किसानों पर लॉकडाउन और मौसम की दोहरी मार, अब सरकार से राहत का इंतजार

छोटे किसानों के लिए संकट बनकर आया यह सीजन, सरकार से भी नहीं मिल पाई कोई सहायता

By: Anil singh kushwah

Updated: 26 May 2020, 01:55 AM IST

रीवा. इस बार किसानों पर मौसम के साथ ही लॉकडाउन की पाबंदियों की दोहरी मार पड़ी है। किसान कीटनाशक दवाएं नहीं खरीद पाए, जिस दौरान फसलों को दवाओं की जरूरत थी, उसी समय लॉकडाउन के कारण दुकानें बंद कर दी गई। साथ ही लगातार मौसम में बदलाव होता रहा। बारिश और आंधी तो नियमित ही आती रही, साथ ही कई हिस्सों में ओलावृष्टि भी हुई, जिससे उम्मीदों पर पानी फिर गया। इस आपदा के दौर में सरकार से राहत की उम्मीद थी लेकिन अपेक्षा के अनुरूप कोई राहत नहीं मिली। पटवारी एवं अन्य मैदानी अमला कोरोना संक्रमण के दूसरे कार्यों में व्यस्तता का हवाला देते हुए निरीक्षण में नहीं पहुंचा। कुछ जगह तो समय पर कटाई और अन्य कार्य भी नहीं हो पाए। इसका असर केवल बड़े किसानों तक ही सीमित नहीं रहा। छोटे और भूमि किसान जो दूसरों के यहां अधिया, बटाई में खेती करते हैं उनके सामने भी बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। ठीक से उपज नहीं हो पाने के कारण उन्हें भी कम हिस्सा मिला।

सब्जी की खेती पर सबसे अधिक असर
सब्जियों की खेती करने वाले किसानों पर सबसे अधिक असर पड़ा है। बेमौसम हुई बारिश से टमाटर, गोभी, मटर, प्याज, बैगन, लौकी, करेला, गिलकी, कद्दू, खीरा, भिंडी सहित अन्य सब्जियों की खेती खराब हो गई थी। बारिश के चलते इनमें रोग लग गया था। कई जगह तो किसानों ने खड़ी फसल ही मवेशियों को चरा दी। कुछ जगह फसल को बचाया तो बाजार में बेचने नहीं पहुंच पाए, हर तरह से किसान ही प्रभावित हुआ।

साहूकारों का कर्ज बनेगा समस्या
अधिया की खेती करने वाले किसानों के सामने अब साहूकारों का कर्ज समस्या बनकर सामने आ रहा है। मौसम के कारण फसल प्रभावित हुई तो जो कुछ मिला भी उसे समय पर बेच नहीं पाए तो ठीक दाम भी नहीं मिला। इससे साहूकारों द्वारा लिया गया कर्ज भुगताने करने में समस्या होगी। कई हिस्सों के किसानों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते अब साहूकार भी अपना पैसा डूबता देख वसूली के लिए जोर दे रहे हैं। सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिलने से उनका पैसा दे पाना मुश्किल होगा। साथ ही बच्चों की पढ़ाई एवं परिवार के स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी परेशानी होगी।

Anil singh kushwah Desk
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