scriptPalak kishori rewa Bhagwat katha | भगवान भक्तों की परीक्षा लेते हैं और समस्याओं को दूर भी करते हैं | Patrika News

भगवान भक्तों की परीक्षा लेते हैं और समस्याओं को दूर भी करते हैं

- राधाकृष्ण मंदिर लखौरीबाग में शुरू हुई श्रीमद भागवत कथा

रीवा

Published: April 02, 2022 08:03:29 pm


रीवा। शहर के लखौरी बाग स्थित राधा कृष्ण मंदिर में नवरात्र के पहले दिन दो अप्रेल को श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। इस दौरान कथा बाचक बालविदुषी पलक किशोरी ने नौ दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके पहले कलश यात्रा भी निकाली गई। पहले दिन की कथा में पलक किशोरी ने कहा कि भगवान परीक्षा तो लेते हैं पर भक्त का विश्वास बने रहने पर चमत्कार भी करते हैं। भगवान कहते हैं कि अगर तुमने एक बार मुझमे पूर्ण समर्पण कर दिया तो तुम्हारी सारी समस्याओं को में दूर कर दूंगा। शास्त्रो में भगवान के 3 स्वरूप बताये गए हैं। सत , चित और आनंद । ब्रह्मांड में सब कुछ नष्ट होता है और फिर निर्माण होता है । सत वही होगा तो सृष्टि का निमार्ता है। परम पिता परमेश्वर , योगेश्वर कृष्ण। भगवान से जुडऩे का सबसे सरल मार्ग भक्ति का है। निष्काम कर्म करते हुए भक्ति का। उन्होंने कहा कि इसी तरह दूसरा स्वरूप चित्त का है , अर्थात स्वभाव का। भगवान हर क्षण अपने भक्त की चिंता करते हैं। एक बार आपने अगर उन्हें सच्चे मन से याद कर लिया वे उसी समय आपकी मदद के लिए आ जाएंगे। इसी तरह आनंद का अर्थ है ख़ुशी। भक्त अपने भगवान के साथ हर पल खुश रहता है। पलक किशारी ने कहा कि भागवत हमे भगवान से जोड़ती है। जब हम भगवान से जुड़ जाते हैं तो मृत्यु का भी भय नही रह जाता । प्रथम दिवस भागवत का महत्व बताते हुए पलक किशोरी जी ने भक्ति की कहानी के साथ ही विभिन कथानकों का वर्णन किया।
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विंध्यभूमि और संस्कारों को नमन करते हुए शुरू की कथा
शहर के ही पुष्पराज नगर में जन्मी कचा वाचक पलक किशोरी ने कहा कि सर्वप्रथम हम प्रणाम करते हैं द्वारिकाधीश श्री कृष्ण को जिनकी कृपा से हमे मनुष्य योनि में जन्म मिला। नमन है पूर्वजों को जिनके संस्कारों ने हमे ईश्वर के प्रति आस्था दी। नमस्कार भरतखण्ड और विंध्य की तपोभूमि को जो हमे हर क्षण जीवन प्रदान करती है। ये लखौरी बाग भी एक तपस्या स्थल है, ये बांके बिहारी का उपवन है। हम सभी के पुरजन्मो का पुण्यफल है जो आज हम बांके बिहारी के चरणों के समीप बैठ कर उन्ही की कथा सुन रहे हैं सुना रहे हैं। इस मंदिर में विराजमान बांके बिहारी 2 सौ वर्ष पूर्व वृन्दावन से आये हैं । रीवा राजघराने की महारानी राणावत ने 200 वर्ष पूर्व इन्हें यहां आमन्त्रित किया और इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया। अकल्पनीय है , अविश्वसनीय है पर आज भी मां राणावत अपने आराध्य का नित्य दर्शन करती हैं। वे प्रभु की ऐसी परम् भक्त थीं कि इस जीवन के बाद भी अपने आराध्य के समीप ही रहना चाहती थीं।
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