मिनी स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट भाषणों तक सीमित, धेले भर का काम नहीं

- नगर निगम द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर शासन की ओर से पांच साल बाद भी नहीं आया जवाब
- अमृत योजना से मिले प्रोजेक्ट दिखा रहे शहर में विकास की राह

By: Mrigendra Singh

Published: 03 Jul 2021, 10:11 PM IST



रीवा। विंध्य प्रदेश की राजधानी रहे रीवा शहर के व्यवस्थित निर्माण और पुराने वैभव को वापस करने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल करने की मांग तेजी से उठी थी। सरकार के तत्कालीन जिम्मेदारों ने घोषणाएं की थी कि रीवा को स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा और यह इंदौर-भोपाल से बेहतर शहर बनेगा। स्मार्ट सिटी बनाने रीवा से भी प्रस्ताव गया था लेकिन केन्द्र सरकार ने अपने मानक में खरा नहीं पाने की वजह से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किया था। तब मुख्यमंत्री सहित अन्य जिम्मेदार नेताओं ने आश्वासन दिया कि अब मिनी स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट लागू होगा और उसमें रीवा को शामिल करते हुए व्यवस्थित विकास किया जाएगा। चुनावों के दौरान नेताओं ने इस मुद्दे को भुनाया भी लेकिन यह केवल भाषणों तक ही सीमित रह गया। करीब पांच वर्ष का समय पूरा हो चला है लेकिन अब तक कोई कार्य नहीं हुआ है। उस दौरान मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नगर निगम से पूरी प्रोफाइल शासन ने मांगी थी। इसके बाद से न तो नगर निगम ने कोई प्रयास किया और न ही शासन के स्तर पर किसी तरह के बजट या फिर अन्य कार्य हुए। पड़ोसी शहर सतना स्मार्ट सिटी में शामिल हुआ है, हालांकि यहां भी अपेक्षा के अनुरूप कार्य नहीं हुए हैं। फिर भी प्रोजेक्ट के तहत बड़ी रकम मिली है और कार्य शुरू किए जा रहे हैं।

- प्रोफाइल भेजने के बाद निगम ने भी प्रयास नहीं किए
रीवा के स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर होने के बाद राज्य सरकार ने मिनी स्मार्ट सिटी की योजना घोषित की। इसके तहत नगर निगम से शासन ने जानकारी मंगाई थी। नगर निगम ने उसके पहले स्मार्ट सिटी के लिए मूलभूत संरचना की जो प्रोफाइल भेजी थी उसे ही मिनी स्मार्ट सिटी के लिए भी भेज दिया। बाद में शासन ने किसी तरह की प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की और न ही नगर निगम ने कोई प्रयास किया जिसके चलते मिनी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत राशि मिल सकती।

रीवा सहित १२ शहरों की हुई थी घोषणा
मिनी स्मार्ट सिटी योजना के तहत एक लाख की आबादी से अधिक के शहरों को शामिल करने की योजना घोषित की गई थी। जिसमें शुरुआती दौर में 12 शहरों के लिए राज्य सरकार अतिरिक्त बजट आवंटित करने उनसे जानकारियां मांगी थी। इसमें रीवा भी शामिल किया गया था। कहा गया था कि कामकाज की प्रतिस्पर्धा के बाद शहरों के नाम तय होंगे और उसी क्रम में बजट आवंटित होगा। जिसमें रीवा, कटनी, सिंगरौली, देवास, रतलाम, बुरहानपुर, खंडवा, भिंड, छिंदवाड़ा, गुना, शिवपुरी, विदिशा, छतरपुर, दमोह, मंदसौर, नीमच, पीथमपुर, होशंगाबाद, इटारसी, सीहोर, बैतूल, सिवनी, दतिया व नागदा के बीच प्रतिस्पर्धा की बात कही गई थी। लगातार चुनाव आते रहे और उनकी जरूरतों के अनुसार घोषणाएं होती गई, कई दूसरे शहरों को शामिल किया गया और कार्य भी प्रारंभ हो गया लेकिन रीवा का नाम अब तक शामिल नहीं हुआ है। सीधी, अमरकंटक, मैहर, चित्रकूट, ओरछा सहित अन्य जगह कार्य शुरू हो चुका है।
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इन मापदंडों के अनुसार करना था चयन
सरकारी ने मिनी स्मार्ट सिटी चयन के लिए जो मापदंड जारी किए थे उसमें पांच प्रमुख बिन्दुओं पर परीक्षण किया जाना था। जिसमें ई-गवर्नेंस से जुड़ी नागरिकों को दी जाने वाली सुविधाएं निगम की किस स्तर की हैं, इस पर दूसरे शहरों से मुकाबला करना था। उस दौरान तो रीवा के पास इसकी तैयारी थी लेकिन अब अधिकांश काम आनलाइन शुरू किया गया है। अपशिष्ट प्रबंधन और पेयजल को भी शामिल किया गया था, इसमें भी अब ठीक कार्य हो रहा है। समस्याओं के सरलीकरण, नई पहल, बड़े प्रोजेक्ट पर क्रियान्वयन आदि के आधार पर चयन किया जाना था। उस दौरान पांच साल पहले कुछ कमियां थी लेकिन अब प्रतिस्पर्धा में रीवा भी बराबर में खड़ा है।

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अमृत एवं दूसरे प्रोजेक्ट दिखा रहे विकास की राह
शहर में मिनीट स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट चाहे भले ही लागू नहीं किया गया है लेकिन दूसरी योजनाओं से विकास की गति बढ़ी है। केन्द्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से शुरू की गई अमृत योजना के तहत किए जा रहे कार्य विकास की ओर से बढ़ते शहर की तस्वीर बयां कर रहे हैं। इस योजना के तहत पेयजल की व्यवस्था, सीवरेज प्रोजेक्ट, ग्रीनरी, सिटी बस आदि के कार्य नजर आ रहे हैं। वहीं केन्द्र सरकार ने शहर को ४३ करोड़ रुपए का नया फ्लाईओवर दिया और ९० करोड़ रुपए से अधिक लागत की चोरहटा से रतहरा तक मॉडल सड़क का प्रोजेक्ट दिया गया है। इसके अलावा पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत रिवरफ्रंट और अन्य बड़े कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रोजेक्ट को ही बेहतर तरीके से लागू किया जाए तो रीवा स्मार्ट नजर आ सकता है।

Mrigendra Singh Reporting
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