विधानसभा चुनाव 2018: सिरमौर में यह मुद्दा बन रहा मतदाताओं के नाराजगी का कारण

विधानसभा चुनाव 2018: सिरमौर में यह मुद्दा बन रहा मतदाताओं के नाराजगी का कारण

Ajeet shukla | Publish: Sep, 08 2018 12:16:43 PM (IST) Rewa, Madhya Pradesh, India

जानिए क्या बन रही स्थिति...

रीवा। भाजपा के विधायक दिव्यराज सिंह ने समस्याओं के समाधान को लेकर हर मंगलवार चौपाल लगाकर क्षेत्रवासियों का दिल तो जीता है, लेकिन डभौरा के बजाए नष्टिगवां में नया कॉलेज खोले जाने से एक बड़े जनसमूह में नाराजगी भी है। जिसका सीधा फायदा पिछले चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस प्रत्याशी को मिल सकता है। क्षेत्र में दो पूर्व विधायकों की पकड़ भी वर्तमान विधायक के जीत की राह में रोड़ा बन सकती है। चुनाव भाजपा, कांग्रेस व बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनने की पूरी संभावना है। क्षेत्र में भाजपा को लंबे समय बाद जीत हासिल हुई थी। इससे पहले बीएसपी, माकपा और लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है।

वर्ष 2013 में विजेता व प्रतिद्वंदी
भाजपा के दिव्यराज सिंह 40018 मत
कांग्रेस के डॉ. विवेक तिवारी (बबला) 34730

ये नाम हैं चर्चा में
भाजपा से
दिव्यराज सिंह, विधायक
प्रदीप सिंह पटना, भाजपा नेता
महाबलि गौतम, भाजपा नेता
राम सज्जन शुक्ल, भाजपा नेता
प्रज्ञा त्रिपाठी, भाजपा नेता
रविवराज विश्वकर्मा, भाजपा नेता

कांग्रेस से
विवेक तिवारी, निकटतम प्रतिद्वंदी
गिरीश सिंह, कांग्रेस नेता
उमाशंकर मिश्रा, कांग्रेस नेता
चक्रधर सिंह, कांग्रेस नेता
विद्यापाल गौतम, कांग्रेस नेता
बृजेंद्र पाण्डेय, कांग्रेस नेता

ये भी हैं प्रबल दावेदार
सिरमौर में विधायक के लिए बसपा के पूर्व विधायक राजकुमार उर्मलिया, पूर्व विधायक रामगरीब वनवासी व नीता आदिवासी को भी प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

मतदाताओं की स्थिति
80 हजार ब्राह्मण, 80 हजार पिछड़ा वर्ग, 40 हजार आदिवासी, 20 हजार अन्य जातिवर्ग के मतदाता हैं।

यह है प्रमुख मुद्दा
सरकारी योजनाओं को मुहैया कराना व अतिक्रमण के अलावा सडक़, स्कूल व अपराध पर लगाम लगाना।

इस बार की चुनौती

भाजपा
सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में 106 ग्राम पंचायत हैं। ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र होने के चलते दूसरे जाति वर्ग के प्रत्याशियों के लिए मुश्किल होगी। वैसे तो ज्यादातर ग्राम पंचायत में भाजपा समर्थित सरपंच हैं। इसके बावजूद राह आसान नहीं है।

कांग्रेस
क्षेत्र में कई चेहरे सक्रिय हैं और उनकी पकड़ भी मतदाताओं के बीच अच्छी है। ब्राह्मण प्रत्याशी के सफल होने की संभावना ज्यादा है। हालांकि ब्राह्मण मतदाता बंटे तो बसपा जैसी दूसरी पार्टियों के प्रत्याशियों को भी लाभ मिल सकता है।

वर्जन -
सरकारी योजनाओं से वंचित रहने के चलते मतदाता भाजपा से नाराज हैं। हालांकि विधायक ने लोगों को खुश करने की जमकर कोशिश की है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्र तक नहीं पहुंचे हैं। इसका नुकसान हो सकता है।
जगदीश यादव, समाजसेवी।

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