संजय गांधी अस्पताल में कड़ाके की ठंड से ठिठुर रहे मरीज-तीमारदार, 500 कंबल के लिए भेजा प्रस्ताव

विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल में अस्पताल के वार्ड में कड़ाके की ठंड में परेशान हो रहे मरीज

By: Rajesh Patel

Published: 24 Dec 2020, 10:20 AM IST

रीवा. विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल में कड़ाके की ठंड में मरीज ठिठुर रहे हैं। ठंड से बचने अधिकतर मरीज व तीमारदारों को कंबल घर से लाना पड़ रहा है। मौसम का पारा लुढक़ने से दिनभर सर्द हवाओं से वार्ड में गलन अधिक रहती है। कुछ वार्डो को छोड़ दें तो ज्यादातर वार्ड में खिड़कियों से हवा प्रवेश होने से रात में ठंड का कहर बढ़ जाता है।
पुराने कंबल के उपयोग से कतरा रहे मरीज
जीएमएच में शिशु एवं बाल्य रोग व गायनी विभाग से लेकर एसजीएमएच के विभिन्न विभागों के वार्ड में पुराने कंबल दिए जाने से मरीज कंबलों के उपयोग से कतरा रहे हैं। इधर, अस्पताल प्रबंधन ५०० नए कंबलों की डिमांड की है। पखवारेभर बाद अभी तक कंबल नहीं आ सका है।
400 से अधिक मरीज ठंड में ठिठुर रहे
संजय गांधी अस्प्ताल परिसर में स्थित जीएमएच के शिशु एवं बाल्य विभाग में बच्चा वार्ड के अधिकतर बेड खाली पड़े हैं। यूनिट-2 में दो पोर्ट में वार्ड बनाया गया है। एक पार्ट पूरी तरह खाली है। दूसरे पार्ट में आधा दर्जन बेड पर कई दिनों से बच्चों का इलाज चल रहा है। बेड नंबर पर १६ दिसंबर से पांच साल का बच्चा भर्ती है। तीमार ने नर्स से कहा कि मैडम कंबल दिलवा दीजिए। घर से दो कंबल लाया हूं। दिनभर गलन रहती है। पास की खिडक़ी बंद नहीं है। जिससे रात में ठंड बढ़ जाती है। ठंड में रात बितना मुश्किल होता है।
शहडोल से रेफर होकर आया बच्चा ठंड से लड़ रहे जंग
शहडोल जिले के देवगढ़ निवासी शीलू प्रजापति अपने चार माह के बच्चे को लेकर बच्चा वार्ड में ठिठुर रही है। शहडोल अस्पताल से रेफर होकर १६ दिसंबर को जीएमएच में आई थी। कुछ दिन तक एनआरसी में रखा गया। अब बच्चा वार्ड में रखा गया है। शिशु चिकित्सा गहन इकाई के बगल वार्ड में बेड पर रखा गया है। कड़ाके की ठंड में घर से सिंगल कंबल लाए हैं। उसी के भरोसे ठंड में रात कट रही है। मां के मुताबिक स्टाफ नर्स से कहने के बाद भी कंबल नहीं दिया गया।
अधीक्षक ने 400 नए कंबलों का भेजा प्रस्ताव
संजय गांधी अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ शशीधर गर्ग ने विभिन्न वार्डो की डिमांड पर ५०० नए कंबल की डिमांड डीन कार्यालय को भेजा है। अस्पताल प्रबंधन पखवारेभर पहले कंबल खरीदी के लिए आर्डर किया है। लेकिन, अभी तक कंबल नहीं आए हैं। पुराने कंबल में जर्जर हो गए हैं। जिससे मरीज पुराने कंबलों के उपयोग से कतरा रहे हैं। मरीजों की संख्या कम होने के बाद भी बेड पर मरीजों को कंबल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
वर्जन...
वार्ड में कंबल उपलब्ध कराए गए हैं। मरीजों की डिमांड पर दिए जाते हैं। कुछ वार्डो से नए कंबलों की डिमांड आई है। अस्पताल के लिए 500 नएं कंबल का प्रस्ताव भेजा है।
डॉ. शशिधर गर्ग, प्रभारी अधीक्षक, संजय गांधी अस्पताल

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