Rewa : वार्डों में रसूख और दबाव के हिसाब से भेजे जा रहे सफाईकर्मी, बड़े वार्डों में बनी समस्या

- शहर के आउटर वार्डों का क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों अधिक है लेकिन सफाई कर्मचारियों की पदस्थापना मनमर्जी की

By: Mrigendra Singh

Published: 29 Jun 2020, 10:34 PM IST


रीवा। शहर में सफाई कर्मचारियों की वार्डों में तैनाती संबंधित क्षेत्र के पार्षद और स्थानीय नेताओं के रसूख के हिसाब से की जा रही है। इसमें व्यापक पैमाने पर विसंगतियां हैं। जिन वार्डों का क्षेत्रफल अधिक है, वहां पर सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता भी अधिक हो रही है।

निगम प्रशासन इन आवश्यकताओं को दरकिनार कर वार्डों में सफाई कर्मचारी भेजता रहा है। आवश्यकता वाले वार्डों के पार्षदों और स्थानीय लोगों की ओर से समय-समय पर नगर निगम से इसकी मांग की जाती रही है। अब एक बार फिर से बरसात का समय आया तो नालियों एवं अन्य सफाई कार्यों के लिए आवश्यकता बढ़ गई है। हाल ही में नगर निगम में नए आयुक्त ने ज्वाइनिंग की है। जिसके चलते आयुक्त के संज्ञान में भी यह मामला लाया गया है कि जहां जरूरत है, वहां पर कम संख्या में सफाईकर्मी नियुक्त किए गए हैं। साथ ही जो छोटे वार्ड हैं उनमें अधिक संख्या में लोग काम कर रहे हैं।

इसमें निगम के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा के नेता और निगम के निवर्तमान स्पीकर सतीश सोनी का वार्ड क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा है। जनसंख्या भी अन्य की तुलना में कम है। यहां पर १३ सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं, साथ ही पांच अतिरिक्त भेजे जा रहे हैं। इस पर कई बार विपक्ष के साथ ही भाजपा के पार्षदों ने भी आपत्ति उठाई है।

- सदन में भी कई बार हुआ हंगामा
वार्डों में क्षेत्रफल के घनत्व और जनसंख्या के हिसाब से कर्मचारियों की पदस्थापना की मांग नगर निगम परिषद के सदन में कई बार उठाई जा चुकी है। वरिष्ठ पार्षद सज्जन पटेल, विनोद शर्मा, अशोक पटेल, देविका त्रिपाठी, आशा सिंह, सतीश सिंह, नीरज पटेल, रूपा जायसवाल, सरोज बसोर, दशमतिया, रमाकांत पाण्डेय, नम्रता सिंह सहित अन्य ने सफाईकर्मियों की संख्या को लेकर आपत्ति उठाई और कहा कि जहां आवश्यकता जिस तरह से है उसके अनुसार ही कर्मचारी नियुक्त किए जाएं। इसमें किसी एक दल के सदस्य नहीं थे, दोनों पक्षों के थे।
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प्रमुख वार्डों में ऐसी है कर्मचारियों की संख्या
शहर के जिन प्रमुख वार्डों में कर्मचारियों की संख्या को लेकर विसंगतियां हैं और आपत्ति उठाई गई है, उसमें प्रमुख रूप से वार्ड छह में दस, वार्ड नौ में आठ, वार्ड 17 में 18, वार्ड 18 में 19, वार्ड सात, 21, 29, 28 में 11, वार्ड 19 में 12, वार्ड 30 में 13, वार्ड 31 में 15, वार्ड दस में दस, वार्ड 11, 12, 13, 14, 15 आदि में आठ-आठ की संख्या में कर्मचारी तैनात हैं।

- कई कर्मचारियों की सेवा का हिसाब नहीं
नगर निगम के बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जिनकी पदस्थापना सफाई कार्य के लिए है लेकिन वह नेताओं और अफसरों के यहां सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व में निगम के तत्कालीन आयुक्त सभाजीत यादव ने भाजपा कार्यालय एवं नेताओं के घर पर काम कर रहे सफाई कर्मचारियों की वापसी कराई थी। बताया गया है कि १६१ कर्मचारियों का नाला गैंग बनाया गया है लेकिन इतनी संख्या में कर्मचारी मोहल्लों में सफाई करते नजर नहीं आते।

- क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से हो तैनाती
वार्डों के निवर्तमान पार्षदों की ओर से एक बार फिर आवाज उठाई गई है। आयुक्त से मांग की है कि इसकी समीक्षा की जाए। वार्ड नौ के निवर्तमान पार्षद सतीश सिंह बताते हैं कि २२ किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है, वार्ड करीब चार किलोमीटर क्षेत्रफल का है। अभी आठ कर्मचारी हैं, जबकि करीब 20 की संख्या चाहिए। इसी तरह वार्ड 15 के अशोक पटेल ने कहा कि वार्ड में आठ कर्मचारी हैं, पांच किलोमीटर क्षेत्रफल है तो 20 से अधिक कर्मचारियों की जरूरत है। कई बार पत्र लिखा है। इसी तरह वार्ड 13 की नम्रता सिंह का कहना है कि उनका वार्ड घनत्व के हिसाब से अधिक है, इसलिए सफाई की जरूरत अधिक होती है, यहां अभी सात कर्मचारी आ रहे हैं। वार्ड 14 की रूपा जायसवाल ने भी शिकायत की है कि संख्या की समीक्षा कर आवश्यकता के अनुसार पोस्टिंग की जाए।

Mrigendra Singh Reporting
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