स्वास्थ्य मिशन: एम्बुलेंस के टायर घिसे, निजी वाहनों के भरोसे पीडि़त, जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते जोखिम में मरीजों की जान

स्वास्थ्य मिशन: एम्बुलेंस के टायर घिसे, निजी वाहनों के भरोसे पीडि़त, जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते जोखिम में मरीजों की जान

Rajesh Patel | Publish: Sep, 10 2018 12:18:49 PM (IST) | Updated: Sep, 10 2018 12:26:06 PM (IST) Rewa, Madhya Pradesh, India

सीएमएचओ कार्यालय और ठेका एजेंसी के बीच खींचतान से मेडिकल उपकरण की नहीं हो पा रही खरीदी

रीवा. जिला स्वास्थ्य अधिकारी की अनदेखी के चलते मरीजों की जान जोखिम में डाल कर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य मिशन की नेशनल एम्बुलेंस सर्विस (एनएएस) इस तरह बदहाल हो गई है कि पीडि़तों को अटेंड करने के लिए नहीं पहुंची रही हैं। जबकि अटेंड के लिए पहुंच रहीं ज्यादातर एम्बुलेंस के टायर घिर गए हैं। नियम-कायदे की अनदेखी कर आपातकालीन सेवा दी जा रही है। इधर, जिले में ज्यादातर एम्बुलेंस खराब होने के चलते पीडि़त परिवार इलाज के लिए निजी वाहन से हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं।

एम्बुलेंस के आक्सीजन में लगे ह्मिडी
संजय गांधी अस्पताल की बर्न यूनिट में दोपहर 1.30 बजे एम्बुलेंस (बुलेरो एमपी-17-ए2-6317) बैकुंठपुर के आग से जले सुजीत सोंधिया को लेकर पहुंची। एम्बुलेंस के इमर्जेंसी मेडिकल टेकनीशियन (इएमटी) ज्ञानेन्द्र पांडेय ने बताया कि एम्बुलेंस के आक्सीजन में लगे ह्यमिडी फायर कई दिनों से टूट गई है। एम्बुलेंस के लिए बोलेरो छोटी पड़ती है। एम्बुलेंस में मेडिकल उपकरण नहीं होने के कारण पीडि़त को इमर्जेंसी की सुविधाएं नहीं दी जा सकीं।

ब्रेक लगाने पर बेकाबू हो हो रही एम्बुलेंस
कर्मचारियों ने बताया कि एम्बुलेंस के टायर घिस गए हैं। ब्रेक लगाने पर एम्बुलेंस बेकाबू होने का भय रहता है। दो दिन पहले एम्बुलेंस पलटने से पीडि़त सहित तीमारदार घायल हो गए। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते मरीजों की जान जोखिम में डाल कर हॉस्पिटल पहुंचाया जा रहा है। दोपहर गोविंदगढ़ क्षेत्र से दो पीडि़तों को निजी वाहन से पहुंचाया गया।

खटारा एम्बुलेंस के चालक भी भयभीत
मेंटीनेंस के लिए कंट्रोलरूम से लेकर रतहतरा तक पांच एम्बुलेंस खड़ी हैं। कलेक्टर कार्यालय के सामने दो एम्बुलेंस कई दिन से मेंटीनेंस के लिए खड़ी हैं। इसी तरह रतहरा में (गड़रिया मोड) हाइवे पर दो और एक वर्कशॉप के भीतर यानी कुल मिलाकर पांच एम्बुलेंस मेंटेनेंस के लिए इन जगहों पर खड़ी हैं। तीन एम्बुलेंस विभाग को सरेंडर कर दी गई है। ज्यादातर एम्बुलेंस के टायर घिर गए हैं। जिसको लेकर चालक भी दुर्घटना की आशंका से भयभीत रहते हैं।

खींतचान में अटकी उपकरणों की खरीदी
सीएमओ कार्यालय और ठेका एजेंसी के बीच खींचतान और कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के चलते मेडिकल उपकरणों की खरीदी नहीं हो पा रही है। तीन माह से टेंडर की प्रक्रिया नहीं हो सकी। कार्यालय सूत्रों के अनुसार जिकित्सा हेल्थ केयर के कर्मचारियों और जिला स्वास्थ्य कार्यालय के कर्मचारियों के बीच मेडिकल इक्पिमेंट की खरीदी लटकी हुई है। जिसका खामियाजा पीडि़़़तों को भुगतना पड़ रहा है।

इन उपकरणों की होनी है खरीदी
स्वास्थ्य मिशन की नेशनल एम्बुलेंस सर्विस (एनएएस) में उपयोग होने वाले उपकरण डिलेवरी किट, बीपी इक्पिमेंट, थर्मा मीटर, ग्लूकोमीटर, बीटाडीन, ड्रेसिंगकिट, अम्बू बैग आदि मेडिकल इक्पिमेंट की खरीदी होनी है।

मेंटीनेंस पर हर माह लाखों का भुगतान
नेशनल एम्बुलेंस सर्विस को मेंटीनेंस के नाम पर हर माह लाखों रुपए का भुगतान किया जा रहा है। लेकिन, जिम्मेदारों की मनमानी के चलते एम्बुलेंस खटारा हो रही हैं। कार्यालय सूत्रों के अनुसार लाखों रुपए का भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद पचास फीसदी एम्बुलेंस मेंटीनेंस के लिए खड़ी हैं।

 

 

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