मूल्यांकनकर्ताओं की करतूत पर पर्दा डाल रहा एपीएसयू, जानिए कैसे छात्रों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़

मूल्यांकनकर्ताओं की करतूत पर पर्दा डाल रहा एपीएसयू, जानिए कैसे छात्रों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़

Balmukund Dwivedi | Publish: Sep, 07 2018 05:50:38 PM (IST) | Updated: Sep, 07 2018 05:50:39 PM (IST) Rewa, Madhya Pradesh, India

सेमेस्टर परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बरती गई बड़ी लापरवाही, कॉलेजों में एक ही विषय में अनुत्तीर्ण हुए सारे छात्र, जांच के नाम पर लीपापोती

 

रीवा. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लापरवाहीपूर्ण रवैया अख्तियार करने वालों पर पर्दा डालने का कार्य कर रहा है। पिछले कई वर्षों से सेमेस्टर परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद कॉलेजों से छात्रों के सामूहिक रूप से अनुत्तीर्ण होने की शिकायत आती है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक उन मूल्यांकनकर्ताओं को चिह्नित नहीं कर सका है, जो छात्रों की मुसीबत का कारण बनते हैं। वर्तमान में भी विश्वविद्यालय अधिकारी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं।

आश्वासन पर अमल नहीं
विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वालों पर पर्दा डालने के लिए अधिकारी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से भी नहीं चूक रहे हैं। जनता कॉलेज के एमएससी के छात्र वर्तमान में इसका जीता-जागता उदाहरण बने हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांग के अनुरूप आश्वासन देने के बावजूद उत्तरपुस्तिकाओं के अवलोकन कराने की जहमत नहीं उठा रहा है। अधिकारी इस बात को लेकर सशंकित हैं कि पूर्व की भांति इस बार भी मूल्यांकनकर्ताओं की ही त्रुटि न सामने आ जाए।

मूल्यांकनकर्ताओं पर कार्रवाई की उठती है मांग
दरअसल उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में त्रुटि सामने आने की स्थिति में छात्रों की ओर से मूल्यांकनकर्ताओं पर कार्रवाई की मांग की जाती है। पूर्व में इस तरह की मांग न केवल छात्रों की ओर से उठाई गई थी। बल्कि कार्रवाई को लेकर छात्रों की ओर से धरना प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की तमाम कोशिश के बावजूद कार्रवाई करने का निर्णय नहीं ले सका।

मूल्यांकन कार्य से प्रतिबंधित किए जाने का है प्रावधान
विश्वविद्यालय में निर्धारित नियमों के अनुरूप उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लापरवाही सामने आने की स्थिति में कार्रवाई के तहत मूल्यांकनकर्ता को हमेशा के लिए प्रतिबंधित किए जाने का प्रावधान है। यह बात ओर है कि अभी तक विश्वविद्यालय की ओर से एक बार भी यह कार्रवाई नहीं की गई है। विश्वविद्यालय की ओर से हवाला मूल्यांकनकर्ताओं की कमी का दिया जाता है।

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