करोड़ों की जमीन कौडिय़ों में है कब्जा

Ajeet shukla

Publish: Dec, 07 2017 12:28:50 (IST)

Rewa, Madhya Pradesh, India
करोड़ों की जमीन कौडिय़ों में है कब्जा

उद्योग विहार में करोड़ों की भूमि सालों से पड़ी है खाली, उद्योग स्थापित करने का हवाला देकर पूंजीपति हैं काबिज...

रीवा। उद्योग की स्थापना के साथ ही न केवल स्थानीय बाजार में सामग्री उपलब्ध कराएंगे बल्कि युवाओं को रोजगार भी देंगे। इस दावे के साथ पूंजीपतियों ने करोड़ों की जमीन आवंटित करा ली, लेकिन अब कवायद केवल भूमि पर कब्जा तक सीमित है। इस ओर एकेवीएन भी ध्यान नहीं दे रहा। उद्योगों की स्थापना न होने से जहां युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, वहीं नए उद्योग लगाने के लिए इंतजार कर युवाओं को जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

109 पूंजीपतियों को है आवंटित
औद्योगिक केंद्र एवं विकास निगम (एकेवीएन) के उद्योग विहार में लगभग 109 लोगों को अब तक जमीन आवंटित की गई है। कई एकड़ जमीन पूंजीपतियों को लीज डीड के तहत चंद रुपए में दी गई है लेकिन बमुश्किल 20 फीसदी ने प्लांट स्थापित किया है। करोड़ों की भूमि सालों खाली पड़ी है। उद्योग संचालन के नाम पर पिछले कई वर्षों से प्रक्रिया जारी होने का हवाला दिया जा रहा है। नतीजा योजना के मुताबिक न उद्योगों की स्थापना हो पा रही है और न ही युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो पा रहा है।

उद्योग विहार में कब पूरे होंगे प्रोजेक्ट
उद्योग विहार में कुछ ऐसे भी उद्योग हैं, जो कई एकड़ की भूमि पर कब्जा जमाए बैठे हैं, लेकिन उद्योग का संचालन 10 वें हिस्से से भी कम जमीन पर हो रहा है। वैसे तो नियमों के अनुरूप किसी उद्योग के संचालन के लिए कुछ जमीन हरियाली क्षेत्र सहित अन्य अभिप्रायों के लिए छोड़ी जाती है लेकिन निर्धारित नियमों की आड़ में उद्योग संचालक कई गुना जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं। हवाला उस प्रोजेक्ट देते हैं, जो पिछले कई वर्षों से पूरा नहीं हो पाया है।

कानूनी दांव पेंच में फंसे हैं कई मामले
उद्योग विहार के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाने वालों के खिलाफ एकेवीएन के अधिकारियों ने कार्रवाई के तहत नोटिस जारी करने सहित अन्य प्रक्रिया शुरू तो की लेकिन नतीजा सिफर है। कुछ मामले में शासन स्तर पर अपील में चल रहे हैं तो कुछ कानूनी दांव पेंच में फंस कर रह गए हैं। अधिकारियों की सारी कवायद केवल कागज तक सीमित होकर रह गई है।

100 एकड़ से अधिक भूमि का उपयोग नहीं
-बीटीएल को 80 एकड़ भूमि आवंटित है। लेकिन औद्योगिक अभिप्राय में सिर्फ पांच एकड़ का उपयोग हो रहा है।
- बिरला एरिक्शन को लगभग 13 एकड़ भूमि आवंटित है जबकि औद्योगिक अभिप्राय के लिए केवल सात एकड़ का प्रयोग हो रहा है।
-उद्योग स्थापना के लिए प्रस्तावित 14 एकड़ में प्लाट आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है लेकिन पूंजीपतियों की कवायद धीमी है।
- औद्योगिक कर्मचारी सुविधा के नाम पर आरक्षित 4 एकड़ का भी कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।
- कानूनी दांव-पेंच में फंसी आधा दर्जन कंपनियों की 2.6 एकड़ भूमि अनुपयोगी साबित हो कर रह गई है।

करोड़ों की पूंजी
100 एकड़ से अधिक जमीन का उपयोग नहीं
5.5 करोड़ की लीज डीड में करा लिया है आवंटन
200 करोड़ तक जमीनों की है सामान्य कीमत

युवाओं को रोजगार पर लगा ब्रेक
उद्योगों की स्थापना न होने से संभावित रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उद्यमियों की माने तो प्रस्तावित उद्योगों की स्थापना के बाद कम से कम पांच हजार से अधिक युवाओं को रोजगार संभव हो सकेगा। इसके अलावा किसानों की उपज का सदुपयोग और उन्हें वाजिब मूल्य की प्राप्ति हो सकेगी सो अलग।

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