स्कूल से बच्चे का अपहरण कर फिरौती मांगने वालों पर जानिए कोर्ट ने क्या कहा

विशेष न्यायालय ने 19 दिसंबर 2014 को शहर में हुई वारदात पर सुनाया फैसला

By: Mrigendra Singh

Published: 07 Feb 2018, 12:29 PM IST

रीवा। शहर में करीब तीन वर्ष पहले दिनदहाड़े स्कूली बच्चे के अपहरण की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रकरण की सुनवाई के दौरान आरोपियों पर लगा आरोप प्रमाणित पाया गया है, बचाव में ऐसा कोई तर्क आरोपी नहीं दे सके जिससे उन्हें राहत मिलती।
प्रकरण की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि 19 दिसंबर 2014 को सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित कॉलेज चौराहे के पास सेंट्रल एकेडमी स्कूल में कक्षा चार में पढऩे वाले छात्र समीर (11) पिता हरीश सोनी निवासी प्रकाश चौक का दो युवकों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद 50 लाख रुपए की फिरौती भी मांगी थी।

सतना में बच्चे को छोड़कर भागे थे बदमाश
बीच शहर से दिनदहाड़े हुई वारदात के चलते पूरे संभाग में नाकेबंदी की गई थी। सतना जिले के कोठी के पास बच्चे को सड़क किनारे छोड़कर आरोपी भाग निकले थे। बाद में आरोपी सुनीत उर्फ सोनू नामदेव (22) निवासी खड्डा और राजेश नामदेव (20) निवासी रहट- चोरहटा को गिरफ्तार कर भादवि की धारा 364 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। प्रकरण की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश यशवंत सिंह परमार ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

9 घंटे शहर में खिंचा रहा सनाका
शहर के बीच से हुए अपहरण के चलते सनाका खिंच गया था। हालात यह बने कि सिविल लाइन थाने में भारी भीड़ जमा हो गई थी। मंत्री राजेन्द्र शुक्ला सहित अन्य कई प्रमुख लोग भी थाने पहुंचे थे। दोपहर हुई वारदात के बाद देर रात करीब दस बजे बच्चे के मिलने की खबर पाते ही पूरे शहर में खुशियां फैल गई थी। लोगों ने पटाखे फोड़े थे और मिठाइयां भी बांटी थी।

आरोपी पूर्व में नौकर रहा चुका है
मुख्य आरोपी सोनू नामदेव पूर्व में अपहृत छात्र के यहां बतौर नौकर काम करता था, इस कारण उसके साथ जाने में बच्चे ने भी आनाकानी नहीं की थी। पूरे रास्ते वह बहला-फुसलाकर ले गया था।

बचाव में नहीं दे पाए ठोस जवाब
आरोपियों की ओर से अदालत में कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया, जिसके चलते कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मुख्य आरोपी के पिता तेजबली को भी आरोपी बनाया था लेकिन वारदात में उसके शामिल होने के कोई तथ्य नहीं मिले, जिसके चलते अदालत ने उसे बरी कर दिया है। साथ ही न्यायाधीश ने कहा है कि जो अपराध आरोपियों ने किया है, वह क्षमा के योग्य नहीं है इस कारण इन्हें जेल में ही रहना होगा।

Mrigendra Singh Reporting
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