स्कूली बैग का बोझ ढोते बच्चे, आखिर कैसे कम होगा वजन 15 दिनों में कार्रवाई जीरो

स्कूली बैग का बोझ ढोते बच्चे, आखिर कैसे कम होगा वजन 15 दिनों में कार्रवाई जीरो
How to lose weight in raising the burden of school bags

Lok Mani Shukla | Publish: Jul, 20 2019 12:08:21 PM (IST) Rewa, Rewa, Madhya Pradesh, India

फाइलों में बंद पड़े हैं आदेश ,संभागायुक्त के निर्देश बावजूद नहीं जागे जिम्मेदार

रीवा। स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्मण रेखा खीचीं है। इसी के अधीन ही शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों को गैर जरुरी कि ताबें कम करनी हैं जिससे बस्ते का बोझ कम हो सके। बावजूद इसके निजी शैक्षणिक संस्थान मनाने को तैयार नहीं है। परिणाम स्वरुप बच्चे रोजना 5 से 10 किलो तक वजन का बस्ता पीठ में लादकर ढो रहे हैं और जिम्मेदार चुप्प हैं। स्थिति यह है कि पिछले पंद्रह दिनों में एक भी कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि इस संबंध में संभागायुक्त डॉ. अशोक भार्गव ने अधीनस्थ अमले को कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने स्कूल शिक्षा विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग ने 3 जुलाई को आदेश जारी किया है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने बच्चों के स्कूली बस्ते का वजन कम करने को लेकर कोई कार्रवाई जिला, ब्लाक स्तर पर नहीं की है। अभिभावकों की माने तो व्यापक स्तर में निजी संस्थानों में प्राइवेट पब्लिकेशन की बुक खरीदवाई गई है। यह किताबें व नोट बुक छात्रों को ले जाने से बस्ते का वजन बढ़ जाता है। लगातार पीठ में इतना अधिक वजन लेकर चलने से छात्रों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इससे वाकिफ होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।


कक्षा निर्धारित बस्ते का वजन
1 से 2 तक 1.5 किलोग्राम

3 से 5 तक 2-3 किलोग्राम

6 से 7तक 4 किलोग्राम
8 से 9तक 4.5किलोग्राम
कक्षा 10 5 किलोग्राम


कार्रवाई के लिए इन्हें किया है अधिकृत
स्कूल शिक्षा विभाग ने बस्ते का बोझ कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जनशिक्षक एवं संकुल प्राचार्य, ब्लॉक स्तर में बीआरसी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर पर डीपीसी एवं डीइओ को कार्रवाई के लिए अधिकृत किया है। लेकिन इसके बावजूद इनके द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।

 

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