नदियों के ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण पर रोक लगाने और मास्टर प्लान की शर्तों का पालन कराने का निर्देश

- एनजीटी ने बीहर-बिछिया नदियों के संरक्षण को लेकर लगाई गई याचिका पर मुख्य सचिव को निगरानी के लिए निर्देशित किया
- प्रदूषित नालों को नदी में मिलने से रोकने की योजना को भी पूरा कराने का निर्देश

By: Mrigendra Singh

Published: 02 Aug 2020, 10:20 AM IST


रीवा। शहर के बीहर और बिछिया नदियों के किनारे निर्धारित ग्रीन बेल्ट में तेजी के साथ हो रहे अतिक्रमण को रोकने और मास्टर प्लान की शर्तों के तहत नदियों का संरक्षण करने का निर्देश जारी किया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस पर लगाई गई एक याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया है।

एनजीटी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को इसकी निगरानी करने का दायित्व सौंपते हुए कहा है कि वर्तमान में नदियों के किनारे जो अतिक्रमण किया जा रहा है, उस पर तत्काल रोक लगाएं और पूर्व से नदी के ग्रीन बेल्ट पर किए गए कब्जे को लेकर मास्टर प्लान की शर्तों के अनुरूप पालन कराने की कार्रवाई करें।

रीवा शहर से गुजरने वाली बीहर और बिछिया नदियों के किनारे 50 मीटर का ग्रीन बेल्ट संरक्षित करने और उसमें पौधरोपण की अनुशंशा मास्टर प्लान में की गई है, इसका पालन कराने के लिए मुख्य सचिव को कहा गया है। एनजीटी में यह याचिका रीवा निवासी अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने दायर की थी। जिस पर उन्होंने कहा मास्टर प्लान में नदियों के किनार 50 मीटर क्षेत्र में नो कांस्ट्रक्शन जोन घोषित कर पौधरोपण के लिए कहा गया था लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।

तेजी के साथ अतिक्रमण बढ़ता गया और नदी के बहाव क्षेत्र को भी मिट्टी से पाटकर मकान बना लिए गए। इसके अलावा शहर से निकलने वाला दूषित पानी सीधे नदियों में मिल रहा है, जिसकी वजह से बिछिया पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है और बीहर भी प्रभावित होती जा रही है। नदी के किनारे कचरा भी फेके जाने से प्रदूषण बढऩे की बात कही गई थी। इस पर ठोस योजना बनाने की मांग की गई थी। जिस पर एनजीटी ने सख्त लहजे में निर्देशित किया है।

- नदी में दूषित पानी सीधे मिलने से रोकें
सुनवाई के बाद एनजीटी ने एक और सख्त निर्देश दिया है कि बीहर और बिछिया नदियों में रीवा शहर का जो दूषित पानी नालों के माध्यम से मिल रहा है उस पर तत्काल रोक लगाई जाए। सीवरेज प्रोजेक्ट को भी जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया गया है। हालांकि इसके पहले एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने भी नालों को सीधे मिलने से रोकने का निर्देश दिया था, वह निर्देश कई जगह के लिए था। अब विशेष तौर पर रीवा शहर के सीवरेज प्रोजेक्ट की धीमी गति पर सवाल उठाए गए हैं। जिसे जल्द पूरा कराने का निर्देश है।

- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कानूनी कार्रवाई का निर्देश
याचिकाकर्ता नित्यानंद मिश्रा ने बताया कि नदियों में तेजी के साथ प्रदूषण बढ़ रहा है। जिस पर एनजीटी ने कहा है कि नदियों के संरक्षण को लेकर दिए गए आदेश के पालन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नजर रखे। यदि आदेश के पालन में कोई कार्रवाई स्थानीय प्रशासन नहीं करता तो कानूनी कार्रवाई बोर्ड कराएगा और जितने नाले नदियों में मिल रहे हैं उनमें प्रति नाले के हिसाब से जुर्माना लगाने की भी कार्रवाई होगी।

इसके पहले सीवरेज प्रोजेक्ट निर्धारित समय पर पूरा नहीं होने की स्थिति में जुर्माना लगाने का निर्देश जारी हुआ था। जिस पर कलेक्टर ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर 31 मार्च 2020 तक की समयसीमा निर्धारित की थी। इस अवधि में निर्माण पूरा नहीं हुआ तो कलेक्टर ने एक अप्रेल के बाद से प्रति नाले के हिसाब से पांच-पांच लाख रुपए जुर्माना लगाने का निर्देश दिया था। आठ नाले चिन्हित भी किए गए थे लेकिन इसी दौरान लॉकडाउन प्रभावी होने की वजह से इस निर्देश पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

- प्रिंसिपल बेंच को भेजा जाएगा मामला
आदेश में कहा गया है कि बीहर और बिछिया नदियों के संरक्षण को लेकर दायर की गई नित्यानंद मिश्रा की याचिका पर सुनवाई अब दिल्ली के प्रिंसिपल बेंच द्वारा की जाएगी। इस बेंच द्वारा देश की प्रदूषित नदियों को लेकर बड़े स्तर पर सुनवाई चल रही है। मध्यप्रदेश की २२ नदियों को इसमें शामिल किया गया है, जिसमें रीवा शहर की बिछिया नदी भी शामिल है। हाल ही में नदी किनारे पौधरोपण का आदेश भी शासन की ओर से दिया गया है।

- मुख्य सचिव करेंगे निगरानी
नदियों के संरक्षण को लेकर किए जाने वाले कार्यों की निगरानी मुख्य सचिव को करने के लिए कहा गया है। साथ ही केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सचिव, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव, कलेक्टर रीवा, टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग रीवा और नगर निगम रीवा के आयुक्त को भी नोटिस जारी की गई है।

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Mrigendra Singh Reporting
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