खनिज मंत्री के गृह जिले में अफसर डकार गए 200 करोड़ रुपए खनिज की रायल्टी, जानिए कैसे हुआ खेल

एमपीआरडीसी की सडक़ों में उपयोग की गई खनिज में रायल्टी की अनदेखी, अधिकारी और कंस्ट्रक्शन कंपनियां खजाने को लगा रहीं चपत

By: Rajesh Patel

Updated: 23 Mar 2018, 03:34 PM IST

रीवा. खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के गृह जिले में 200 करोड़ रुपए से ज्यादा खनिज रायल्टी के हिसाब में गड़बड़ी की गई है। शासकीय निर्माण कार्यों में उपयोग किए गए खनिज रायल्टी में विभागीय अधिकारियों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों की साठ-गांठ से सरकार के खजाने में रायल्टी नहीं जमा की जा रही है। ऐसा ही मामला जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में सामने आया है। एमपीआरडीसी और खनिज विभाग में जमा की गई रायल्टी के आंकड़े में अंतर बड़े पैमाने पर रायल्टी के हिसाब में गड़बड़ी सामने आयी है।
जिला पंचायत की बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट
जिले में शासकीय निर्माण कार्यों में अकेले एपीआरडीसी की सडक़ों के निर्माण की बात करें तो पिछले पांच साल से लेकर अब तक 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा लागत की सडक़ों का निर्माण कराया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग श्रेणी में सडक़ों की कुल लागत का दो प्रतिशत लेकर अधिकत 10 प्रतिशत तक खनिज उपयोग की रायल्टी संबंधित विभाग के माध्यम से सरकार के खजाने में जमा की जाती है। जपं की सामान्य सभा की बैठक के दौरान एमपीआरडीसी के प्रबंधक ने सदन को जानकारी दी कि रीवा जिले में 2 हजार करोड़ से ज्यादा निर्माण कार्य कराया जा चुका है। विभिन्न कंस्ट्रक्शन कंपनियों के द्वारा सडक़ निर्माण में उपयोग की गई खनिज की मात्रा के अनुसार 200 करोड़ रुपए से ज्यादा रायल्टी जमा कराई गई है।
अधिकारियों की रिपोर्ट में खुलासा
इस दौरान जिला खनिज अधिकारी की ओर से सदन को करीब १९ करोड़ रुपए रायल्टी प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। दोनों अधिारियों की रिपोर्ट खुद ब खुद खनिज रायल्टी के हिसाब की गड़बड़ी बता रहे हैं। उदाहरण के तौर पर श्रीजी कंस्ट्रक्शन कंपनी हरदुआ से चाकघाट मार्ग का निर्माण कर रही है। कंपनी के द्वारा अभी तक 34 लाख रुपए की रायल्टी जमा नहीं की गई है। इसी तरह जेपी कंपनी ने भी चार करोड़ रुपए से ज्यादा रायल्टी नहीं जमा कर रही है। इस तरह का मामला अकेले श्रीजी कंस्ट्रक्शन और जेपी कंपनी का नहीं है, बल्कि जिले में आधा दर्जन से ज्यादा कस्ट्रक्शन कंपनियों ने खनिज की उपयोगिता के आधार पर रायल्टी चोरी कर सरकार के खजाने को चपत लगा रही हैं।
पांच साल से चल रहा रायल्यटी चोरी का खेल, जिम्मेदार मौन
जिले में विभिन्न शासकय निर्माण कार्यों में कंस्ट्रक्शन कंपनियां और ठेकेदारों की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्यों में उपयोग की रही खनिज की रायल्टी चोरी का खेल पांच साल से चल रहा है। जिपं की बैठक में एमपीआरडी की सडक़ों के निर्माण में रायल्टी के हिसाब में गड़बड़ी सामने आयी है। इसी तरह प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़, पीडब्ल्यू और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की विभिन्न एजेंसियों की ओर से कराए जा रहे निर्माण में उपयोग किए जा रहे रायल्टी में खेल चल रहा है।
दो चली जिला पंचायत की सदन, जांच कमेटी गठित
जिले में खनिज रायल्टी में गड़बड़ी, अवैध खनन सहित ग्रामीण क्षेत्र में खनिज विभाग की अन्य गतिविधयों को लेकर जिला पंचायत सामान्य सभा की सदन दो दिन तक चली। पहले दिन एपमीआरडीसी की सडक़ों में उपयोग की गई खनिज की रायल्टी में मामला उलझा रहा। दूसरे दिन बुधवार को प्रदूषण, खनिज और प्रधानमंत्री ग्रामीण विभाग की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस दौरान विभागों की ओर से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के आधार पर मंथन किया गया। बैठक में जिपं अध्यक्ष अभय मिश्र ने कहा कि दस्तावेज के आधार पर जिले में बड़े पैमाने पर रायल्टी में गड़बड़ी की गई है। सदस्यों ने सर्वसम्मत से जांच कमेटी गठित कर जांच कराने का प्रस्ताव लाया है। जिपं अध्यक्ष की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों और सदस्यों की संयुक्त जांच दल बनाए जाने की सहमती की गई।
फैक्ट फाइल
शासकीय निर्माण कार्यो से ली गई रायल्टी
वित्तीय वर्ष प्राप्ता रायल्टी
2014-15 5.26
2015-16 5.60
2016-17 8.04
कुल 18.91
नोट: आंकड़े करोड़ में, खनिज विभाग के द्वारा जिपं बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट से लिए गए हैं।

Congress
Show More
Rajesh Patel Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned