केन्द्र सरकार की योजना पर नेताओं ने बोला झूठ, जांच में रसूखदार का आया नाम, बड़ी कार्रवाई की तैयारी

केन्द्र सरकार की योजना पर नेताओं ने बोला झूठ, जांच में रसूखदार का आया नाम, बड़ी कार्रवाई की तैयारी
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Mrigendra Singh | Updated: 23 Sep 2019, 03:51:39 PM (IST) Rewa, Rewa, Madhya Pradesh, India


साढ़े आठ करोड़ के मकान हो रहे जर्जर, भुगतान के विवाद में आवंटन अटका
-नि:शुल्क मकान देने का निगम ने दिया था आश्वासन, अब मांग रहे प्रीमियम
-रतहरा में 248 मकानों का कराया था निर्माण


रीवा। शहर के मलिन बस्ती उन्मूलन के लिए लागू की गई योजना के तहत बनाए गए मकान राजनीतिक आश्वासन का शिकार हो गए हैं। मकान जर्जर होने लगे हैं लेकिन अभी तक उनका आधिकारिक रूप से आवंटन नगर निगम नहीं कर पाया है। हितग्राहियों को मकानों का अधिकार पत्र अब तक नहीं दिया जा सका है।

केन्द्र सरकार के सहयोग से शुरू की गई इंटेग्रेटेड हाउसिंग एण्ड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम(आइएचएसडीपी) योजना के तहत रीवा शहर के रतहरा में कालोनी विकसित की गई थी। इसके तहत रतहरा में 156 और अकोला बस्ती में 92 मकान बनाए गए थे। करीब दस वर्ष पहले कुल 248 मकान बनाए गए थे। उस दौरान मलिन बस्ती के लोगों को आश्वासन दिया गया था कि नि:शुल्क मकान दिए जाएंगे लेकिन जब मकानों के आवंटन की बारी आई तो उनसे 1.50 लाख रुपए की राशि जमा करने की शर्त रख दी गई।

बस्तियों के लोगों ने कहा कि वह इतनी राशि जमा करने की स्थिति में नहीं हैं तो आश्वासन दिया गया कि बैंक से फाइनेंस कराया जाएगा और शासन स्तर से उसकी भरपाई होगी लेकिन अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। इसी वजह से अब बस्तियों के लोग शिकायतें लेकर भटक रहे हैं। संभागायुक्त और नगर निगम के आयुक्त से हाल ही में शिकायत कर स्थानीय लोगों ने विधायक राजेन्द्र शुक्ला के नाम पर वितरित किए गए उस पंपलेट का हवाला दिया है जिसमें नि:शुल्क मकान देने का आश्वासन दिया गया था। इनका कहना है कि मकान की कीमत वह देने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए नि:शुल्क ही मकान दिया जाए। कुछ समय पहले विधायक के घर पर महिलाओं ने धरना दिया था।

- मौखिक आश्वासन पर मकानों में रह रहे लोग
आइएचएसडीपी योजना के तहत बनाए गए मकानों के आवंटन को लेकर आंदोलन तेज हुआ तो चुनाव के समय को देखते हुए नेताओं ने अधिकारियों पर दबाव बनाकर मौखिक रूप से मकानों का आवंटन कर दिया। इसके लिए हितग्राहियों की सूची तैयारी की गई और लकी ड्रा के सहारे सभी को मकानों के नंबर बताए गए। उस दौरान चाबियां मकानों की सौंप दी गई लेकिन मकान के प्रीमियम की निर्धारित 1.50 लाख रुपए की राशि जमा नहीं होने के चलते अब तक मकानों का अधिकार पत्र नहीं दिया गया है।


- रानीतालाब और बस स्टैंड के विस्थापितों को बसाया
सरकार की स्लम बस्ती उन्मूलन योजना के तहत २४८ मकान बनाए गए। इनमें रानीतालाब के सौंदर्यीकरण के दौरान विस्थापित हुए परिवारों को रतहरा में मकान दिया गया। वहीं न्यू बस स्टैंड बनाने के लिए नेहरू नगर के चूना भट्टा से विस्थापित किए गए परिवारों को अकोला बस्ती में मकान दिया गया है। इसके साथ ही शहर के अन्य हिस्सों से भी स्लम बस्ती के लोगों को विस्थापित कर पक्के मकान देने की योजना थी लेकिन पहले दौर में ही निगम की ओर से राशि नहीं दी गई तो मामला वहीं रुका हुआ है।


- निगम आयुक्त ने कहा अन्याय नहीं होगा
नगर निगम के आयुक्त सभाजीत यादव ने बताया कि उन्हें रतहरा के लोगों ने शिकायत की है। जिसमें नि:शुल्क मकान देने का आश्वासन दिया गया था, इसकी भी शिकायत की है। सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। प्रयास होगा कि हितग्राहियों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने पाए।
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हमें विस्थापित करते समय कहा गया था कि केवल पक्का मकान ही नहीं अन्य सभी सुविधाएं दी जाएंगी। मंत्री आए थे भाषण में बोलकर गए थे कि किसी तरह का रुपए नहीं लिया जाएगा। पूरी तरह से नि:शुल्क मकान दिया जाएगा। अब निगम के अधिकारी डेढ़ लाख रुपए मांग रहे हैं।
गुडिय़ा यादव, अकोला बस्ती
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हम सब रोज कमाने और खाने वाले लोग हैं। डेढ़ लाख रुपए देने की हैसियत नहीं हैं। चुनाव के समय कहा गया था कि नि:शुल्क व्यवस्था दी जाएगी। निगम आयुक्त से भी मांग उठाई है कि शासन तक हमारी बात पहुंचाएं और जिस तरह से आश्वासन दिया गया था उसी तरह से मकान भी आवंटित किए जाएं।
रूपचंद बंसल, विस्थापित
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आइएचएसडीपी योजना के तहत हमारे वार्ड में बने मकानों का आवंटन अब तक नहीं हो सका है। निगम के अधिकारियों ने मौखिक रूप से उन्हें रहने के लिए कहा दिया है लेकिन प्रीमियम का अड़ंगा लगाकर आवंटन नहीं कर रहे हैं। भाजपा के नेताओं ने राजनीतिक फायदे के लिए गरीबों को गुमराह किया है।
अशोक पटेल, पार्षद वार्ड 15
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गरीबों को करीब दस वर्ष से आश्वासन दिया जा रहा है। भाजपा के नेताओं के कहने पर नगर निगम के अधिकारियों ने मनमानी रूप से कार्य करते हुए हितग्राहियों को गुमराह किया है। इसलिए उन सभी की भूमिका तय करते हुए एफआइआर दर्ज की जाए। संभागायुक्त एवं निगम आयुक्त से शिकायत कर दी गई है। सीएम को भी ज्ञापन देंगे।
अजय मिश्रा, नेता विपक्ष नगर निगम

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