सरकारी स्कूलों में भू माफिया का कब्जा, प्रशासन बेबस

-जिले के 25 से ज्यादा स्कूलों में है भू माफिया का कब्जा
-स्कूलों में चहारदीवारी तक नहीं बन पा रही

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 03 Mar 2021, 03:07 PM IST

रीवा. एक तरफ सरकार माफिया के खिलाफ सख्ती की बात कर रही है। वहीं सरकारी स्कूल ही भू माफिया के चंगुल में हैं। इन स्कूलों में माफिया के अतिक्रमण के चलते सुगमता पूर्वक अध्ययन-अध्यापन में भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्कूलों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग कई बार लिखित व मौखिक शिकायत भी कर चुका है। बावजूद इसके प्रसासन कहीं न कहीं बेबस नजर आता दिख रहा है।

बताया जाता है कि स्कूलों में अतिक्रमण को लेकर पूर्व में भी अधिकारियों ने चर्चा की थी लेकिन कोई नतीजा नही निकला। हालांकि बात बढी तो अतिक्रमण को लेकर एक बार फिर विभाग में सक्रियता दिख रही है। बताया जा रहा है कि जिले के 25 स्कूलों में भू माफिया ने कब्जा कर रखा है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि 35 स्कूलों में माफिया का कब्जा रहा। इन स्कूलों को अतिक्रमण मुक्त करने के प्रयास के दौरान अपसी समझदारी के बाद करीब 10 स्कूलो की जमीन वापस ली गई। अतिक्रमणकारियों से मुक्त जमीन पर स्कूलों में निर्माण कार्य भी करवाया गया। लेकिन अभी 25 स्कूलों में अवैध कब्जा बरकरार है। इन स्कूलों की जमीन को खाली कराने के लिए प्रशासन को काफई मशक्कत करनी पड़ रही हैं। आलम यह है कि अतिक्रमण के चलते इन स्कूलों में चहारदीवारी तक का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसके चलते स्कूल परिसर असुरक्षित है। उसमें असामाजिक तत्वों के साथ ही छुट्टा मवेशियों के आने से वातावरण दूषित हो रहा है। पठन-पाठन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

स्कूलों की जमीन पर कब्जा होने के कारण छात्र-छात्राओं को खेलने के जमीन नहीं रह गई है। इतना ही नहीं स्कूल परिसरों में बनाए जाने वाले प्रस्तावित नवीन भवन रसोई घर और शौचालय का निर्माण कार्य भी बाधित है। शौचालय तक का निर्माण नहीं हो पा रहा जिससे छात्र-छात्राओं को बाहर खुले आसमान के नीचे जाना पड़ता है।

बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूल की जमीनों पर कब्जे के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने कलेक्टर कार्यालय को सारी जानकारी दी थी। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है मानों जिला प्रशासन इस मामले को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं। यही वजह है कि स्कूल परिसर को अवैध कब्जेदारों से मुक्त नहीं कराया जा सका है।

हालांकि एक बार फिर से स्कूलों में अतिक्रमण और अवैध कब्जे का मामला गर्माया है। अब गेंद पूरी तरह से जिला प्रशासन के पाले में है। लोगों को इंतजार है प्रशासन के नींद से जागने का ताकि सरकारी स्कूल की जमीनों से अतिक्रमण हटाया जा सके।

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