्रमिकों की के बाहर होने की पुष्टि के बाद उनके खाते में सहायता राशि भेजी जा रही है। जिले में अब तक 181 श्रमिकों के खाते में राशि भेजी जा चुकी है।

पड़ोसी राज्यों में फंसे हैं हजारो लोग
जिले में बाहर से 19 हजार लोगों के आने के बावजूद अभी भी मुंबई, सूरत गुजरात में लोग फंसे हुए हैं। जिला प्रशासन के पास लगभग दो हजार परिवारों के आवेदन पहुंचे हैं। सबसे ज्यादा सूरत-गुजरात में हैं। अधिकांश परिवारों ने लॉकडाउन में बाहर फंसे अपनों के खाने-पीने का संकट बताया है। जिले के बांस गांव के निवासी मुकेश, कमलेश सहित सैकड़ो युवाओं ने तो फोन और सोशल पर वीडिया वयरल क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से मदद की आवाज उठाई। जिला प्रशासन ने अब तक शासन को डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों की लिस्ट भेजी है। सहायता भेजने से पहले गलत व्यक्ति को लाभ न मिले। इसके लिए सरकार बकायदे श्रमिकों के मोबाइल नंबर के जरिए लोकेशन ट्रेस करा रही है। बाहर होने की पुष्टि पर खाते में राशि भेजी जा रही है।

अब तक 500 लोगों की पुष्टि, 2.75 लाख जारी
शासन ने अब तक 500 से अधिक लोगों का सत्यापन कर लिया है। जिला प्रशासन ने सभी खाते में एक-एक हजार रुपए की आर्थिक मदद की है। लंबे समय से फंसे 84 लोगों के खाते में दो-दो हजार रुपए की राशि भेजी है। अब एक-एक हजार रुपए भेजा जा रहा है। 21 अप्रैल की स्थित में 181 लोगों के खाते में 2.75 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन रेकडक्रॉस सोसायटी से किया गया है।

सांसद-विधायकों ने भी भेजी लिस्ट
मुख्यमंत्री की आर्थिक मदद की घोषणा के बाद क्षेत्रीय माननीयों ने भी जिला प्रशासन को बाहर फंसे बेरोजगारों की लिस्ट सौंपा है। अब तक माननीयों की ओर से 300 से अधिक लोगों की लिस्ट प्रशासन को दी गई है। सांसद-विधायकों की ओर से उपलब्ध कराई गई लिस्ट को सत्यापन के लिए भोपाल भेज दिया गया है।

Rajesh Patel Reporting
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