प्रदेश के बाहर फंसे प्रवासियों का छलका दर्द: कहा-हल जोत लेंगे पर बाहर कमाने नहीं जाएंगे

बोले-लॉकडाउन में भूखे-प्यासे रह गए, कर्ज लेकर पहुंचे

By: Anil singh kushwah

Published: 05 May 2020, 07:29 PM IST

रीवा. चेहरे पर मायूषी, लाचारी, बेबसी और घर पहुंचने की बेचैनी कोरोना के खौफ पर भारी रही। चिलचिलाती धूप में घर पहुंचने के लिए बसों के दरवाजे पर प्रवासी जद्दोजहद कर रहे थे। जैसे ही काउंटर से एनाउंस हुआ मऊगंज, हनुमना, सीधी की ओर जाने वाले हाथ उठाओ। सामने की भीड़ में सैकड़ों हाथ खड़े करके बोले, हमारे साथ बच्चे भी हैं। इस तरह का दृश्य सोमवार सुबह से देरशाम तक मार्तंड क्रमांक-१ परिसर का रहा। प्रदेश के बाहर से आए अधिकांश श्रमिकों ने कहा कि खेत में हाल जोत लेंगे, लेकिन अब जिंदगी में बाहर नहीं जाएंगे। सीधी के दीपक ने कहा, लॉकडाउन में भूखे-प्यासे रह गए। गांव से कर्ज लेकर पिता ने खाते में पैसे भेजा तो रीवा पहुंचे। सरकार की कोई व्यवस्था काम नहीं आई। गुजरात से रीवा आने में ४५०० रुपए किराया देना पड़ा। नरसिंहपुर से दो बुजुर्ग तीन दिन बाद रीवा पहुंचे। रीवा के चोरगढ़ी निवासी बुजुर्गों ने कहा, १५ दिन तक चना खाकर बिताया आज रीवा पहुंचे तो भोजन मिला। पैदल चलने से पैर में छाले पड़ गए।

सरकार की कोई व्यवस्था नहीं आई काम
कुछ ऐसी की दशा हर श्रमिक की रही। बाहर से आए लोगों की मार्तण्ड क्रमांक-१ स्कूल परिसर में स्क्रीनिंग कराकर मेडिकल सर्टिफिकेट भी दिया गया, साथ ही भोजन भी कराया गया। एसडीएम हुजूर फरहीन खान ने बताया कि सोमवार शाम ६ बजे तक प्रदेश के बाहर से रीवा जिले के २१५० लोग आए। देर शाम तक ३० बसों से लोगों को तहसीलवार भेजा गया। हनुमना, मऊगंज के अधिक लोग रहे। प्रदेश के बाहर के अलावा राज्य के बड़े शहरों से भी लोग आने लगे हैं। सभी की स्क्रीनिंग की गई।

दो की जगह चार-चार को बैठा दिया
प्रदेश के बाहर से आने वाले श्रमिकों को बसों में दो की जगह चार-चार लोगों को सीट पर बैठाकर भेज दिया। रास्ते में सब परेशान होने लगे। सूरत से आए दंपती ने बताया कि साथ में एक बेटा भी है। इसके अलावा दो बड़े-बड़े बैग। ऐसे में तीन सीट पर चार लोगों को बैठा दिया, जबकि दो-दो लोगों को ही बैठने के लिए वहां एनाउंस किया जा रहा था। रीवा पहुंचने के बाद भी एक-एक बस में ४०-४५ लोगों को बैठाकर गांव के लिए रवाना किया गया।

किराया छह हजार देना पड़ा
देवतालाब के जितेन्द्र पटेल परिवार के साथ सूरत में रहते थे। काम बंद होने के बाद खाने-पीने की दिक्कत होने लगी। कई बार ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। तीन दिन पहले सूचना मिली कि सूरत से बस मध्य प्रदेश जा रही है। बस में परिचालक से संपर्क किया तो बताया कि तीन-तीन हजार रुपए लगेंगे। साथ के ही कुछ लोग अभी भी वहीं पर हैं। पड़ोसियों से कर्ज लेकर आए हैं। घर पहुंचने के बाद खाते में पैसे वापस कर देंगे।

Anil singh kushwah Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned