निजी भूमि पर पौधरोपण का मिलेगा प्रोत्साहन, कानून बनाने से पहले संवाद

- रीवा, शहडोल, जबलपुर एवं छतपुर वन वृत्तों के 15 जिलों के प्रतिनिधि शामिल
- निजी भूमि पर भी पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित करने प्रदेश सरकार बनाने जा रही है कानून

By: Mrigendra Singh

Published: 26 Sep 2021, 10:39 PM IST



रीवा। पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार एक नया कानून बनाने जा रही है। इस बार कानून अफसरों द्वारा अपनी मर्जी से तैयार नहीं किया जाएगा बल्कि मैदानी अधिकारियों एवं आम लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं ताकि कानून बनने से पहले उसकी बारीकियों का अध्ययन किया जा सके। इसके लिए वन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल सहित कई अधिकारी रीवा पहुंचे।

जहां पर चार वन वृत्तों के 15 जिलों से वन विभाग के अधिकारी और वन समितियों से जुड़े लोग शामिल हुए। इस दौरान प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने कहा कि वह स्वयं लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं ताकि मध्यप्रदेश वृक्षारोपण विधेयक 2021 को बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि कई बार कानून कुछ लोगों के बीच में ही तय होता है और उसे पास करने के बाद लागू किया जाता है तो लोग आपत्तियां दर्ज कराते हैं और संशोधन भी करने पड़ते हैं। इसलिए पौधरोपण के कार्य से किसानों एवं आम लोगों को भी जोडऩा है, जिसके लिए कानून बनाया जा रहा है। इसमें उनके सुझाव को भी शामिल किया जा रहा है।

प्रमुख सचिव ने कई वन समितियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों द्वारा पौधरोपण को लेकर किए जा रहे अच्छे कामों को भी साझा किया और कहा कि ऐसे लोगों के कार्यों से दूसरे लोग भी प्रभावित होते हैं। वन विभाग के जयंतीकुंज स्थित सभागार में आयोजित कार्यशाला को प्रधान मुख्य वन संरक्षक पुष्कर सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय शुक्ला आदि ने भी संबोधित किया।

कार्यशाला में शामिल हुए लोगों के सुझाव लिए गए हैं। इस कार्यशाला में कलेक्टर इलैयाराजा टी भी पहुंचे। अलग-अलग जिलों से आए लोगों ने अपने-अपने सुझाव दर्ज कराए हैं। कार्यक्रम में रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, जबलपुर, मंडला, डिंडोरी, कटनी, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी जिले आदि के प्रतिनिधि शामिल हुए।
------------
निजी भूमि पर पौधरोपण मिलेगा प्रोत्साहन
मध्यप्रदेश वृक्षारोपण प्रोत्साहन कानून में निजी भूमि पर पौधरोपण के लिए प्रोत्साहन देने का कार्य शामिल किया जाएगा। इसमें यह भी प्रावधान शामिल किया जाएगा कि लोग अपने खेतों में हर तरह के पौधे लगाकर बाद में उनकी कटाई भी कर सकेंगे। सुझाव में भी वन समितियों एवं किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सबसे अधिक समस्या निजी भूमि पर लकड़ी काटने की अनुमति से जुड़ी होती है। सागौन एवं अन्य कई लकडिय़ों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसान को खेत से काटने की अनुमति का नियम सरल किया जाए, जिससे अधिक लोगों को इसका लाभ मिले।
----
नए कानून से यह फायदे होने का दावा
प्रमुख सचिव एवं अन्य अधिकारियों ने कहा कि किसानों द्वारा पौध लगाने और पेड़ काटने की अनुमति मिलने से बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। घरेलू काष्ठ की मात्रा बढऩे से प्रदेश के बाहर एवं विदेश से मांग कम होगी। घरेलू काष्ठ उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। वनों में लकड़ी चोरी की घटनाएं कम होंगी। लकड़ी से जुड़े उत्पाद के निर्माण से स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

Mrigendra Singh Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned