पत्रिका लाइव: एमपीआरडीसी ने कहा-आपदा प्रबंधन में हमारा कोई रोल नहीं-संचालक ने पूछा-नेशनल हाइवे पर कितने ट्रामा सेंटर

पत्रिका लाइव:  एमपीआरडीसी ने कहा-आपदा प्रबंधन में हमारा कोई रोल नहीं-संचालक ने पूछा-नेशनल हाइवे पर कितने ट्रामा सेंटर
How many trauma centers on the National Highway

Rajesh Patel | Updated: 22 Jun 2018, 12:58:15 PM (IST) Rewa, Madhya Pradesh, India

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई एक दिवसीय जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन की कार्यशाला

रीवा. कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन के सदस्यों ने जिला आपदा प्रबंधन पर अफसरों के साथ मंथन किया। विभागावार तैयारी की जानकारी ली और अपने सुझाव भी दिए।

कार्याशाला दो पॉलियों में आयोजित हुई

कार्याशाला समाप्त होने के बाद सदस्यों ने कलेक्ट्रेट भवन में आपदा प्रबंधन के लगाए गए सिस्टम का निरीक्षण किया और सुझाव भी दिए।कार्याशाला दो पॉलियों में आयोजित हुईविभागवार आपदा प्रबंधन की तैयारी पर चर्चा कार्याशाला की पहली पॉली में 12.30 बजे राज्य आपदा प्रबंधन के संचालक एवं उप संचालक बारी-बारी से विभागवार जानकारी ले रहे थे। नगर निगम, जिला शिक्षा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और शहर के सामाजिक संस्थानों ने अपनी तैयारी की जानकारी और समस्याएं रखी।

जिला प्रशासन को 15 दिन में उपलब्ध कराओ

रिपोर्ट इस दौरान एमपीआरडीसी के कर्मचारी ने कहा कि आपदा प्रबंधन में हमारा कोई रोल नहीं है। इस पर संचालक ने पूछा कि नेशनल हाइवे पर कितने ट्रामा सेंटर हैं और कहां-कहां बने हैं। हाइवे पर हर पचास किलोमीटर पर ट्रामा सेंटर होना चाहिए। संचालक ने एमपीआरडीसी के कर्मचारी को सुझाव देते हुए कहा कि इन बिन्दुओं (कलर कोड लाइन खिंची है या नहीं, मोड़ पर ऐरो, डिवाइडर, हाइवे के बगल प्लान्टेशन, स्पीड ब्रेकर्स, पेट्रोलियम, विस्फोटक पदार्थ के परिवहन आदि के डिस्प्ले के लिए जगह-जगह होर्डिंस लगाएं) की जानकारी नोट कर लीजिए और 15 दिन के भीतर जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दें। अन्यथा आप की तैयारी शून्य मानी जाएगी

दस हजार बच्चों को दी जाएगी आपदा प्रबंधन की जानकारी

जिला शिक्षा अधिकारी अंजनी कुमार त्रिपाठी ने आपदा प्रबंधन की तैयारी की चर्चा करते हुए कहा कि जिले में दस हजार बच्चों को आपदा प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। हर ब्लाक से एक हजार से अधिक बच्चे चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा बच्चों को पर्यावरण, एनएसएस, एनसीसी आदि की जानकारी के साथ ही स्कूलों में लगने वाले राहत शिविर के दौरान बच्चों को शिक्षा दिए जाने आदि का प्रबंधन किया गया है। उन्होंने मौसम खराब होने के दौरान समय रहते स्कूलों की छुट्टी आदि पर विस्तृत जानकारी दी।

बाढ़ के समय टोल-नाके फ्री किए जाएं

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन की जानकारी के साथ रपटा निर्माण की जानकारी दी, जिले में करीब ४० रपटा चिह्नित किए गए हैं। इस दौरान पीडब्ल्यूडी के अभियंता ने कहा कि बाढ़ के समय जिले के सभी टोल-नाके फ्री हो जाना चाहिए। शहर में लगी होर्डिंग में कराया जाए उप संचालक डॉ. जार्ज व्हीजे ने आपदा प्रबंधन की विभागवार जानकारी ली और सुझाव दिए। उन्होंने नगर निगम के सम्पत्ति कर अधिकारी को बताया कि आंधी एवं तेजगति की हवा चलने का प्रकोप है। शहर में लगाए गए होर्डिंग में बड़े-बड़े कराए जाएं। बाढ़ के समय पुराने एवं धराशायी होने वाले मकानों का चिह्नित करें। नालों एवं नालियों की सफाई कराएं।

दो घंटे पहले सूचना दी जाए, दो साल पहले छह लोगों की जान चली गई थी

भू-अधीक्षक रवि श्रीवास्तव ने कहा बकिया बराज का पानी छोडऩे से दो घंटे पहले सूचना दी जाए, दो साल पहले छह लोगों की जान चली गई थी। कार्यशाला में अपर कलेक्टर बीके पाडेय, तकनीकी विशेषज्ञ शिवराज सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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